प्रदेश पर 61492 करोड़ का कर्ज, सरकार नहीं वसूल पाई 437 करोड़ का टैक्स

HNN/ शिमला

हिमाचल प्रदेश कैग की रिपोर्ट में जयराम सरकार घाटे वाली सरकार साबित हो गई है। अभी से काबिल मुख्यमंत्री के ना काबिल अधिकारियों की कारगुजारी समझे या फिर मुख्यमंत्री की निर्णय क्षमता में कमजोरी। क्योंकि विधानसभा मानसून सत्र के आखिरी दिन यानी शुक्रवार को सदन में कैग की रिपोर्ट को रखा गया। जिसमें बड़ा खुलासा यह हुआ है कि प्रदेश के 13 नियम व बोर्ड इस समय बड़े घाटे में चल रहे हैं।

घाटे के इस बारे में बिजली बोर्ड ने रिकॉर्ड तोड़ घाटा दर्ज किया है। बिजली बोर्ड के घाटे का आंकड़ा दो हजार करोड़ को पार कर चुका है। उसके बाद हिमाचल प्रदेश पथ परिवहन निगम 1232.48 करोड़, वित्त निगम 166.56 करोड़, एग्रो इंडस्ट्रियल पैकेजिंग 78.23 करोड़, एचपीएमसी का घाटा 88.55 करोड, वन निगम करोड़, ऊर्जा निगम करोड़, पर्यटन विकास निगम सीमित करोड़, हस्तशिल्प तथा हथकरघा निगम सीमित करोड़, एग्रो इंडस्ट्री 14.25 करोड़, एचपी वर्षटेड मिल्स लिमिटेड5.44 करोड़, अल्पसंख्यक वित्त एवं विकास निगम 4.77 करोड़ के घाटे में चल रहे हैं।

कहा जा सकता है कि हिमाचल प्रदेश मौजूदा समय एक बड़े कर्ज के संकट में आ चुका है। प्रदेश इस समय 61492 करोड़ के कर्ज में डूब चुका है और वर्ष के अंत तक यह कर्जे 62212 करोड़ तक पहुंचने का अनुमान भी हो सकता है। रिपोर्ट में हिमाचल पर बढ़ते हुए कर्ज को लेकर चिंता के साथ चेताया गया है कि सरकार अपने खर्चों में शीघ्र अति शीघ्र कमी लेकर आए।

बड़ी बात तो यह है कि राज्य सरकार 437 करोड़ का टैक्स भी नहीं वसूल पाई है। बता दें कि हिमाचल प्रदेश को वित्त आयोग से 8617 करोड़ का अनुदान मिला था। साथ ही केंद्र प्रायोजित योजनाओं के तहत राज्य को 4915 करोड़ से अधिक की रकम भी हासिल हुई थी। कैग रिपोर्ट ने यह भी बताया है कि हिमाचल सरकार ने वित्त वर्ष 2018 19 में 2830 करोड़ का राजस्व हासिल किया।

कोरोना भी घाटे की एक बड़ी वजह बनते हुए राजस्व में गिरावट का बड़ा कारण बना। प्रदेश सरकार ने 6580 करोड रुपए का मार्केट लोन भी लिया साथ ही रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया से 3443 करोड़ का लोन भी लिया। फिर भी नहीं चला तो सरकार के द्वारा वर्ष 2018-19 में 4218 करोड़ रुपए मार्केट लोन भी लिया गया। राजस्व प्राप्ति में कमजोर साबित होते हुए सरकार की केंद्र पर निर्भरता करीब 66 फ़ीसदी बढ़ गई है। चलिए अब आपको यह भी बता दें कि सरकार का एक बहुत बड़ा हिस्सा पेंशन पर खर्च होता है।

जबकि राज्य सरकार का कर्मचारियों के वेतन पर 11477 करोड रुपए खर्च हो रहा है। तथा पेंशन पर 5489 करोड रुपए सालाना खर्च होता है। कैग की रिपोर्ट के अनुसार वर्ष 2019 और 20 में प्रदेश सरकार की राजस्व प्राप्तियां करोड़ की थी जिसमें करोड़ रुपए टैक्स तथा 2501 करोड़ गैर कर राजस्व शामिल था। साथ ही केंद्र से मिलने वाली ग्रांट के एवज में मिलने वाली 15939 करोड़ की रकम भी इसमें शामिल थी।

अब इसके मुकाबले सरकार के द्वारा करोड़ खर्चे गए। इसी तरह उत्पादन पर 1067 तथा ग्रांट इन एड पर 34 दशमलव 96 करोड रुपए की रकम खर्च हुई। और इंटरेस्ट के भुगतान पर 42 34 करोड़ की राशि सरकार ने साल में खर्च करी है। कहां जा सकता है कि टोटल 1168 मामलों में 437 करोड रुपए कम वसूले गए।

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