दुनिया की सबसे महंगी सब्जी नाहन के कंडाई वाला गांव में

25 से 30 हजार रुपए प्रति किलो का है भाव
दीपक पंवार के खेतों में प्राकृतिक रूप से उग गई गुच्छी
HNN News नाहन

दुनिया की सबसे महंगी सब्जी और जंगलों में पाए जाने वाली गुच्छी नाम की जड़ी बूटी प्राकृतिक रूप से नाहन शहर के साथ लगते गांव कंडाई वाला में नजर आई है।
दीपक पवार के जंगल के साथ लगते खेत में इस जड़ी बूटी के पाए जाने पर बड़ी हैरानी व्यक्त की जा रही है। क्योंकि यह गुच्छी ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में 25 सौ से 3000 मीटर की हाइट वाले जंगलों में मिलती है। इस क्षेत्र में गुच्छी के मिलने से शोधकर्ताओं को भी हैरानी में डाल दिया है।
हैरानी तो इस बात की है कि जिस क्षेत्र में मिली है वहां की जमीन की नमी 52 फ़ीसदी मौजूदा तापमान 15 डिग्री से 25 डिग्री सेल्सियस पर है। और हाइट लगभग 800 मीटर के आसपास है।
क्या है गुच्छी
इसका वैज्ञानिक नाम मार्कुला एस्क्यूपलेंटा ,(Mitchell’s esulenta) है । हिंदी में इसे स्पंज मशरूम भी कहते हैं। अमूमन यह 25 सौ मीटर से अधिक ऊंचाई वाले ठंडे देवदार या चीड़ के जंगलों में मिलती है। जंगलों में इसे दिखाई देने का समय अप्रैल से मई माह तक का होता है।
इसी में एक और गुच्छी होती है जो बादल में गजवा बिजली की कड़क के साथ जमीन से फटती है।
कहां कहां पाई जाती है
गुच्छी यानी चेयऊ सबसे ज्यादा कुल्लू किन्नौर रोहड़ू चंबा कश्मीर उत्तरांचल के ठंडे व ऊंचाई वाले जंगलों में होती है। भारत की सबसे उम्दा व कीमती गुच्छी कुल्लू और रोहड़ू की मानी जाती है।पछाद क्षेत्र के टिक्कर, मढी घाट, नारग, हरिपुरधार राजगढ़ आदि क्षेत्रों में भी पाई जाती है|
फायदे व गुण
इस जड़ी बूटी या कहो सब्जी में विटामिन सी के अलावा विटामिन बी और सी प्रचुर मात्रा में होता है। वैसे तो इसे महंगी होने के कारण नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं किया जा सकता मगर यदि किया जाए तो इससे दिल की तमाम बीमारियां ठीक रहती हैं। ब्लड प्रेशर चर्म रोग शारीरिक दुर्बलता यहां तक की कैंसर की प्रथम व दूसरी स्टेज में भी दवा का काम करती है। इस जड़ी बूटी को कामोत्तेजक भी माना जाता है।
यही कारण है कि इसकी सब्जी की और सूप की डिमांड बड़े बड़े पांच सितारा होटलों में रहती है।
और आपको यह भी बता दें कि 1980 के सिंहस्थ मेले में जूना अखाड़ा के महंत ने ₹45 लाख की गुच्छी का भंडारा 7 दिनों तक साधु समाज के लिए चलाया था।
जंगलों में बिना वन विभाग की परमिशन कैसे निकालना गैरकानूनी माना जाता है। बावजूद इसके गैरकानूनी ढंग से लोग इसका व्यवसाय करते हैं। ज्ञात सूत्रों के अनुसार जिला कुल्लू किन्नौर तथा रोहडू से प्रतिवर्ष 20 से 30 करोड़ से अधिक का व्यवसाय होता है।
नाहन के साथ लगते क्षेत्र कढ़ाई वाला में इसके मिलने के कारण भी HNN न्यूज़ ने ढूंढे हैं
D.f.o. राजगढ़ मृत्युंजय माधव तथा जिला सिरमौर हॉर्टिकल्चर के उपनिदेशक सतीश का कहना है कि गर्म क्षेत्र में गुच्छी का मिलना है रानी का विषय है। इनका कहना है कि इसकी मुख्य वजह जलवायु परिवर्तन माना जा रहा है। जो गुच्छी अप्रैल-मई माह में मिलती थी हाल ही में यह भी पता चला कि फरवरी में भी लोग जंगलों से गुच्छी ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि अब नवंबर माह में वह भी गर्म क्षेत्र में इस गुच्छी का मिलना एक शोध का विषय भी है और साथ ही हैरानी का भी।

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