ईजाद हुई कोरोना की दवा, देश में प्रदेश को मिला दवा के निर्माण का दायित्व

ग्लेनमार्क कंपनी बद्दी को एक ही दिन में ड्रग अथॉरिटी ने जारी किया लाइसेंस ,दवा का निर्माण भी शुरू, यूएसएफडीए से अप्रूरूव है कंपनी, क्लिनिकल ट्रायल सफल

HNN News बद्दी नाहन

खबर दुनिया बाद देश के लिए बड़ी राहत भरी है । कॉविड 19 वायरस की दवा का क्लीनिकल ट्रायल पूरा हो जाने के बाद देश में इस दवा के निर्माण की जिम्मेवारी ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल कंपनी को मिल गई है। और इससे भी बड़ी बात यह है कि देश में यह दवा कंपनी ने हिमाचल में बद्दी स्थित अपनी कंपनी में बनाने का निर्णय ले लिया है।

जापान रशिया और चीन में सफल परीक्षणों के बाद कोविड-19 की दवा के निर्माण का सौभाग्य देश में हिमाचल प्रदेश फार्मा हब को मिला है। हिमाचल प्रदेश सरकार के द्वारा ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल कंपनी को कोविड-19 की दवा बनाने का लाइसेंस भी एक ही दिन में जारी कर दिया गया है।

यह बड़े सौभाग्य की बात है कि कोरोना का मरने के लिए ब्रह्मास्त्र का निर्माण हिमाचल प्रदेश को मिला है। यहां यह भी बता दें कि जिस कंपनी को टेबलेट के रूप में इस दवा के निर्माण की परमिशन मिली है वह कंपनी यूएस एफडीए से अप्रूव प्लांट है।

एंटीवायरल दवा फेवी पैरा वीर को फेवी फ्लू ब्रांड नाम से लॉन्च किया गया है। देश में इस दवा के निर्माण को लेकर भारतीय औषधि नियंत्रक डीजीसीआई के द्वारा अप्रूवल दे दी गई है। मुंबई की इस कंपनी ने हिमाचल में बद्दी स्थित अपने इस प्लांट में दवा को बनाने का निर्णय लिया है।

यहां यह भी जान लेना जरूरी है कि इस कोविड-19 कारगर दवा का क्लिनिकल ट्रायल और मनुष्य पर इस्तेमाल के सही नतीजों के बाद ही इंडियन गवर्नमेंट इसे अप्रूवल देती है। जाहिर है यह दवा इन परीक्षणों में पास हो चुकी है। यह दवा इतनी कारगर बताई जा रही है कि कोरोना के 12 से 13 दिन के स्पेन को यह 7 दिनों में रिड्यूस कर देती है।

चूंकि प्रदेश में इस दवा के निर्माण के लिए हिमाचल औषध नियंत्रण से लाइसेंस लेना जरूरी होता है। लिहाजा हिमाचल गवर्नमेंट ने प्रायोरिटी पर ड्रग डिपार्टमेंट के दक्ष अधिकारियों कुछ औपचारिकताओं की जिम्मेवारी सौंपी। जग डिपार्टमेंट के इन अधिकारियों ने एक ही दिन में तमाम औपचारिकताओं को संयुक्त रूप से पूर्ण करते हुए कंपनी को लाइसेंस जारी कर दिया है।

हिमाचल प्रदेश दवा नियंत्रक नवनीत मरवाह ने बताया कि बद्दी स्थित एडीसी कमलेश के द्वारा लाइसेंस को अप्रूवल दे दी गई है। हिमाचल में यह दवा टेबलेट के रूप में बनेगी। उन्होंने जानकारी देते हुए बताया कि यह टेबलेट करीब ₹103 की होगी। 34 टेबलेट का पत्ता ₹35 00में मिलेगा।

प्राप्त जानकारी के अनुसार पहले दिन इसकी 1800mg की दो डोज होगी उसके बाद 14 दिनों तक 800 एमजी स्तर पर यह दबा दो वक्त लेनी होगी। डीजीसीआई से इस दवा के निर्माण तथा विपणन की अनुमति भी मिल चुकी है।

बरहाल यह बड़े गर्व की बात है कि दुनिया के गिने-चुने देशों में अब भारत का शुमार इस दवा के निर्माण के लिए हो चुका है और इस दवा के निर्माण का पहला तगमां हिमाचल प्रदेश के कंधों पर चला गया है। अब देखना यह भी होगा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज करवा रहे कोरोना के रोगियों को सरकार यह दवा मुफ्त में कैसे और कब उपलब्ध कराएगी।

उधर खबर की पुष्टि राज्य औषधि नियंत्रक नवनीत मरवाह के द्वारा की गई है।