पीरन में सांकेतिक रूप में निभाई गई भैयादूज मेले की रस्म

HNN/ शिमला

मशोबरा ब्लॉक के पीरन मेें भैयादूज पर अतीत से मनाए जाने वाला पारंपरिक मेला इस वर्ष सांकेतिक रूप में मनाया गया। जबकि हर वर्ष मेला आरंभ होने से पहले देवसमाज से जुड़ी विभिन्न परंपराओं का निर्वहन किया जाता है जिसमें देवता की जातर निकाली जाती है जोकि गांव में काली का ठौड़ मंदिर पर समाप्त होती है। इस मौके पर स्थानीय पीठासीन जुन्गा देवता के गुर से आर्शिवाद स्वरूप चावल लिया जाता है तत्पश्चात स्वांग निकालकर मेले का आरंभ होता है जिसमें क्षेत्र के सैंकड़ों लोग भाग लेते हैं।

बता दें कि तत्कालीन क्योंथल रियासत के राजा वीर विक्रम सेन की बीते दिनों हुई मृत्यु के चलते इस वर्ष समूचे क्योंथल क्षेत्र में एक वर्ष का शोक रखा गया है सभी त्यौहार व देवकार्य वर्जित हैं। मलाणा की भांति क्योंथल में राजा को आज भी चौथा इष्ट माना जाता है। अर्थात समूचे क्योंथल क्षेत्र में देव जुन्गा के 22 टीकों की अराधना की जाती है जिनका प्रादुर्भाव राजा जुन्गा के वंशज से माना जाता है। इसी वजह से क्योंथल क्षेत्र में राजा को देवता स्वरूप माना जाता है। हालांकि लोगों ने देव जुन्गा के देवठी स्थित मंदिर में जाकर सांकेतिक रूप में आर्शिवाद अवश्य प्राप्त किया।

पीरन गांव के वरिष्ठ नागरिक दौतलराम वर्मा, दयाराम वर्मा, जबर सिंह ठाकुर, परमानंद, हंसराज वर्मा,, लायक राम वर्मा, सोहन सिंह वर्मा, चुन्नी लाल ठाकुर, जय नंद शर्मा, भगत राम भाटिया, सुरेन्द्र सोडी सहित अनेक लोगों ने बताया कि क्योंथल क्षेत्र में दिवाली की रात को मक्की के टांडों का अलाव अर्थात दवालठा  जलाकर दीपावली का त्यौहार पारंपरिक ढंग से मनाया जाने की प्रथा अतीत से निभाई जा रही है। बताया कि क्षेत्र में दीवाली को पंचपर्व के रूप में मनाते हैं जिसमें दिवाली से दो दिन पूर्व धनतेरस को मूड़ी का त्यौहार मनाया जाता है।

इस दिन लोग गेंहूं, काले चने और राजमाह की मूड़ी बनाते हैं जिसे अखरोट के साथ खाया जाता है । इसी प्रकार छोटी दिवाली की रात्रि को लोग अपने घरों में अस्कलियां बनाते हैं जिसे घी, शक्कर, शहद व राब के साथ खाते हैं। इसी प्रकार दिवाली के दिन लोग विशेष तौर पर पटांडे और खीर बनाई जाती हैं और रात्रि को अपने घरों व स्थानीय मंदिर में दीपमाला करने के उपरांत गांव में चौपाल में अलाव जलाते है जिसमें सभी लोग शामिल होकर नृत्य करते हैं।

कहा कि इसके उपरांत देवालयों में घैना लगाकर जागरण किया जाता है। दौलत राम वर्मा ने बताया कि क्योंथल के समूचे क्षेत्र में दिवाली पर्व पर देव जुन्गा की विशेष पूजा अर्चना की जाती है। ताकि क्षेत्र में किसी महामारी का प्रकोप न होकर सुख व समृद्धि का सूत्रपात हो।

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