खुल गया है श्री रेणुका जी झील की उम्र का रहस्य… झील की उम्र है…

3000 वर्ष पुरानी है श्री रेणुका जी झील
HNN News शैलेश सैनी

अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त तथा धार्मिक महत्व से जुड़ी मीठे पानी की पवित्र झील श्री रेणुका जी की उम्र का राज भी खुल गया है। झील से लिए गए कोर सैंपल की रिपोर्ट के बाद जो कार्बन डेटिंग की रिपोर्ट आई है। उससे आस्था भी प्रमाणिक होती है और उम्र का भी पता लग गया है।
वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जियोलॉजिकल सेंटर देहरादून के द्वारा कोर सेंपलिंग के बाद कार्बन डेटिंग की रिपोर्ट आ गई है। जिसमें इस झील की उम्र का आंकलन 3000 वर्ष पुराना निकला है। संस्थान ने आईयू एसी दिल्ली भारत सरकार से एनालिसिस मैं ली गई मदद के बाद उम्र का सटीक प्रमाण मिला है।

इस झील सहित हिमालयन क्षेत्र की वॉटर बॉडी की रिसर्च से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नरेंद्र मीणा तथा रिसर्च स्कॉलर प्रणय से हुई बातचीत के बाद यह खुलासा हुआ है। उन्होंने बताया कि 4 सितंबर 2010 को इस झील कि करीब 35 से 25 मीटर तक की गहराई के कोर सैंपल बड़ी ही आधुनिक तकनीक से लिए गए थे। सुरक्षित किए गए कोर्स सैंपल को कार्बन डेटिंग हेतु इंटर यूनिवर्सिटी न्यूक्लर स्टडी साइंस सेंटर“IUAC” भेजा गया था।
हालांकि प्रदेश की पोंग रिवालसर व अन्य झीलोंं सहित श्री रेणुका जी झील कि कंपलीट स्टडी आ चुकी है। उस स्टडी में इस झील की वास्तविक उम्र का भी पता लगाया गया है।

अब जो रिसर्च सामने आई है उससे यह भी पता चला है कि जिस स्थान पर झील है वहां से होकर गिरी नदी गुजरा करती थी। इसके पूरे प्रमाण भी मौजूद हैं। चांदनी गांव से आगे तथा झील के बीच के एरिया को अगर देखा जाए तो कभी नदी क्षेत्र होने के प्रमाण आज भी दिखाई देते हैं। भूकंप या भौगोलिक परिस्थितियों के बदलाव के चलते गिरी नदी ने अपना रास्ता बदल लिया। जबकि यह स्थान झील के रूप में मौजूद रहा।

काबिले गौर हो कि इस बाबत एक अलर्ट भी संस्थान ने इस झील के वजूद को लेकर जारी किया है। जिसमें लगातार इस झील में पानी के साथ बैठकर जा रहे मल मूत्र खाद आदि के कारण न्यूट्रीशन वैल्यू बढ़ने से प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। इससे झील बड़ी तेजी से भर रही है। जिस झील की गहराई का कोई अनुमान नहीं था वह झील आज मात्र 13 मीटर गहरी ही रह गई है।
हमें पहले भी बता चुके हैं और अब फिर बता रहे हैं कि यह झील सेरिन साइट है यही नहीं अंतरराष्ट्रीय महत्व के कारण सन 2005 में इसे रामसर साइट के रूप में भी घोषित किया गया है।

हैरानी तो इस बात की है कि एक और जहां देश सहित प्रदेश के लोग इस झील को पवित्र मां के रूप में पूजते हैं बावजूद इसके इस झील को बचाने के बजाएं इस क्षेत्र को वेटलैंड से भी बाहर करवाना चाहते हैं।
अब यदि प्रदेश सरकार तथा मिनिस्ट्री आफ एनवायरमेंट एम फॉरेस्ट्स भारत सरकार की बात की जाए तो सरकार एक बड़ा प्रोजेक्ट केवल झील के संरक्षण को लेकर भूगर्भीय वैज्ञानिकों से विस्तृत प्लान तैयार करवाना होगा। क्योंकि यह ना केवल राष्ट्रीय बल्कि अंतरराष्ट्रीय धरोहर है लिहाजा इसके लिए बजट के प्रावधान में भी कोई कमी नहीं आनी चाहिए।

उधर डॉक्टर नरेंद्र मीणा ने बताया कि झील की कार्बन डेटिंग रिपोर्ट भी आ चुकी है जिसमें इस झील की उम्र लगभग 3000 वर्ष आंकी गई है।
उधर एनवायरमेंट काउंसिल प्रमुख हिमाचल प्रदेश से कुणाल सत्यार्थी का कहना है कि इस विषय को गंभीरता से लिया जाएगा। प्रदेश सरकार एनवायरमेंट के नजरिए से धरोहरों के संरक्षण को लेकर गंभीर है। वाडिया संस्थान से संपर्क कर रिपोर्ट मंगाई जाएंगी निश्चित ही संबंधित रिसर्च से जुड़े वैज्ञानिकों से इसके संरक्षण को लेकर उपाय भी पूछे जाएंगे।

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