जलवाहकों को अंशकालीन कहने पर हाईकोर्ट ने जताई कड़ी आपत्ति

HNN News/शिमला
प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्कूलों में कार्यरत जलवाहकों को दैनिक भोगी की जगह अंशकालीन शब्द से संबोधित करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि जब उन्हें स्कूल खुलने से पूर्व और स्कूल खुला रहने तक काम करना पड़ता है तो उनके लिए अंशकालीन जैसे शब्द का क्यों इस्तेमाल किया जाता है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि इस तरह के जलवाहकों को अंशकालीन की बजाय दैनिक भोगी के तौर पर माना जाना चाहिए।

उन्हें दैनिक भोगियों के लिए बनाई गई नियमितीकरण की नीति के अनुरूप नियमित किया जाना चाहिए। मामले पर सुनवाई 23 फरवरी 2019 को निर्धारित की गई है।

प्रदेश उच्च न्यायालय ने स्कूलों में कार्यरत जलवाहकों को दैनिक भोगी की जगह अंशकालीन शब्द से संबोधित करने पर कड़ी आपत्ति जताई है।

न्यायालय ने सरकार से पूछा है कि जब उन्हें स्कूल खुलने से पूर्व और स्कूल खुला रहने तक काम करना पड़ता है तो उनके लिए अंशकालीन जैसे शब्द का क्यों इस्तेमाल किया जाता है।

उल्लेखनीय है कि अंशकालीन जलवाहकों को 10 साल का कार्यकाल पूरा करने के बाद दैनिक भोगी बनाया जाता है। दैनिक भोगी बनने के बाद उन्हें राज्य सरकार की ओर से बनाई गई नियमितीकरण की नीति के मुताबिक नियमित किया जाता है।

उन्हें 10 वर्ष तक दैनिक भोगी बनने के लिए 10 साल बतौर अंशकालीन कार्य करना पड़ता है जबकि उनकी तरह दैनिक भोगी के तौर पर कार्य करने वालों को नियमितीकरण की नीति के मुताबिक वर्तमान समय में 5 वर्षों बाद नियमित किया जाता है। न्यायालय ने इन सभी तथ्यों के दृष्टिगत राज्य सरकार को इस बाबत अपना स्पष्टीकरण देने के आदेश जारी किए हैं।

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