दयाल प्यारी के चौके छक्कों से दहलने लगी भाजपा

HNN/ नाहन

2022 का चुनावी वर्ष शुरू हो चुका है। भावी प्रत्याशियों को लेकर पार्टी दिग्गजों ने जनता की नब्ज टटोलना शुरू कर दिया है। जिला सिरमौर कांग्रेस का मजबूत किला माना जाता था। इस किले में प्रदेश भाजपा अध्यक्ष सुरेश कश्यप की सेंधमारी के बाद जिला में कांग्रेस बैकफुट पर चली गई थी। तो वही, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र से कांग्रेस के प्रमुख चेहरे जीआर मुसाफिर तीन बार भाजपा से पटकनी खा चुके हैं। बावजूद इसके चौथी बार मैदान में उतरने की जद्दोजहद में है।

अब यदि कूटनीति स्तर पर बात की जाए तो भाजपा के रणनीतिकार जीआर मुसाफिर फिर से मैदान में उतरे कुछ ऐसी इच्छा रखते हैं। ऐसे में कभी भाजपा का इस विधानसभा क्षेत्र से दमदार चेहरा माने जाने वाली दयाल प्यारी अब कांग्रेस में शामिल हो चुकी है। यही नहीं दयाल प्यारी मौजूदा समय प्रदेश कांग्रेस सचिव के पद पर भी आसीन है। बड़ी बात तो यह है कि पार्टी के प्रति पूरी निष्ठा और सम्मान के साथ कार्य भी कर रही हैं। पार्टी की ओर से हाल ही में चंडीगढ़ में हुए नगर निगम चुनाव में वार्ड नंबर 20 की जिम्मेवारी इन्हें सौंपी गई थी।

जिसमें गुरु चरणजीत सिंह की जीत सुनिश्चित करने में दयाल प्यारी कामयाबी रही। बताना जरूरी है कि दयाल प्यारी उपचुनाव में भाजपा के प्रमुख पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की पहली पसंद थी। मगर सरकार गिरी पार और जनजातीय क्षेत्र दर्जे की मांग के मुद्दे पर विराम लगाने के लिए रीना कश्यप पर मोहर लगाई थी। तो वही भाजपा से बगावत कर दयाल प्यारी आजाद उम्मीदवार के तौर पर मैदान में उतर गई। दयाल प्यारी का मैदान में उतरना भाजपा के लिए गले की फांस बन चुका था।

तो वही जी आर मुसाफिर के मैदान में उतरने पर कांग्रेस का वोट दो जगह बट गया। भाजपा के द्वारा बड़े-बड़े दिग्गज रीना कश्यप की स्पोर्ट में भेजे गए। बावजूद इसके भले ही मात्र 22, 048 वोट लेकर रीना कश्यप जीत गई हो। मगर दयाल प्यारी ने आजाद उम्मीदवार होते हुए भी 11698 वोट लेकर अपनी लोकप्रियता साबित कर दी थी। जबकि कांग्रेस पार्टी के दमदार और प्रमुख चेहरे होने के बावजूद मुसाफिर केवल 19306 वोट ही ले पाए थे।

जबकि बगावत भाजपा में हुई थी ना कि कांग्रेस में। चलिए अब बात की जाए दयाल प्यारी के दमखम की तो पंचायती राज चुनाव के दौरान यह भी साबित हुआ था। जिला परिषद में जहां कुल 17 वार्ड हैं जिनमें 8 पर कांग्रेस और 8 पर ही भाजपा ने जीत हासिल की थी। ऐसे में बतौर आजाद उम्मीदवार पच्छाद की नीलम शर्मा ने जीत हासिल की थी। भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष और ऊर्जा मंत्री सुखराम चौधरी सहित रीना कश्यप ने भी नीलम शर्मा को भाजपा में शामिल करने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाया।

मगर नीलम शर्मा को कांग्रेसी खेमे में खींचने के लिए दयाल प्यारी ने कामयाबी हासिल की। बावजूद इसके जब भाजपा को सरकार के रहते जिला परिषद पर काबिज होने के लाले पड़ने लगे थे। कांग्रेस के बड़े-बड़े चेहरे जिला में होने के बावजूद कांग्रेस की भवानी वार्ड की विजय उम्मीदवार भाजपा के खेमे में चली गई। जिला परिषद में कांग्रेस को मुंह की खानी पड़ी। मगर यहां भी दयाल प्यारी मजबूत साबित हुई। अब यदि जिस प्रकार जीआर मुसाफिर एक बार फिर से मैदान में उतरने की लालसा पाले बैठे हैं।

ऐसे में भाजपा को अपना मैदान फिर से जीतता नजर आ रहा है। हालांकि, पच्छाद विधानसभा क्षेत्र में भाजपा काफी ज्यादा बैकफुट पर चली हुई है। ऐसे में यदि कांग्रेस हाईकमान दयाल प्यारी पर अपनी मुहर लगाते हैं तो निश्चित ही यह सीट कांग्रेस की झोली में जाएगी। वही जीआर मुसाफिर जिला का प्रमुख कांग्रेसी चेहरा है। ऐसे में उन्हें ना केवल पच्छाद बल्कि जिला की पांचों सीटों पर जीत हासिल करवाने के लिए छक्का पंजा लड़ाना चाहिए। यदि कूटनीति की बात करें तो मुसाफिर खुद दयाल प्यारी को लेकर बतौर चेहरा विधानसभा क्षेत्र में अभी से डर जाते हैं।

तो दयाल प्यारी की जीत का सेहरा जीआर मुसाफिर के सर ही बंधेगा। यही नहीं प्रदेश स्तर पर भी जीआर मुसाफिर कांग्रेस के चाणक्य साबित होंगे। ऐसे में सरकार कांग्रेस की बनने पर जीआर मुसाफिर सरकार में प्रभावशाली चेहरा भी हो सकते हैं। मगर यह भी तय है कि यदि दयाल प्यारी की खिलाफत वह करते हैं तो सीट निश्चित रूप से भाजपा की झोली में जाएगी।

इसकी बड़ी वजह भाजपा में फूट मानी जाती है। इस विधानसभा क्षेत्र में कॉन्ग्रेस कैंडीडेट्स यदि दयाल प्यारी रहती है तो भाजपा के बगावती चेहरों का उन्हें बहुत बड़ा सपोट होगा। बरहाल, यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा कि कांग्रेस प्रदेश में सरकार बनाना चाहती है या फिर भाजपा पहली बार प्रदेश की रवायत को तोड़ते हुए मिशन रिपीट करेगी।

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