प्रदेश भाजपा संगठन में मर्यादा के दोहरे मापदंड है अंतर कलह की बड़ी वजह

तूफान से पहले की खामोशी अगर नहीं समझे तो बनती है बाद में बड़े नुकसान की वजह

HNN News नाहन सोलन

मुख्यमंत्री के राजनीतिक सलाहकार की बात बिल्कुल सही है की अंदर की बात बाहर नहीं जानी चाहिए। तो उन्होंने दो टूक मर्यादा का हवाला भी दिया। परंतु यह मर्यादा जब दोहरे पैरामीटर वाली हो जाए तो संगठन के प्रति निष्ठा रखने वालों का स्वाभिमान स्वाभाविक रूप से ज्वालामुखी की तरफ फूटता है। जिसका ताजा उदाहरण कांगड़ा के भाजपा विधायकों व दिग्गज भाजपा नेता रमेश धवाला प्रकरण रहा है।

बगैर विभाग वाले प्रदेश भाजपा अध्यक्ष का मात्र कुछ घंटों में इस्तीफा मंजूर हो जाता है जो कि आज विपक्ष में कांग्रेस के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है। वही सोलन के तथाकथित ब्लॉग राइटर भाजपा नेता ने जमकर अपनी ही सरकार के नेता के खिलाफ जहर उगला। यही नहीं जिस व्यक्ति को सोलन सब्जी मंडी की चेयरमैनशिप दिलाई गई थी उसने भी सोशल मीडिया पर जमकर संगठन की मर्यादा लूटी। और हैरान कर देने वाली बात तो यह है कि यह नेता बड़े नेताओं के साथ बाद में फोटो खींचाते नजर आए।

बात यहां तक कि नहीं बल्कि सोलन के रेस्ट हाउस वाला प्रकरण जिसमें धारा 144 की धज्जियां उड़ाई गई थी और सोलन से हारे हुए भाजपा नेता ने सरेआम रेस्ट हाउस में यह भी कहा था मंडल ने जो फैसला किया है वह गलत है। ऐसे में संगठन की मर्यादा कहां चली जाती है। जाहिर है इस तरह के दोहरे पैरामीटर गुटबाजी को हवा देने के लिए काफी रहते हैं।

इसके अलावा संगठन ने यह कभी नहीं सोचा किस सोलन में भाजपा समर्थित नगर परिषद अध्यक्ष को किसने हटवाया था और किस पार्टी के नेताओं का समर्थन लिया था और अब जो सबसे बड़ा प्रकरण जोगिंद्र बैंक वाला गर्मआ रहा है वह तो सीधे-सीधे संगठन की मर्यादा को अंगूठा दिखा रहा है।

हालांकि यह अंतर कलह पहले भी मीडिया जाहिर होती मगर मुख्यमंत्री व हाईकमान संभवत जानते थे की इन परिस्थितियों पर कौन कंट्रोल कर सकता है। अब दिए गए बयान बदल वाकर भले ही माहौल शांत किया जा रहा है मगर धीरे-धीरे संगठन में सुलग रहा बारूद एक बार फिर से विस्फोट अगर करता है तो यह नई बात नहीं होगी।

विकास कोविड-19 में दब कर रह गया है किए गए वायदों का लोग उलाहना कर रहे हैं। पच्छाद की सड़कें जस की तस है, श्री रेणुका जी में विपक्ष के विधायक को आने वाले चुनावों में मात देने के लिए बलबीर चौहान को मजबूती नहीं दी गई है।

पांवटा साहिब के विधायक अब ना उम्मीद हो चुके हैं और उम्मीदों पर उम्मीद लगाए बैठी पोंटा की जनता कहीं ना कहीं सरकार से अब नाराज भी नजर आती है। कुल मिलाकर जिला सिरमौर अब ना संगठन में है और ना सरकार में। सोलन में कॉन्ग्रेस तथाकथित भाजपा नेता के साथ मिलकर गिव एंड टेक का सफल खेल खेल चुकी है।

ऐसे में अब संगठन को फिर से बड़े ही सख्त नेतृत्व की आवश्यकता आन पड़ी है धवाला की ज्वाला में कई ऐसे हैं जो मसाल लिए खड़े हैं और कभी भी आग सुलगा सकते हैं। क्योंकि अब इस तरीके का डैमेज कंट्रोल अपनाया जा रहा है वह डैमेज कंट्रोल नहीं डैमेज पर पेट्रोल का काम कर रहा है।

भाजपा के कई नेता अब दबी जुबान में यह भी कह रहे हैं की अनुशासनात्मक कार्यवाही जरूर हो मगर उनके खिलाफ भी हो जो बड़े नेताओं की गोद में बैठे हैं। वही एक वरिष्ठ कांग्रेसी नेता ने यह भी दावा कर दिया है कि सोलन फिर से कांग्रेस का होगा मगर प्रत्याशी कौन होगा यह बाद में खुलासा किया जाएगा।

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