जाखू में मुख्यमंत्री ने तो नाहन में बिंदल ने दागा रावण पर अग्निबाण

देश का सबसे बड़ा 221 फुट ऊंचा रावण चंडीगढ़ में, तो प्रदेश में अधिकतर रावण के पुतले प्लास्टिक मुक्त.. प्लास्टिक की रावण से तुलना

HNN News नाहन

यूं तो देश में रोज बुराई के खिलाफ जंग लड़ी जाती है मगर इस बुराई पर अच्छाई की विजय के रूप में मनाए जाने वाले दशहरा पर्व को देश सहित प्रदेश में बड़ी धूमधाम से मनाया गया।

देश का सबसे रावण का दहन चंडीगढ़ में हुआ तो वहीं हिमाचल प्रदेश में जाखू मंदिर परिसर मैं मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रिमोट बटन से रावण का दहन किया। उधर जिला सिरमौर में धीरे-धीरे बड़े उत्सव का रूप लेते जा रहा चौगान मैदान में लंका व रावण का दहन विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने अग्निबाण चलाकर किया।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने पूरे प्रदेश को विजयदशमी पर्व की शुभकामनाएं देते हुए प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने में सहयोग करने की अपील भी की।

जाखू मंदिर परिसर में मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने रिमोट से किया रावण का दहन

इस दौरान उनके साथ नगर परिषद की चेयरमैन रेखा तोमर जिला भाजपा अध्यक्ष विनय गुप्ता उपायुक्त सिरमौर आरके परुथी एसपी सिरमौर अजय कृष्ण शर्मा नगर परिषद के कार्यकारी अधिकारी अजमेर सिंह सड़क सुरक्षा क्लब के अध्यक्ष विशाल तोमर भाजपा महिला मोर्चा नाहन की अध्यक्ष पूजा तोमर तथा समस्त पार्षद मुख्य रूप से मौजूद रहे। नगर परिषद के अध्यक्ष रेखा तोमर ने कहा प्लास्टिक पॉलिथीन रावण के जैसे हैं जिन का खात्मा किया जाना बहुत जरूरी है।

सोलन में रावण दहन

हालांकि हर वर्ष की भांति इस बार चौगान मैदान की आतिशबाजी कोई खास रंग ना जमा पाई। बल्कि पहाड़ी धुनों पर युवा युवतियों ने जमकर नाटिंया डाली। पूरा मैदान झूम रहा था।

पहाड़ी नॉटीओ पर थिरकते युवा

उधर सोलन पांवटा साहिब औद्योगिक क्षेत्र काला आम बद्दी श्री रेणुका जी सहित प्रदेश के कई जिलों व कस्बों में लंका के साथ रावण का दहन हुआ। उधर माजरा पावटा साहिब और काला आम में आकर्षक झांकियां भी निकाली गई।

विधानसभा अध्यक्ष व स्थानीय विधायक राजीव बिंदल ने लोगों को दशहरे की शुभकामनाएं देते हुए शहर व गांव के तालाब बावड़ीओं में साफ सफाई व उनके संरक्षण तथा प्रदेश को प्लास्टिक मुक्त बनाने के लिए आम लोगों से अपील भी करी।

उन्होंने कहा कि हर बुरी आदत रावण है जिसका ना केवल विचारों से बल्कि सैद्धांतिक रूप से उसका दहन किया जाना चाहिए। रावण मेघनाथ कुंभकरण ने बुराई का साथ दिया था इसलिए रावण के साथ उन्हें भी बुराई के साथ बुरे के अंत का सहभागी होना पड़ा था।