कलयुग में केवल मात्र सत्संग व कीर्तन ही प्रभु की प्राप्ति का साधन है- हेमानन्द महाराज

HNN / ऊना, वीरेंद्र बन्याल

उप-तहसील जोल में बाबा रूद्र नंद आश्रम नारी के महाराज हेमानंद द्वारा सत्संग प्रवचनों की अमृत गंगा का आयोजन हुआ। इसका आयोजन पूर्व पंचायत प्रधान रामपाल शर्मा द्वारा अपने सुपुत्र की शादी के उपलक्ष में करवाया। इस अवसर पर महाराज हेमानंद ने कहा कि हम अपनी संस्कृति व धार्मिक आस्थाओं को भूलते जा रहे हैं। अगर हम किसी से प्रभु के भजन सुमरीन की बात करते हैं तो उनका एक ही मत या कहना रहता है कि हमारे पास समय नहीं। इसी के चलते हमें शरीरी दुख व कष्टों को सहना पड़ता है। महाराज हेमानंद जी ने कहा की मनुष्य को 24 घंटे में 6 घंटे प्रभु का भजन करना चाहिए।

अगर यह भी असंभव हो,तो हमें कम से कम एक घंटा प्रभु का सुमिरन करना चाहिए। जिससे हम अपने दुख और पापों से मुक्ति पा सकें। उन्होंने माता पिता की सेवा करने के लिए सभी भक्तों को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि ग्रस्त जीवन ही सबसे उत्तम जीवन है। क्योंकि आजकल के युग में हम पुराणिक भक्ति नहीं कर सकते। क्योंकि पहले साधु संत ऐसी भक्ति करते थे कि उनके शरीर पर बर्मी में तब्दील हो जाता था अर्थात उनके शरीर पर मिट्टी झड़ जाती थी लेकिन फिर भी उनकी भक्ति साधना नहीं टूटती थी।

लेकिन आजकल ऐसी साधना करना किसी के बस की नहीं है। इसीलिए ग्रस्त साधना को ही सबसे बड़ी साधना माना गया है। हमारी दिनचर्या कैसी रहे इसके बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने कहा कि हमें स्नान करने के उपरांत ही भोजन तैयार करना चाहिए। भोजन तैयार करते समय हमें प्रभु का सिमरन जरूर करना चाहिए। ऐसा करने से वे भोजन प्रसाद का रूप ग्रहण करता है। उसे खाने से हमारा मन पवित्र होता है।

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