इन्वेस्टर मीट नहीं हिमाचल फॉर सेल है सरकार का कंसेप्ट- मुकेश

पहले से ही स्थापित उद्योगों की है दुर्दशा मूलभूत सुविधाओं के अभाव में पलायन की तैयारियां, इन्वेस्टर मीट को लेकर नेता प्रतिपक्ष के गंभीर आरोप

HNN News नाहन

करोड़ों रुपए खर्च कर करवाई जा रही इन्वेस्टर मीट विवादों में गिरती नजर आ रही है। सरकार महंगे विज्ञापनों के साथ-साथ महंगी से महंगी गाड़ियां व तमाम होटलों को पहले से ही रिजर्व कर करोड़ों रुपए दाव पर लगा चुकी है।

वही नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने इन्वेस्टर मीट को लेकर बताया कि पहले कांग्रेस ने बेचे जाने वाले होटलों को बड़ी मुश्किल से बचाया था। मगर इन्वेस्टर मीट के बहाने इन्होंने हिमाचल फॉर सेल का कांसेप्ट ला दिया है।

मुकेश अग्निहोत्री का कहना है कि इन्वेस्टर मीट के बहाने जो सुविधाएं आप बाहर के लोगों को ऑफर कर रहे हैं तो जिन्होंने अभी तक प्रदेश में इन्वेस्ट कर रखा है अच्छा होता कि यह सारी फैसिलिटी आप उनके लिए जुटाते । जिन निवेशकों ने पहले से प्रदेश में अरबों रुपए का इन्वेस्टमेंट कर रखा है प्रदेश सरकार उनके लिए तो कोई फैसिलिटी नहीं जुटा पाई है। और ना ही उनके लिए कुछ किया जा रहा है।

उन्होंने प्रदेश सरकार को कटघरे में खड़े करते हुए कहा कि पहले यह होटल बेचना चाहते थे हमने बचा लिया। अब सरकार हेरिटेज फॉर्मेसियों को बेचना चाह रही है बेशकीमती नदियां जमीन पहाड़ इन सब को सरकार ने सेल पर लगा दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की अफसरशाही सरकार पर हावी हो चुकी है। हो ने कहा कि देश में मंदी का दौर चला हुआ है और यह सरकार मंदी के दौर में इन्वेस्टर तलाश रही है। उन्होंने कहा कि यह प्रोग्राम और कुछ नहीं केवल इवेंट मैनेजमेंट है। सरकार अपने चहेतों को लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से प्रदेश की जमीनों को बेचने की तैयारी कर रही है।

बरहाल इसमें कोई शक नहीं है की इन्वेस्टर मीट एक तरह से पहले से स्थापित मूलभूत सुविधाओं की मार झेल रहे उद्योगपतियों के जख्मों पर केवल नमक छिड़कने का कार्य होगा। डबल इंजन की इस सरकार में प्रदेश के प्रमुख औद्योगिक क्षेत्रों में शुमार करने वाले काला अंब पावटा साहिब तथा बी बीएन में उद्योगपति मूलभूत सुविधाओं को लेकर भारी समस्या झेल रहा है।

अधिकतर उद्योगों को पानी के कनेक्शन तक नहीं है। लाखों रुपए का पानी टैंकरों से खरीदना पड़ता है। अधिकतर उद्योगों से जुड़ी सड़कों की हालत बद से भी बदतर हो चुकी है। ट्रैफिक जैम, पार्किंग की समस्या औद्योगिक क्षेत्रों में लेबर हॉस्टल का ना होना बिजली वाला प्रदेश होने के बावजूद उद्योगों में बार-बार बिजली के कट लगना यहां के पहले से ही स्थापित उद्योगों के उद्योगपतियों को सुविधाओं के नाम पर खून के आंसू रुलाए जाते हैं।

इसमें भी कोई शक नहीं अगर सरकार स्विट्जरलैंड की तर्ज पर हिमाचल में पर्यटन को लेकर इस फ्रूट बास्केट कहलाने वाली देवभूमि को ग्रीन प्लेनेट का दर्जा दिलाती तो निश्चित ही यहां की शुद्ध ऑक्सीजन का स्वाद चखने के लिए लाखों सैलानी आते।

पहले से ही भारी प्रदूषण की मार झेल रहे प्रदेश में इन बड़े उद्योगपतियों की इन्वेस्टमेंट के बाद प्रदेश के प्रदूषण का स्तर क्या होगा यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। मुकेश अग्निहोत्री की फोटो है