चमत्कार से कम नहीं है “अग्निकर्म”से हर दर्द में राहत

जिला सिरमौर आयुर्वेदिक विभाग एलोपैथिक पर भारी
ऑपरेशन ना गोली और ना ही इंजेक्शन पर इलाज की गारंटी

HNN News नाहन

स्थानीय विधायक व विधानसभा अध्यक्ष राजीव बिंदल ना केवल एक अच्छे राजनीतिज्ञ हैं बल्कि आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में भी उनका कोई सानी नहीं है। आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति के ज्ञान को उन्होंने अब आयुर्वेदिक विभाग के चिकित्सकों के माध्यम से जनहित उपयोगी बना दिया है।

यही वजह है कि उन्होंने इस बार ग्रामीण विकास प्राधिकरण द्वारा आयोजित ऐतिहासिक चौगान मैदान के मेले में डॉ प्रमोद पारीक को अग्निकर्म से लोगों के इलाज का जिम्मा सौंपा है।

क्या है अग्निकर्म चिकित्सा

यह तो पूरी दुनिया जानती है कि आज की आधुनिक चिकित्सा पद्धति यानी एलोपैथिक साइंस भी हमारे भारतीय आयुर्विज्ञान के बेसिक सिद्धांतों पर आधारित है मगर मूल उद्देश्य व तत्वों से दूर है।

भारतीय आयुर्वेदिक शास्त्र के सुश्रुत संहिता में अग्निकर्म चिकित्सा पद्धति का विस्तृत रूप से वर्णन किया गया है। अग्निकर्म से उपचार यानी हर प्रकार के दर्द से राहत। हालांकि यह ईलाज विदेशों में और केरल जैसे राज्य में बड़ा ही महंगा पड़ता है। मगर हिमाचल प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग के अंतर्गत नाहन के चौगान मैदान में विभाग द्वारा लगाए गए कैंप में इस पद्धति से इलाज बिल्कुल निशुल्क किया जा रहा है। इस कैंप में अभी तक दर्जनों ऐसे मरीजों ने राहत पाई है जॉब पिछले 20 पच्चीस वर्षों से घुटने व कमर की दर्द से जूझ रहे थे।

डॉक्टर प्रमोद पारीक क्या कहते हैं

चिकित्सक डॉ प्रमोद पारीक ने बताया कि सुश्रुत संहिता में वर्णित इस टेक्नीक द्वारा कमर दर्द, एड़ी के दर्द, घुटने की पीड़ा, गर्दन ,बाजू, कलाई में होने वाले वायु के दर्दो का इलाज किया जाता है। इसके तहत पंच धातु की बनी शलाका को आग पर तपा कर निश्चित पॉइंट्स पर दाह कर्म किया जाता है ।जिससे वायु का निवारण होकर दर्द में राहत मिलती है।

जिला आयुर्वेद अधिकारी डॉ कविता शर्मा ने बताया कि जिला आयुर्वेद चिकित्सालय में भी अग्निकर्म द्वारा इलाज किया जा रहा जिसका लाभ सामान्य जनता को हो रहा है। उन्होंने बताया कि डॉक्टर प्रमोद पारीक पंच कर्मा चिकित्सा पद्धति के विशेषज्ञ हैं। कैंप के बाद नाहन जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में इस अग्निकर्म चिकित्सा पद्धति को जारी रखा जाएगा।

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