पच्छाद सीट पर दयाल प्यारी के पीछे चाणक्य की काट कौन

अड़ियल है पच्छाद का ठाकुर अब तो केवल जयराम ठाकुर ही है ब्रह्मास्त्र

HNN News पच्छाद

पच्छाद उपचुनाव में भले ही तिकोना मुकाबला चल रहा हो मगर यहां तो जंग ही भाजपा की कथित भाजपा से हो रही है। क्षेत्र में दिग्गज रही भाजपा नेत्री दयाल प्यारी जिस रणनीति के तहत चुनाव प्रचार कर रही है उससे तो साफ है के पीछे कोई तो पार्टी का ही चाणक्य है।

इतनी सुलझी हुई चालें और फिर रीना कश्यप खुद कोली बिरादरी से नहीं है इसको लेकर यह बिरादरी को दयाल प्यारी अच्छी तरह कैश कर रही है। जिस तरह से दयाल प्यारी का प्रचार प्रोग्राम तैयार किया जा रहा है उसके बाद वोटरों का रुझान सिंपैथी सहित और कई मायनों में लोग टेलीफोन चुनाव चिन्ह का रिसीवर उठाने को बेताब हो रहे हैं।

गिरी पार का ठाकुर तबका और गिरी आर का भी भाजपा प्रत्याशी को अपनी पहली पसंद नहीं मान रहा है। हालांकि प्रत्याशी के स्वभाव को लेकर कोई उंगली नहीं उठाई जा सकती मगर जो बातें सामने आ रही है उससे प्रत्याशी के परिवार के दो सदस्यों को लेकर लोगों की कुछ नाराजगीयां है।

बात तो यह भी सही है कि यह चुनाव रीना कश्यप का नहीं सरकार का है। मगर जो हालात और दयाल प्यारी के साथ घटे तमाम प्रकरणों के बाद हवा का रुख बदला हुआ है। इस सीट पर भाजपा प्रत्याशी के नाम पर सराहां क्षेत्र से जो सहमति बनी थी उसको लेकर यह बात भी सामने आ रही है की गिरी पार का विशेष तबका उस धड़े से काफी नाराज चल रहा है। यह बड़ा धड़ा ना सरकार से और ना ही पार्टी से कोई नाराजगी रखता है बल्कि निजी नराजगियों के चलते अड़ियल रवैये पर उतर आया है।

इस बड़े सवर्ण वर्ग का यह भी कहना है कि हमने भाजपा के विधायक को भारी मतों से जिताया था भाजपा के सांसद प्रत्याशी को भी भारी मतों से जिताया है। उसके बावजूद हमारे क्षेत्र को और हमें मिला क्या है? इस पूरे प्रोपेगेंडा के पीछे एक बड़ा दिमाग काम कर रहा है।

लोगों का ध्यान केवल रीना कश्यप और दयाल प्यारी पर है। इस पूरे घटनाक्रम का पटाक्षेप प्रदेश के सबसे तेज तरार भाजपा नेता कर सकते थे मगर विधानसभा अध्यक्ष होने के नाते वह मर्यादाओं में बंध गए हैं।

अब केवल भाजपा के लिए इस सवर्ण वर्ग को मनाने में केवल एक ही तोड़ सामने नजर आता है वह जयराम ठाकुर के नाम पर वोट ! भाजपा के चुनाव प्रचार में जो मुख्य बड़ी खामी है संभवत हाईकमान उस से वाकिफ भी है। बावजूद इसके संगठन में काली भेड़ें अपने ही खेत के घास को बड़े चाव से खा रही है।

उधर कांग्रेसी प्रत्याशी जीआर मुसाफिर की जीत को सुनिश्चित बनाने के लिए कांग्रेस के दिग्गज भी क्षेत्र में डटे हुए हैं। पूर्व सांसद धनीराम शांडिल पूर्व आबकारी एवं कराधान मंत्री प्रकाश चौधरी इंद्रपाल लखन दत्त अजय सोलंकी रामलाल ठाकुर विक्रमादित्य पूर्व सीपीएस विनय कुमार मौजूदा विधायक हर्षवर्धन चौहान आदि मैदान में अपने प्रत्याशी के लिए उतर चुके हैं।

वहीं भाजपा प्रत्याशी के लिए सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री महेंद्र सिंह ठाकुर प्रभारी बनकर उतरे हैं। जबकि सुरेश भारद्वाज को सराहां जिला परिषद वार्ड, राजीव सैजल को नारग, नरेंद्र ब्रागटा को राजगढ़ यानि गिरी पार की कमान सौंपी गई है जबकि सांसद सुरेश कश्यप विपणन बोर्ड के अध्यक्ष बलदेव भंडारी जिला भाजपा अध्यक्ष विनय गुप्ता भी अपनी- अपनी रणनीतियों के तहत भाजपा प्रत्याशी की जीत को सुनिश्चित बनाने में जुटे हुए हैं।

बरहाल एक और जहां भाजपा की ही दमदार नेता रही दयाल प्यारी को बिरादरी व सिंपैथी वोट मिल सकता है। वही समय रहते सत्तासीन भाजपा के हाईकमान रणनीति बदल लेते हैं तो अच्छी बढ़त के साथ बाजी पलट सकती है। नहीं तो दो की लड़ाई में तीसरे को फायदा पहुंचना तो पक्का ही है।

यहां यह भी बताना जरूरी है कि राजगढ़ क्षेत्र से भाजपा टिकट से दावेदारी करने वाले आशीष की वापसी के बाद उसके समर्थक एक्सप्लोइट हो चुके हैं। जिन पर काफी दबाव भी बनाया जा रहा है। मगर इस क्षेत्र की परंपरा आज से नहीं बल्कि रियासत काल से अड़ियल रवैया की रही है। देखना यह होगा कि अब स्वयं जयराम ठाकुर कमान कब और कैसे संभालते हैं।