दून वैली पांवटा साहिब में हुई थी दुनिया की सबसे पहली आरोग्य कॉन्फ्रेंस

52 ऋषि-मुनियों ने बीमारियों के उपचार को लेकर की थी यहां कॉन्फ्रेंस ,दिग्गज चिकित्सकों ने बताया संत आशाराम आश्रम को प्रेरणा स्त्रोत्र का केंद्र, लोगों ने जाना पहली बार चमत्कारिक कुटिया की परिक्रमा का भी राज

HNN News पांवटा साहिब

बताया जाता है कि सतयुग काल में कोई बीमारी नहीं होती थी मगर त्रेतायुग के साथ बीमारियों ने भी मनुष्य को जकड़ना शुरू कर दिया था। तब भारतवर्ष के 52 ऋषियों ने पांवटा साहिब दून वैली में इकट्ठे होकर दुनिया की पहली वार्ता की थी।

यह जानकारी संत आसाराम बापू के आश्रम में उनके अनुयायियों द्वारा संचालित अच्युताय हरिओम फार्मेसी के तत्वाधान में आयोजित राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस के उपलक्ष पर वरिष्ठ चिकित्सक प्रमोद पारीख ने दी।

उन्होंने बताया कि जब दुनिया ने खाना और पीने का ढंग भी नहीं सीखा था तब हमारे देश ने आयुर्वेद को उपचार में लाया था। मगर इससे भी पहले समंदर मंथन के दौरान अमृत के अलावा जो रतन निकले थे उनमें धनवंतरी जी का भी अवतरण हुआ था।

उन्हीं आरोग्य के भगवान धनवंतरी के “दिवस को इस आश्रम के प्रांगण में वैदिक परंपरा के अनुसार मनाया गया। कार्यक्रम में बतौर मुख्य अतिथि हिमाचल प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग के उपनिदेशक डॉक्टर सुंदर शर्मा ने मुख्य रूप से शिरकत करी।

यहां बताना यह भी जरूरी है कि मानव सेवा को बिना किसी स्वार्थ के समर्पित इस आश्रम के अनुयायियों के द्वारा अच्युताय हरिओम फार्मेसी के तत्वाधान में हर वर्ष भगवान धन्वंतरी “दिवस वैदिक परंपराओं के अनुसार मनाया जाता है।

इस बार भी प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग ने इस कार्यक्रम में मुख्य रूप से शिरकत करते हुए विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों के साथ राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस मनाया।

उपनिदेशक आयुर्वेदिक विभाग का कहना है कि दुनिया को उत्तम स्वास्थ्य व उपचार का सूत्र भी हमारे पौराणिक आयुर्वेद ने दिया है। सन 1700 ईसवी से पहले हमारे देश के लोग आयुर्वेद को अच्छी तरह से समझते नहीं थे। मगर जब विदेशियों ने आयुर्वेद की महत्वता को समझा तो यही आयुर्वेद विदेश से आयुर्वेदा बनकर भारत में वापस लौटा।

मगर जब से आयुर्वेद को भारत सरकार का संरक्षण मिला है और इसे आयुर्वेद दिवस के रूप में मनाया जाने लगा है। देश में रोग को जड़ से खत्म करने के लिए लोगों में आयुर्वेद के प्रति रुझान बड़ी तेजी से बढ़ा है।

इस मौके पर संत आसाराम आश्रम में होम्योपैथिक चिकित्सा में सेवाएं दे रही वरिष्ठ चिकित्सक डॉक्टर कनक ने होम्योपैथिक को आयुर्वेदा का ही हिस्सा बताया। उन्होंने बताया कि हम अपने वेदों को समझ नहीं पाए थे मगर जर्मनी के डॉक्टरों ने वेदों के महत्व को समझा था। और उन्हीं वेदो में आयुर्वेद से ज्ञान लेकर उन्होंने होम्योपैथिक चिकित्सा को जन्म दिया। उन्होंने कहा कि नाम वहां का है मगर गुण इसमें भी भारत का ही है।

ने कहा कि होम्योपैथिक भी भगवान धन्वंतरी की ही संतति है। इस मौके पर जिला सिरमौर मुख्य आयुर्वेद चिकित्सा अधिकारी डॉ कविता शर्मा ने जल को कितनी मात्रा में लेना चाहिए उसके बारे में विस्तार से बताया। तो वही आयुर्वेदिक अधिकारी डॉ प्रभाकर मिश्रा यादवेंद्र ठाकुर शरद त्रिवेदी गोपाल शर्मा मंजू शर्मा कुलदीप शर्मा शिखा शर्मा आदेश गोयल मधु गोयल आशुतोष रंजन आदि ने भी आयुर्वेद के महत्व पर महत्वपूर्ण जानकारियां दी।

अच्युताय हरिओम फार्मेसी के निदेशक अमर भाई ने आयुर्वेद में दवा के साथ साथ खाने का समय, खाने के बाद किस करवट लेटना है, पानी कितने घंटे बाद पीना है इस बारे में अनमोल जानकारियां दी।

देहरादून से आई आयुर्वेद चिकित्सक दीपिका उनियाल ने बताया कि यह हिमाचल प्रदेश का सौभाग्य है कि उनके प्रदेश में एक ऐसी फार्मेसी है जहां पर वैदिक परंपराओं का निर्वहन करते हुए उत्तम किस्म की औषधियों का प्रयोग करते हुए दवाएं तैयार की जाती है।

इस मौके पर विशेष रूप से उपस्थित स्थानीय ग्राम पंचायत प्रधान शिक्षा देवी ने आश्रम में स्थापित चमत्कारी कुटिया के रहस्य को भी बताया। उन्होंने बताया कि जिसने भी इस आश्रम में स्थापित कुटिया की पांच परिक्रमा सच्चे मन से की है उसकी हर मनोकामना पूर्ण हुई है। इसकी प्रमाणिकता को भी मौके पर ही सिद्ध किया गया।

इससे पहले सुबह ठीक 10:00 बजे संत आसाराम बापू आश्रम के प्रांगण में भगवान धन्वंतरी को समर्पित आरोग्य हवन का आयोजन भी किया गया। जिसमें सैकड़ों लोगों ने शिरकत करते हुए इस हवन में पूर्ण आहुति डाल भगवान धन्वंतरी से आरोग्य का आशीर्वाद लिया।

कार्यक्रम की शुरुआत में आशारामायण पाठ व पादुका पूजन भी किया गया। बड़ी बात तो यह रही कि इस राष्ट्रीय आयुर्वेदिक दिवस के उपलक्ष पर प्रदेश आयुर्वेदिक विभाग के वरिष्ठ चिकित्सकों व फार्मेसी चिकित्सकों ने उद्गीथ के माध्यम से भगवान धन्वंतरी वंदन वह आरती की। आरती के बाद समापन के समय देश प्रदेश व विश्व में शांति व निरोग काया के लिए प्रार्थना भी की गई।

कार्यक्रम के समापन के बाद विशेष रुप से तैयार किया गया गुजराती भोजन भी श्रद्धालुओं को परोसा गया। इस मौके पर आशुतोष रंजन राजा राममोहन मिश्रा राजकुमार शर्मा महिमानंद जी एस अरोड़ा अविनाश कपूर अमरजीत सिंह एल के नानागिया, प्रवेश कुमार गुप्ता केलावा आश्रम प्रबंधक सुंदर भाई सुरेंद्र भाई अरुण शर्मा के साथ-साथ समिति सदस्य जगदीश चौधरी अनिल दीक्षित अजय बंसल नरेश अग्रवाल एडवोकेट सतपाल डारिया, शशि पाल चौधरी इंडस्ट्री सेक्टरी सुभाष चौधरी आदि मुख्य रूप से उपस्थित रहे।

बरहाल इस कार्यक्रम में यह तो साबित हो गया कि भले ही आसाराम संत एक कानूनी प्रक्रिया से गुजर रहे हैं। मगर जिस मानव सेवा के साथ-साथ सद्भावना व सेवा का पाठ उन्हें उनके गुरु ने सिखाया था आज वह उनकी अनुपस्थिति में भी सा शब्द अनुसरण कर रहे हैं।

उत्तम गुणवत्ता से भरपूर इनके द्वारा संचालित अच्युताय हरिओम फार्मेसी में हिमाचल के लोगों को रोजगार तो मिला ही है साथ ही उन्हें योग और सामाजिक गतिविधियों से कैसे सरोकार रखा जाए इस बारे में भी सीखने को मिलता है।

वरिष्ठ चिकित्सक जीएस अरोड़ा ने बड़ा अच्छा सुझाव यह भी दिया कि प्रदेश सरकार को आयुर्वेदिक विभाग के माध्यम से निरोग काया के लिए इस आश्रम में कैंप का आयोजन करवाना चाहिए।

उन्होंने बताया कि यह एक ऐसा धाम है जहां जैविक घड़ी का भेद भी छुपा है। यह एक ऐसा रहस्यमय ज्ञान है जिसमें जैविक दिनचर्या कैसे रखी जाए उसके बारे में ज्ञान दिया गया है।