छात्र मांगों को लेकर एसएफआई ने किया धरना प्रदर्शन

HNN/ शिमला

आज एसएफआई हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई ने छात्र मांगों को लेकर पिंक पैटल्स पर धरना प्रदर्शन किया। शिक्षा की गुणवत्ता की बात करने वाला विश्वविद्यालय प्रशासन अपने चहेतों को भर्ती करने में मशगूल है इसका ताजा उदाहरण हमे दीन दयाल उपाध्याय पीठ में देखने को मिला है जहां पीएचडी की सीटों को बिना प्रकाशित किए 5 से 13 किया गया ताकि अपने चहेतों को पीएचडी में एनरोल करवा सकें। विश्वविद्यालय को धांधलियों का अखाड़ा बनाने में प्रदेश सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन कोई कसर नहीं छोड़ रहा है। विश्वविद्यालय में दिन प्रतिदिन नई नई धांधलियां सामने आ रही है।

मसला यह है कि जनवरी महीने में विश्वविद्यालय प्रशासन दीन दयाल उपाध्याय पीठ में पीएचडी की 5 सीटें भरने के लिए आवेदन के लिए अधिसूचना जारी करता है जिसके लिए 30 के लगभग आवेदन आते हैं और मैरिट तैयार की जाती है शॉर्टलिस्ट किया जाता है लेकिन उसके बाद 12 सीटें भरी जाती है और प्रक्रिया पूरी होने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन को अपने विशेष चहेते की याद आती है और उसके समेत 13 सीट्स भरी जाती है। बिना अधिसूचना जारी किए आवेदकों को अवसरों की समानता न देकर अपने चहेतों के लिए बिना प्रकाशित किए ही पीएचडी की 8 सीटें भरी जाती है। एसएफआई पिछले सप्ताह भी इस मुद्दे को लेकर डीन ऑफ स्टडीज को ज्ञापन सौंप चुकी है लेकिन अभी तक इस विषय पर कोई भी संज्ञान नही लिया गया है।

एसएफआई का स्पष्ट मानना है कि इस तरह के कारनामे प्रशासन के संरक्षण में किए जा रहे हैं। एसएफआई ने मांग की है कि ईआरपी में आ रही दिक्कतों को भी जल्द ठीक किया जाए। जिस प्रशासनिक तंत्र की स्थिति को सुदृढ़ करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर ईआरपी सिस्टम को सेटअप किया गया था आज उस सिस्टम की पोल खुल चुकी है छात्रों को बार बार अपना रिजल्ट और अन्य कामों के लिए विश्वविद्यालय आना पड़ रहा है फिर भी उनके काम नहीं हो रहे है जिससे छात्रों को मानसिक और आर्थिक रूप से परेशान होना पड़ रहा है एसएफआई ने स्पष्ट किया है कि जल्द से जल्द ईआरपी सिस्टम की खामियों को दुरुस्त किया जाए। मूल्यांकन शिक्षा का आधार है और मूल्यांकन ही जब ठेकेदारी पर दे दिया जाए तो मूल्यांकन की क्या हालत होगी यह शिक्षा की गुणवत्ता पर भी एक सवालिया निशान है।

विश्वविद्यालय पहले ही तीन विभागों की मूल्यांकन प्रक्रिया को ठेकेदारी पर दे चुका है और गौरतलब यह है कि आने वाले समय मे अन्य विभागों को भी इसके अंदर लाने का प्रयास किया जा रहा है जो दर्शाता है कि विश्वविद्यालय को शिक्षा की गुणवत्ता से कोई लेना देना नहीं है बल्कि सिर्फ प्रशासनिक कामों से अपना पल्ला झाड़ने का काम कर रहा है। कोरोना काल में करोड़ों लोगों ने अपनी रोजी रोटी खोई है हिमाचल प्रदेश भी इससे अछूता नहीं रहा है लोगों को दो वक्त की रोटी के लिए संघर्ष करना पड़ा।

कोरोना महामारी से जहां न केवल आर्थिक नुकसान हुआ है बल्कि मानसिक प्रताड़ना का भी शिकार होना पड़ा है एसएफआई ने मांग की है कि जो इस सत्र के लिए फीस ली है रही है डिपार्टमेंट्स में उनमे सिर्फ टयूशन फीस ही ली जाए और अगर आने वाले वक्त में ऑनलाइन पढ़ाई के अन्दर जाना पड़ा तो विश्वविद्यालय प्रशासन इस टयूशन फीस से सभी छात्रों के लिए मुफ्त इंटरनेट मुहैया करवाई। कैंपस सचिव रॉकी ने बताया कि शैक्षणिक संस्थाओं में आने वाले समय में स्पोर्ट्स और कल्चर कोटा खत्म करने जा रहा है जिसके लिए केंद्र सरकार ने एक कमेटी भी गठित की गई है और आज के समय में शिक्षक छात्र और खिलाड़ी केंद सरकार के इस फैसले का अपने स्तर पर विरोध कर रहे हैं और एसएफआई एक छात्र संगठन होने के नाते केंद्र सरकार के इस फैसले का विरोध करती है।

एक तरफ तो सरकारें स्पोर्ट्स और कल्चर को प्रोमोट करने का बार बार जिक्र करती हैं और दूसरी ओर ऐसे फरमान जारी करती हैं जो सरासर गलत है। एसएफआई ने यह भी मांग की है कि विश्वविद्यालय में जो ये आजकल बिजली के कट्स बार बार लग रहे हैं इसके कारण विश्वविद्यालय में सभी तरह के कामों में बाधा उत्पन्न हो रही है अतः इस पर भी उचित कदम उठाया जाए। कैंपस जॉइंट-सेक्रेटरी ओमी ने बताया कि एसएफआई पिछले लंबे समय से मांग कर रही है कि कोरोना वायरस से इस जंग में जब हमारे हथियार ही कमजोर होंगे तो जंग नहीं जीती जा सकती है।

हम लम्बे समय से मांग कर रहे हैं कि कैंपस में परमानेंट वैक्सीनेशन सेंटर खोला जाए जब तक विश्वविद्यालय में पढ़ने वाला छात्र और विश्वविद्यालय का कर्मचारी वैक्सीनेट नहीं हो जाता लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। विश्वविद्यालय प्रशासन के यही हाल रहे तो थर्ड वेव के प्रकोप से कोई नही बच पायेगा। एसएफआई का स्पष्ट मानना है कि थर्ड वेव से बचने के लिए वेक्सीन ही एकमात्र विकल्प है अतः विश्वविद्यालय परिसर में वैक्सीनेशन सेंटर की व्यवस्था की जाए। विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष विवेक राज ने बताया कि अगर इन सभी मुद्दों पर जल्द से जल्द संज्ञान नही लिया गया तो आने वाले समय मे विश्वविद्यालय प्रशासन और प्रदेश सरकार एक उग्र आंदोलन के लिए तैयार रहे।

लेटेस्ट न्यूज़ एवम अपडेट्स अपने व्हाटसऐप पर पाने के लिए हमारी व्हाटसऐप बुलेटिन सर्विस को सब्सक्राइब करें। सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें।

वीडियो