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उपचुनाव को लेकर गिरी पार क्षेत्र हक की लड़ेगा लड़ाई!

30 से अधिक पंचायतों के प्रधानों ने पहले ही दे दिए हैं इसके संकेत, राजगढ़ क्षेत्र से हो कोई भी प्रत्याशी गिरी आर क्षेत्र का मंजूर नहीं

HNN News पच्छाद

यूं तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने सफल जन मंच का संचालन करते हुए क्षेत्र के लोगों के दिल जीतने की पूरी कोशिश की है। मगर फिर भी लोग गिरी आर गिरी पार की लड़ाई में इस बार हक के साथ वर्चस्व की जंग लड़ने को भी तैयार हो चुके हैं।

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यहां सबसे पहले यह भी बताना जरूरी है कि शिमला में अभी फिलहाल संगठनात्मक बैठक हुई है जिसमें उपचुनाव को लेकर विचार विमर्श किया गया है कुछ जिम्मेदारियां सुनिश्चित की गई है। कैंडिडेट कौन होगा इस पर कोई चर्चा नहीं हुई है। उपचुनाव में कौन प्रत्याशी होगा यह तो चुनाव समिति की बैठक के बाद ही पता चल पाएगा। मगर कुछ नाम चर्चाओं में चलने शुरू हो चुके हैं।

हालांकि पूर्व विधायक व मौजूदा सांसद सुरेश कश्यप सरांहा क्षेत्र से ज्यादा राजगढ़ क्षेत्र में अक्सर ज्यादा विकास की मांग सरकार से रखते हैं। बावजूद इसके इस क्षेत्र के लोगों का कहना है कि उपचुनाव में प्रत्याशी गिरी पार क्षेत्र से ही होना चाहिए।

अब गिरी पार के क्षेत्र में भले ही कोई दमदार प्रत्याशी नजर ना आता हो मगर भाजपा का दावा है कि कि जीतना तो भाजपा का ही कैंडिडेट है। लिहाजा राजनीतिक लहजे से हमेशा खुद को ठगा हुआ महसूस करने वाला यह क्षेत्र इस बार गिरी पार क्षेत्र से कैंडिडेट की मांग पर अड़ गया है। बड़ी बात यहां यह भी बताना जरूरी है कि संसदीय चुनाव में और विधानसभा के चुनावों में सबसे ज्यादा मत प्रतिशत भी राजगढ़ क्षेत्र का ही रहा है।

मौजूदा सांसद व पूर्व विधायक गिरी आर क्षेत्र से रहे हैं। राजगढ़ यानी ट्रांस गिरी एरिया विकास के नजरिए से काफी पिछड़ा हुआ है। सड़कों की हालत बद से भी बदतर है। विकास के नजरिए से और राजनीतिक दृष्टिकोण से हाशिए पर चल रहा है यह क्षेत्र अब धीरे-धीरे चिंगारी की तरह सुलग रहा है।

इसमें भी कोई शक नहीं है कि कठिन से कठिन परिस्थितियों में कूटनीति के माहिर तेजतर्रार भाजपा विधायक व विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल को एक बड़ा गेम चेंजर भी माना जाता है। इसका सबूत उन्होंने जनमंच पर दे भी दिया है। अधिकारियों व शिकायत कर्ताओं के बीच जिस तरह का सामंजस्य देखने को मिला उससे ना तो अधिकारी नाराज था और ना ही शिकायतकर्ता।

तो वही प्रदेश भाजपा प्रभारी मंगल पांडे ने अपनी राजनीतिक कुशलता का परिचय देते हुए पच्छाद का बोझ बिंदल के कंधों पर डाल दिया है। क्योंकि राजगढ़ क्षेत्र के फागु में रविवार को आयोजित हुए जनमंच की कमान भी हाईकमान ने बिंदल को सौंपी थी।

इस जनमंच में बड़ी बात तो यह रहेगी शिकायतें व समस्याएं वह उनके समाधान को लेकर विधानसभा अध्यक्ष खुद मंच पर करीब साढे 3 घंटे से ज्यादा लगातार खड़े रहे और बोलते भी रहे। यूं तो प्रदेश में भाजपा की सरकार बनने से लेकर अब तक विधानसभा अध्यक्ष कई अग्नि परीक्षाओं से गुजर चुके हैं। मगर यह उपचुनाव की अग्नि परीक्षा उनके भाग्य की दिशा को भी बदलेगी।

मगर जिस प्रकार चुनावों से कुछ महीने पहले भाजपा के चक्रव्यू में जो छेद हुआ है उसमें यदि परिवारवाद की राजनीति को हवा दी जाती है तो यह किला फिलहाल इस चुनाव में ना सही मगर भविष्य में ढह जरूर जाएगा । इस पर गिरी आर और गिरी पार क्षेत्र में भी दबी जुबान से बड़ी नाराजगी व्यक्त की जा रही है।

क्षेत्र में जातीय समीकरण के आधार पर देखा जाए तो भले ही कोली समुदाय करीब 35 से 36 फ़ीसदी है मगर ब्राह्मण व राजपूत समुदाय के साथ-साथ लोहार व डोम समुदाय इस बार इकट्ठा हो चुका है। वजह गिरी आर और गिरी पार सीट रिजर्व होने के चलते लोहार जाति से संबंध रखने वाले बलदेव धीमान कश्यप पर अपनी सहमति दे भी रहे हैं।

क्योंकि यह प्रत्याशी ना तो गिरी पार क्षेत्र में आता है ना गिरी आर क्षेत्र में आता है इसका संबंध दोनों क्षेत्रों के बीच का है। अब यदि परिवारवाद की बात की जाए तो लोगों की नब्ज भी टटोली गई है। दोनों क्षेत्रों के लोगों का कहना है कि अगर हाईकमान परिवारवाद पर ही निर्णय लेना चाहती है तो सुरेश कश्यप के जीजा को नहीं बल्कि उनकी पत्नी रजनी कश्यप को मैदान में उतारा जाना चाहिए।

ऐसे में पारिवारिक संबंधों के हवाला में संभवत हाशिए पर चल रही दयाल प्यारी को भी मनाने के लिए रजनी कश्यप कामयाब हो सकती है। दयाल प्यारी भाजपा की दमदार नेता रही है। मगर बलदेव भंडारी पर उनके द्वारा लगाए गए आरोपों के चलते भाजपा मंडल व मुख्य पदाधिकारी दयाल प्यारी के समर्थन में नहीं है। मगर राजगढ़ क्षेत्र से संबंध रखने वाले मुख्य भाजपा नेता आशीष के बाद दयाल प्यारी को अपनी पहली पसंद मानते हैं। इसमें भी कोई शक नहीं है की जो दयाल प्यारी का अब विरोध कर रहे हैं पहले भी उन्हीं लोगों ने विरोध किया था मगर वह भारी मतों से जिला परिषद जीती थी।

इसके अलावा आशीष सिंह का रीना कश्यप सुरेंद्र चौहान, का नाम टिकट की दौड़ में शामिल है। अब ऐसे में उच्च पदस्थ सूत्रों की मानी जाए तो गिरी पार क्षेत्र के दिग्गज भाजपा नेता की पहली पसंद दयाल प्यारी मानी जा रही है। ऑप्शन में आशीष का नाम सेकंड पोजीशन पर चल रहा है। अब यहां यह भी देखना होगा की उपचुनाव में इस क्षेत्र के लिए धूमल गुड या फिर मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर कहा जिस पर होगा वही प्रत्याशी होगा।

यह भी तय है कि मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर जिस पर अपना हाथ रखेंगे वहीं उपचुनाव में इस क्षेत्र से प्रत्याशी होगा। जो रुझान निकल कर सामने आ रहे हैं उससे तो यह साफ है कि इस बार गिरी पार क्षेत्र को ही हिमाचल प्रदेश की विधानसभा में बैठने का मौका मिलेगा।

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