नाम मेडिकल कॉलेज सुविधाएं रिजनल से भी बद्तर और कर्मचारी काम के बोझ तले

HNN News/नाहन

नाहन रिजनल अस्पताल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड तो कर दिया गया है। मगर हालात बद से बदतर हो गए हैं। जहां एक तरफ मेडिकल कॉलेज को बने तीन साल हो गए हैं। वहीं यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं नाम मात्र की हो गई हैं।

रिजनल अस्पताल में जहां सिटी स्कैन, अल्ट्रा साउंड, एडस, आरएनटीसी व आईडीएसपी कार्यक्रम के अलावा अन्य कार्यक्रम बखूबी समय रहते हुए किए जाते थे। मगर मेडिकल कॉलेज बनने से इस कार्यों में फर्क पड़ गया है। जिसका खामियाजा मरीजों व उनके तिमारदारों को उठाना पड़ता है।

यही हाल रिजनल अस्पताल के समय में तैनात स्वास्थ्य कर्मियों का है। उनके उपर भी काम का अधिक बोझ पड़ गया है। जिस कारण स्वास्थ्य कर्मियों को तो इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा है। वहीं मरीजों को भी इससे नुकसान हो रहा है।

रिजनल अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि नाहन रिनजल अस्पतल को मेडिकल कॉलेज में अपग्रेड किए हुए तीन साल हो गए हैं। मगर आज भी कागजों में यह मेडिकल कॉलेज रिजनल अस्पताल के नाम से कार्य कर रहा है।

हालांकि मेडिकल कॉलेज नाहन में जो भी कार्य चल रहे है उसके लिए रिजनल अस्पताल व डॉ वाईएस परमार मेडिकल कॉलेज के नाम से पत्र आते हैं। जिसमें मेडिकल कॉलेज व रिजनल अस्पताल प्रशासन सकते में पड़ जाते है। कार्य करें तो कैसे करें।

तीन वर्ष पूर्व रिजनल अस्पताल के लिए करोड़ों रूपए से नई ओपीडी बनाई गई थी। ओपीडी की बिल्डिंग पूरी बनने के बाद नाहन को मेडिकल कॉलेज की सौगात मिल गई। जिसके बाद रिजनल
अस्पताल की नई ओपीडी को तोड़ फोड़ कर उसमें दोबारा से लाखों रूपए खर्च किए गए। हालांकि यह बिल्डिंग जिला अस्पताल की ओपीडी के लिए बनाई गई थी।

रिजनल अस्पताल के डॉ व स्वास्थ्य कर्मियों ने कहा कि अस्पताल की बिल्डिंग में मेडिकल कॉलेज की ओपीडी, लैब व स्टूडेंट के लिए प्रेक्टिकल लैब बना दी। जिसमें लाखों रूपए व्यर्थ में खर्च कर दिए गए। मगर मेडिकल कॉलेज से अस्पताल गायब कर दिया गया।

रिजनल अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि टांडा मेडिकल कॉलेज व आईजीएमसी शिमला की तर्ज पर नाहन मेडिकल कॉलेज में भी अलग से अस्पताल बनाया गया। जहां कांगड़ा में जिला अस्पताल है और शिमला में रिपन अस्पताल व कमला नेहरू अस्पताल कार्य कर रहा है। वहीं जानकारों का कहना है कि हमीरपुर में भी अलग से जिला अस्पताल बनाने की प्रपोजल चल रही है। अधिकारियों ने कहा कि अगर इन जगहों पर अलग से जिला अस्पताल बन सकता है तो नाहन में अलग से जिला अस्पताल क्यों नहीं बनाया जा सकता।

बता दे मेडिकल कॉलेज बनने के बाद यहां पर न तो कोई काउंसर है और न ही कोई इन्क्वारी काउंटर। जिससे यह पता लग सके कि कौन से डॉ कहां बैठते और मेडिकल कालेज का प्रशासनिक स्टाफ कहां बैठता है। अब देखना यह है कि मेडिकल कालेज व रिजनल अस्पताल प्रशासन क्या कार्रवाई करता है।

डॉ वाईएस परमार मेडिकल कालेज के मेडिकल सुपरीडेंट डॉ डीडी शर्मा ने बताया कि अभी उन्हें ज्वाइन किए एक माह के करीब हुआ है। उन्होंने कहा कि उनको जो पत्र मिलता है वह मेडिकल कॉलेज व रिजनल अस्पताल के नाम से प्राप्त होता है। उन्होंने कहा बाकी इसके बारे में कॉलेज प्रशासन बखूबी बता सकता है।

उधर सीएमओ केके पराशर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज में कुछ कार्य रिजनल अस्पताल के नाम से चल रहा है। सूत्रों की माने तो अभी कागजों में मेडिकल कॉलेज रिजनल अस्पताल के नाम पर चल रहा है। जबकि कॉलेज के पास अपनी कोई बिल्डिंग नहीं है।

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