आयुर्वेदिक विभाग ने पांवटा साहिब में 100 से अधिक लोगों को खिलाई मेडिकेटेड खीर

शरद पूर्णिमा के चांद की चांदनी में प्राचीन आयुर्वेदिक पद्धति से उपचारित की गई थी खीर, अस्थमा और माइग्रेन के रोगियों के लिए यही कारगर

HNN News पाउंटा साहिब नाहन

प्राचीन आयुर्वेदा पद्धति में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व माना जाता है। इसीलिए इस बार की शरद पूर्णिमा को जिला आयुर्वेदिक विभाग के द्वारा मेडिकेटेड खीर वितरित कर मनाया गया।

पांवटा साहिब में आयुर्वेदिक विभाग के द्वारा आयोजित कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए एस डी एम एल आर वर्मा ने करीब 100 से ज्यादा लोगों को शरद पूर्णिमा की चांदनी में आयुर्वेदिक जड़ी बूटियों से उपचारित की गई खीर को बांटा।

इस आयुर्वेदिक पूर्णिमा के चांद से उपचारित खीर के महत्व के बारे में जानकारी देते हुए उपायुक्त सिरमौर डॉक्टर आरके जो कि शरद पूर्णिमा के चांद का आयुर्वेदा में बड़ा ही महत्व है।

उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की चांदनी में एक खुले बर्तन में खीर को पीपल तथा पीपली की छाल के साथ विशेष रूप से उपचारित कर पूरी रात रखा जाता है। बताया जाता है कि इस उपचार के बाद यह खीर दिव्य दवा के रूप में परिवर्तित हो जाती है। यह एक विज्ञान है।

जिला आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ कविता शर्मा ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि अस्थमा स्वास्थ्य से संबंधित बीमारियों से ग्रसित रोगियों को इस शरद पूर्णिमा का बेसब्री से इंतजार रहता है। उन्होंने बताया कि उपचारित की गई खीर से जटिल से जटिल श्वास रोगियों को काफी राहत मिलती है।

पावटा साहिब में शरद पूर्णिमा के अवसर पर एसडीएम के के द्वारा 100 से भी अधिक लोगों को यह खीर बांटी गई।

उधर जिला सिरमौर उपायुक्त डॉ आरके प्रूथी ने बताया कि अस्थमा से ग्रसित रोगियों के लिए आयुर्वेदिक पद्धति में शरद पूर्णिमा के महत्व को बताया गया है। उन्होंने बताया कि खीर में पीपल तथा पीपली की छाल को साथ में पकाया जाता है जिससे इस औषधि का चांद की चांदनी में विशेष योग बन जाता है। जिसे क्रॉनिकल अस्थमा रोगियों के लिए बतौर दवा इस्तेमाल किया जाता है।