सोलन /पहले नगर परिषद अब जोगिंदर बैंक कांग्रेस मिशन क्या होगा सक्सेस

भले ही बिगड़ रहे हो भाजपा के समीकरण, मगर पिक्चर अभी बाकी है

HNN News सोलन

सोलन भाजपा में मौजूदा समय कुछ भी ठीक नहीं चल रहा है। संभवत 15 जून के बाद सहकारिता विभाग को टारगेट कर इस बार फिर से भाजपा पर वज्र प्रहार हो सकता है। अब यदि सोलन जोगेंद्र सेंट्रल सहकारी बैंक में चल रहे प्रकरण को देखा जाए तो इसका राजनीतिक विश्लेषण एक बड़े समीकरणों के फेरबदल के संकेत दे रहा है। इस प्रकरण को लेकर कांग्रेस व कथित भाजपा की सांठगांठ के पीछे जो चेहरा निकल कर सामने आ रहा है वह पहले भी बीजेपी को नुकसान पहुंचा चुका है।

जाहिर सी बात है 2017 नगर परिषद प्रकरण का फार्मूला फिर से रिपीट होने जा रहा है। इस रिपीट फार्मूला में इस बार का टारगेट द जोगिंदर सेंट्रल सहकारी बैंक है। जो कांग्रेसी और इस भाजपा के बड़े चेहरे ने मिलकर यानी सांठगांठ कर जो खेल खेला है सभा का 15 जून तक सहकारी विभाग निदेशक मंडल को भंग कर नए निदेशक को कुर्सी दिलाने की तैयारी की जा सकती है।

अगर हम माने यह कि इस हारे हुए भाजपाई चेहरे को पोल खुलने के बाद कहीं पार्टी से निष्कासित ना कर दिया जाए संभवत इस बार फिर यही चेहरा करीब ढाई साल बाद चुनाव में उतरेगा। मगर इस बार भाजपा से नहीं बल्कि हाथ के चुनाव चिन्ह पर मैदान में उतर सकता है।

क्योंकि मौजूदा प्रकरण जो सामने आ रहा है इससे तो यह साफ हो रहा है कि कांग्रेस कहीं ना कहीं अपनी रणनीति में कामयाब होती भी नजर आ रही है। जाहिर है अपनी हार से बिलबिलाए हुए नेता जी के पाले में कुछ ना कुछ तो पक रहा है। मगर इस बार इतना तो तय है कि कम से कम खिचड़ी तो बिल्कुल नहीं पकी है। इसकी भी एक बड़ी वजह है क्योंकि सोलन सिरमौर के भाजपाई कद्दावर नेता को पहले ही गुटबाजी ने येन केन प्रकारेण हाशिए पर लाने की कवायद शुरू कर रखी हैं।

यही वजह है कि जो प्रकरण दूसरी बार सोलन में हो रहा है संभवत इस जिला में भाजपा इस नेता के चलते बेलगाम होती नजर आ रही है।
एक बात और जो हाल ही में सामने आई थी सोलन मे युवा मोर्चा के एक सदस्य के निशकाषण को लेकर मंडल और 2017 के प्रत्याशी आमने सामने आ गए और उन्होने मंडल के निर्णय को गलत बता दिया अभी यह मामला शांत भी नही हुआ था की सोलन द जोगिंद्र बैंक को- आपरेटीव बैंक के चेयरमैन के साथ कथित सांठगांठ सोलन मेंं भाजपा के समीकरण आने वाले समय में बिगड़ते नजर आ रही है।

संभवत इन कथित नेता का गुट और नेता जी खुद भी शायद यह समझ रहे हैं कि संभवत डॉ राजीव बिंदल का अब वर्चस्व सोलन से भी सिमट रहा है। संभवत यह गुट मुख्यमंत्री का इशारा भी नहीं समझ पा रहे हैं।

मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर फिलहाल बिल्कुल इनकार किया है। हालांकि कोरोना काल का हवाला दिया जा रहा है। मगर यदि राजनीतिक नजरिए से देखा जाए तो इसके पीछे बड़ी वजह यह भी हो सकती है स्वास्थ्य विभाग घोटाले में जांच रिपोर्ट निष्पक्ष रुप से कंप्लीट हो जाए। अब अगर इस जांच में सरकार पर आई आंच को यदि क्लीनचिट मिलती है। तो यह तय है कि एक बड़ा विभाग नई जिम्मेदारी के साथ डॉ राजीव बिंदल को सौंपा जा सकता है।

क्योंकि सवाल मिशन रिपीट का है और मौजूदा हालातों में कहीं ना कहीं कांग्रेस प्रदेश में भाजपा पर इस प्रकरण के बाद हावी होती नजर आ रही है। चाहे कुछ भी माने बिंदल ने संगठन के प्रति पूरी निष्ठा के साथ तमाम गुटबाजी ऊपर विराम लगाने की कोशिश के चलते और मौजूदा जयराम सरकार के कार्यों को जिस प्रकार से प्रचार व प्रसार किया है उससे कांग्रेश हल्के में खलबली तो मच रही थी।

यहां एक बात और भी स्पष्ट कर देना जरूरी है कि जिस पृथ्वी सिंह का नाम इस प्रकरण में डॉक्टर बिंदल के साथ जोड़ा जा रहा है वह व्यक्ति ना केवल अपैक्स में बल्कि बहुत सारी कंपनियों के लिए लाइजनिंग का काम करता है। और यह बात हर व्यक्ति जानता है कि लाइजनिंग का पर्यायवाची शब्द दलाली होता है। जिसमें यह दलाल नेताओं के साथ अच्छे संबंध बनाकर उन संबंधों की आड़ में अधिकारियों पर प्रभाव बनाकर अपने मकसद हल करते हैं।