देवभूमि हिमाचल के नाहन शहर में मुस्लिम समुदाय ने सांप्रदायिक सौहार्द की फिर एक मिसाल पेश की

HNN News / नाहन

आज सुबह करीब 11:00 बजे मुस्लिम समुदाय के 50 – 60 भारी तादाद में लोग इकट्ठे होकर भगवान जगन्नाथ मंदिर बड़ा चौक जाकर वामन द्वादशी का पर्व मनाया और जहां उपस्थित सभी हिंदू समुदाय के लोगों को पर्व की शुभकामनाएं दी और मंदिर में फल और मिठाई भेंट की।

वहां उपस्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर कमेटी के पदाधिकारियों ने तहसीलदार नहान नारायण सिंह चौहान की अध्यक्षता में सभी मुस्लिम समुदाय के लोगों का फूल मालाओं से स्वागत किया और मिठाई बाटी। इस मौके पर तहसीलदार ने अपने संबोधन में मुस्लिम समुदाय के लोगों का आभार प्रकट किया और उनकी सद्भावना की तारीफ की तत्पश्चात मुस्लिम समुदाय के लोगों ने मोहर्रम की तैयारी की नसीम निदान ने बताया कि हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद दिलाता है।

मोहर्रम मोहर्रम का दिन भी सांप्रदायिक सद्भावना की शुद्धता वापसी मित्रता का पैगाम लेकर आता है। जो मानवता की सेवा करते करते हजरत इमाम हुसैन एक अत्याचारी अन्याई व योग्य इंसाफी शासक अजित के खिलाफ इंसाफ की लड़ाई लड़ते-लड़ते कर्बला के युद्ध में 72 साथियों सहित जिसमें 4 वर्षीय शबीना तथा 6 महीने का हजरत अली असगर भी शामिल था।

मोहर्रम इस्लामिक कैलेंडर के पहले महीने का नाम है। इस माह की 1 तारीख से इस्लामिक वर्ष प्रारंभ होता है इस महीने की 10 तारीख को इराक के कर्बला नामक स्थान पर हजरत इमाम हुसैन मानवता की रक्षा करने के लिए लड़ते लड़ते शहीद हो गए थे। ऐतिहासिक शहर नहान हिंदुस्तान को सांप्रदायिक सद्भावना का अनोखा पैगाम देता है क्योंकि शिया मुस्लिम समुदाय ताजिए निकालता है।

लेकिन नाहन शहर में एक भी शिया मुस्लिम समुदाय का व्यक्ति ना होते हुए उनकी रीवा सदका सुन्नी मुस्लिम समुदाय रियासत काल से आज तक ताजी निकालकर इस परंपरा को निभा रहा है। जबकि मोहर्रम के दिन देशभर में अनेक स्थानों पर ताजियों को लेकर शिया मुस्लिम व सुन्नी के बीच में खून खराबे होने की खबरें मिलती रहती हैं।

दीदार ने बताया कि मोहर्रम एक गम व मातम का महीना है नाहन शहर में 9 तारीख की रात को 4:00 ताजिए निकाले गए और 10 तारीख के दिन गुन्नू घाट नाहन से पहला ताजिया निकला सफर करते हुए। हरिपुर पहुंचा वहां से दूसरा ताजिया सम्मिलित हुआ। इसी प्रकार रानीताल मोहल्ला का तीसरा ताजिया जुलूस में सम्मिलित हुआ जुलूस बढ़ता गया।

जिसमें इमाम हुसैन की याद में शोध सलाम मरसिए हदीसे तथा उन पर युद्ध के दौरान अजीज की फौजों ने क्या-क्या जुल्म किए थे। आधी आधी पढ़कर तोहरा गया जुलूस बढ़ता हुआ कच्चा टैंक पहुंचा जहां चौथा ताजिया जुलूस में सम्मिलित हुआ और इस दौरान अनेक खेल आदि करतब दिखाए।

इस समय पर प्रशासन की ओर से तहसीलदार जगन्नाथ मंदिर कमेटी के सदस्य प्रकाश बंसल इत्यादि अनेक हिंदू समुदाय के लोग ताजियों के जुलूस में शामिल होकर अपनी हाजिरी दर्ज की सूर्य अस्त होने के तुरंत बाद ताजियों का जुलूस समाप्त कर दिया गया। और ताजियों पर कपड़ा डालकर अपने अपने स्थान को वापस हो गए।