“बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश” पुस्तक का बड़ा खुलासा प्रदेश में है पक्षियों की 655 प्रजातियां

मुख्यमंत्री ने किया बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश का विमोचन
655 पक्षियों की प्रजातियों की प्रदेश में हुई पुष्टि
देवेंद्र सिंह डडवाल ने जुटाया “बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश” का खजाना

HNN News शैलेश सैनी

23 वर्षों की मेहनत ने प्रदेश के लिए एक ऐसा खजाना तैयार कर दिया है जिसके बाद ना केवल देश के बल्कि पूरी दुनिया भर के पक्षी प्रेमियों का जमावड़ा हिमाचल प्रदेश में लग सकता है। इस खजाने का नाम है बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश है।एक रंगीन चित्रों के साथ 22- 23 वर्षों की मेहनत के बाद इस किताब को वाइल्डलाइफ के डीएफओ हेड क्वार्टर धर्मशाला देवेंद्र सिंह डडवाल ने तैयार किया है। यही नहीं इस पुस्तक का विमोचन भी प्रदेश के मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर द्वारा बीते शनिवार को विधानसभा सत्र के दौरान धर्मशाला में किया गया था। इस दौरान फॉरेस्ट मिनिस्टर गोविंद ठाकुर तथा फॉरेस्ट के हेड ऑफ द डिपार्टमेंट अजय शर्मा भी मौजूद थे।

क्या है बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश वॉल्यूम 1
“बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश” देवेंद्र सिंह डडवाल की 22- 23 वर्षों की अथक मेहनत का वह परिणाम है जिसके बाद हिमाचल प्रदेश का नाम अंतर्राष्ट्रीय पटल पर पक्षियों की प्रजातियों की विविधता व उन की उपलब्धता के लिए दर्ज हो जाएगा।
इस पुस्तक में 655 पक्षियों की प्रजातियों का कलेक्शन है जिनकी हाई डेफिनेशन पिक्चर के अलावा उनका रहन सहन, ब्रीडिंग समय तथा कौन सा पक्षी किस सीजन में और किस क्षेत्र में मिलेगा बड़े ही सरल तरीके से बताया गया है।

सबसे बड़ी बात तो यह है कि वाइल्ड लाइफ डीएफओ देवेंद्र सिंह डडवाल कि इस खोज के बाद यह साबित हो गया है कि यूरोपीयन कंट्रीज के बाद पक्षियों की प्रजातियों का एक बड़ा फिगर कहीं है तो वह केवल हिमाचल प्रदेश ही है।

बता दें कि इस पुस्तक में जो 655 प्रदेश में पाई गई पक्षियों की विभिन्न प्रजातियां का कलेक्शन है वह पूरे इंडियन सबकॉन्टिनेंट का 50 फ़ीसदी से अधिक हिमाचल में रिकॉर्ड किया गया है। यानी इसके बाद हम दावे से कह सकते हैं कि पक्षी प्रेमी और प्रदेश में आने वाला विजिटर चाहे वह यूरोपियन हो या भारतीय , हिमाचल प्रदेश 100 से 150 प्रजातियों को एक ही दिन में दिखाने का पोटेंशियल रखता है।

यह भी बताना जरूरी है कि प्रवासी पक्षियों का सेंट्रल एशियन फ्लाई रूट हिमाचल से होकर गुजरता है। और दक्षिण ध्रुव तथा खारे पानी की झीलों, समंदर से आने वाले पक्षी भी हिमाचल में रुकते हैं। अब लंबे समय के अध्ययन के बाद देवेंद्र सिंह डडवाल ने इन प्रवासी पक्षियों की एक बड़ी खासियत का पता लगाया कि जब इन पक्षियों का अप्रैल मई-जून तक कब ब्रीडिंग टाइम होता है तो यह वापस अपने क्षेत्रों में लौट जाते हैं। परंतु लौटने से पहले कुछ समय तक यह पक्षी हिमाचल में समय गुजारते हैं। उसमें इन पक्षियों का रंग अप्रत्याशित रूप से बड़ा ही सुंदर हो जाता है। यही वह क्षण होता है जिसको वाइल्ड लाइफ पक्षी प्रेमी फोटोग्राफर व रिसर्च स्कॉलर्स अपने कैमरों में कैद करते हैं। नहीं तो उन्हें इन रंगों का अद्भुत बदलाव कैप्चर करने के लिए यूरोपियन कंट्री का रुख करना पड़ता है। यानी अब देश के तथा विदेशी पक्षी प्रेमियों को हिमाचल की धरती पर यह नजारा भी देखने को मिल जाएगा।

इस पुस्तक की सबसे बड़ी खासियत यह भी है कि कौन सा पक्षी किस सीजन में किस जिला व क्षेत्र में मिलेगा यह भी मेंशन किया गया है। कंजर्वेशन स्टेटस यानी इंटरनेशनल प्रोविजन आईयूसीएन के तहत पक्षियों की उन पर जातियों को भी मेंशन किया गया है जो संकटग्रस्त है अथवा जिन को संरक्षित किया जाना बहुत जरूरी है। इस पुस्तक में प्रदेश की मुख्य झीलों, ट्रैकिंग रूट सीजन के अनुसार स्थान की दूरी भी दर्शाई गई है।
प्रदेश सरकार के लिए वरदान साबित होगी” बर्ड्स ऑफ हिमाचल प्रदेश”

प्रदेश वाइल्डलाइफ ,फॉरेस्ट टूरिज्म डिपार्टमेंट अगर इस पुस्तक को अडॉप्ट करता है तो निश्चित ही यह किताब प्रदेश के लिए वरदान साबित होगी।
बड़ी बात तो यह है कि जिस फॉरेस्ट ऑफिसर ने इस पुस्तक के लिए अपनी जिंदगी के अमूल्य 23 वर्ष लगा दिए उस खजाने की एक प्रति की कीमत भी केवल 1250 रुपए रखी गई है जिसमें ₹200 का डिस्काउंट भी अतिरिक्त शामिल किया गया है। बिना किसी अनुदान के फॉरेस्ट ऑफिसर नैनी जी तौर पर इस पुस्तक को प्रकाशित करने में साडे चार लाख रुपए खर्च किए हैं।

बरहाल प्रदेश के इस सपूत ने ना केवल विभाग के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होकर अपनी ड्यूटी का दायित्व निभाया है तो वहीं प्रदेश मैं उपलब्ध विश्व के एक बड़े पक्षी खजाने को भी पुस्तक में संकलित कर अपनी प्रदेश के प्रति नैतिक जिम्मेवारी का भी बखूबी निर्वहन किया है।
अब देखना यह है कि प्रदेश का वन विभाग टूरिस्ट डिपार्टमेंट या प्रदेश सरकार अपने इस सितारे का मनोबल किस स्तर पर बढ़ा सकती है। जोकि अन्य अधिकारियों के लिए भी एक नजीर साबित हो पाए।

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