देश के लिए शहादत पाने वाले पैरामिलिट्री फोर्सेज के जवानों को भी मिलेगा अब शहीद का दर्जा

कमरूउ दुगाणा के उप सेना नायक विजय सिंह, रोहड़ू के सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह, मंडी के कॉन्स्टेबल बृजलाल को अब मिल गया शहीद का दर्जा

-स्कूली बच्चों को प्रेरित करने के लिए लगाई जा रही शहीदों की स्मारिका, वीर गाथाओं को जानेंगे बच्चे

HNN News/नाहन

देश की रक्षा के लिए मर मिटीने वाले पैरा मिल्ट्री फोर्स के जवानों को अब शहीद का दर्जा मिलेगा। केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय से प्राप्त पत्र के अनुसार हिमाचल प्रदेश के सहस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के तीन जवानों को शहीद का दर्जा मिला है।

इन शहीदों ने देश की सुरक्षा की रक्षा करते हुए मातृ भूमि के लिए अपने प्राण न्यौछावर किए थे। गृह मंत्रालय ने इस बारे में प्रदेश गृह सचिव को पत्र भेजा है। अब प्रदेश के जिन स्कूलों में इन शहीदों ने सेकेंडरी स्तर की शिक्षा प्राप्त की थी। उस स्कूलों में शहीदों की स्मारिका लगाई जा रही है।

इन जवानों को मिला शहीद का दर्जा

देश की रक्षा के लिए प्राण न्यौछावर करने वाले पैरामिल्ट्री फोर्स के जवानों को शहीद का दर्जा देने के लिए प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में ग्वालियर के टिकमपुर में पैरामिल्ट्री फोर्सों के डीजीपी व आई स्तर की बैठक आयोजित हुई थी।

इस बैठक में सहस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 48 जवानों को शहीद का दर्जा दिया गया था। इनमें हिमाचल प्रदेश के तीन जवान शामिल हैं।

उप सेना नायक शहीद विजय सिंह पुत्र गंगा राम गांव दुगाना कमरऊ तहसील पांवटा साहिब के रहने वाले थे। उन्होंने 1967 में शमशेर सीनियर सेकंडरी स्कूल नाहन से दसवीं व 1971 में डिग्री कालेज नाहन से स्नातक की थी। वह एसएसबी में 1972 में बतौर उप निरीक्षक जरनल ड्यूटी के पद पर भर्ती हुए थे। 6 वर्ष तक शहीद विजय सिंह ने एनएसजी में भी सेवाएं दी।

असम के सलोनीबाडी में आतंकवादी संगठन उल्फा के साथ मुठभेड में विजय सिंह 5 दिसंबर 1996 में वीरगति को प्राप्त हुए। इस दौरान वह असम स्थित प्रशिक्षण केंद्र सलोनीबाडी में बतौर डिप्टी कमांडेंट तैनात थे। शमशेर सीनियर सेकेंडरी स्कूल में शहीद विजय सिंह की स्मारिका लगाई गई है।

15वीं वाहिनी रोहडू निवासी सब इंस्पेक्टर प्रताप सिंह बोगाई गांव असम में तैनात थे। इस तैनाती के दौरान उनका सामना उग्रवादियों से हुआ। 26 जुलाई 2010 को बोगाई गांव में उग्रवादियों से लड़ते हुए वह शहीद हुए। शहीद प्रताप सिंह की शिक्षा चिडग़ांव से हुई थी। इसी स्कूल में शहीद प्रताप सिंह की स्मारिका लगाई जा रही है।

एसएसबी 5वीं बटालियन में बतौर कांस्टेबल शहीद बृजलाल की शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोपालपुर मंडी से हुई थी। उनका जन्म 21 मई 1964 को हुआ। शहीद बृजलाल जम्मू कश्मीर में देश की रक्षा करते हुए 23 फरवरी 2002 में शहीद हुए। सीनियर सेकेंडरी स्कूल गोपालपुर में उनकी स्मारिका लगाई जा रही है।

बच्चे जानेंगे शहीदों की बीर गाथाएं

स्कूलों में शहीदों की स्मारिका लगाने का उद्देश्य बच्चों में देश मातृ भूमि के लिए प्यार व शहीदों की वीर गाथाओं से अवगत करवाना है। हिमाचल प्रदेश को वीर भूमि के नाम से जाना जाता है। कई जवानों ने देश की रक्षा करते हुए अपने प्राणों की आहूति दी। युवा वर्ग को देश रक्षा के लिए प्राणों की आहूति देने वाले शहीदों की वीर गाथाओं से प्रेरित कर देश भक्ति के प्रति प्रेरित करने के अलावा सेना के लिए प्रोत्सहन भी मिल सके। स्कूलों में देश रक्षा के लिए प्राण देने वाले देशभक्तों की कथाओं से बच्चों को देश सेवा में जाने की पे्ररणा मिलेगी।

सीनियर फिल्ड असिस्टेंट मेडिकल एसएसबी भाग सिंह ने बताया कि गृह मंत्रालय भारत सरकार की ओर से प्रदेश सचिव को एसएसबी में तैनाती के दौरान शहीद हुए जवानों की स्मारिका लगाने के लिए पत्र भेजा गया है। प्रदेश गृह सचिव की ओर से सभी जिलों के उपनिदेशक शिक्षा विभाग को इन शहीदों के स्कूलों में स्मारिका लगाने के निर्देश दिए गए हैं।

उन्होंने बताया कि शहीद विजय सिंह की स्मारिका शमशेर सीसे स्कूल नाहन, शहीद प्रताप सिंह की समारिका सीसे स्कूल चिडग़ांव रोहडू व शहीद बृजलाल की स्मारिका सीसे स्कूल गोपालपुर मंडी में लगाई जा रही है।

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