दलित शोषण मुक्ति मंच ने मनाई पहली महिला शिक्षिका की जयंती

HNN/ शिमला 

दलित शोषण मुक्ति मंच कसुम्पटी ने देश की पहली महिला शिक्षिका सावित्री बाई फुले की जयंती पर बैठक का आयोजन किया। बैठक में 21 सदस्यीय कोऑर्डिनेशन कमेटी का गठन किया गया जिसमें चमन कश्यप को संयोजक, हरिचंद को सह संयोजक और होशियार सिंह को कार्यालय सचिव की ज़िम्मेदारी सौंपी गई। इसके अलावा कमेटी में डॉ. रीना सिंह, विवेक कश्यप, अनोखी राम, मस्तराम, मनोहर सिंह, ज्ञान कश्यप, वीरेन्द्र, कृष्ण चन्द भाटिया, अनीता, सुनील कश्यप, मेदराम शांडिल, केशव दत्त, चिरंजी लाल, दुर्गा सिंह, निकाराम, सावित्री व आशा को शामिल किया गया।

बैठक में तय किया गया कि आगामी 5 मार्च से पहले पंचायत स्तर तक कमेटियों का गठन किया जाएगा। 5 मार्च को अधिवेशन आयोजित करके कसुम्पटी कमेटी का गठन किया जाएगा। प्रतिभागी वीरेन्द्र ने कहा कि चुनावी ड्यूटी के समय भी दलितों से भेदभाव होता है। चुनावी ड्यूटी पर गांव में पहुंचने पर पहले टीम के सदस्यों की जाति पूछी जाती है और उसी हिसाब से ठहरने की व्यवस्था की जाती है।

इस मौके पर चर्चा करते हुए डॉ. रीना सिंह ने कहा कि सावित्री बाई फुले का जीवन न केवल महिलाओं के लिए प्रेरणा है बल्कि दलित मुद्दों को लेकर उनका संघर्ष भी रेखांकित किया जाना चाहिए। डॉ. रीना सिंह ने कहा कि दलित शब्द एक व्यापक शब्द है जिसमें केवल अनुसूचित जाति के लोग ही शामिल नहीं हैं बल्कि समाज में जिस तबके का दलन हुआ है, वे सब भी शामिल हो जाते हैं।

उन्होंने कहा कि दलित शोषण मुक्ति मंच एक व्यापक मंच है जिसमें वे सभी लोग शामिल हो सकते हैं जो समाज में गैरबराबरी के खिलाफ संघर्ष करने की इच्छा रखते हैं।

लेटेस्ट न्यूज़ एवम अपडेट्स अपने व्हाटसऐप पर पाने के लिए हमारी व्हाटसऐप बुलेटिन सर्विस को सब्सक्राइब करें। सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें।

वीडियो