बोगीबील पुल/ लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे भारत के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल पर।

रणनीतिक दृष्टि से अत्यंत महत्त्वपूर्ण है यह पुल।

असम में ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील में बना यह पुल 4.94 किलोमीटर लंबा है

इस पुल से चीन सीमा पर अग्रिम मोर्चे पर सैन्‍य साजो सामान भेजने में आसानी होगी

भारत के सबसे लंबे रेल-सड़क पुल का उद्धाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को असम के डिब्रूगढ़ में किया। 

ब्रह्मपुत्र नदी पर बोगीबील में बनी 4.94 किलोमीटर लंबी और रणनीतिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण यह परियोजना देश की सुरक्षा के लिए अग्रिम मोर्चे पर सैन्‍य साजो सामान भेजने में अहम भूमिका निभाएगी। इस पुल पर आपात स्थिति में लड़ाकू विमान भी उतर सकेंगे। 

अधिकारियों से प्राप्त जानकारी के अनुसार, ‘यह ब्रह्मपुत्र नदी के उत्तरी किनारे पर रहने वाले लोगों की असुविधाओं को काफी कम कर देगा’। अभी डिब्रूगढ़ से अरुणाचल प्रदेश जाने के लिए 500 किलोमीटर से अधिक दूरी तय करते हुए गुवाहाटी से होकर जाना होता है। किन्तु इस पुल के बन जाने से यही दूरी अब 100 किलोमीटर से भी कम रह जाएगी।

सुरक्षा की दृष्टि से अति महत्वपूर्ण है यह पुल।

रक्षा विशेषज्ञो के अनुसार, ‘यह पुल पूर्वी क्षेत्र की राष्ट्रीय सुरक्षा को बढ़ाएगा, इस पुल का उपयोग कर के सुरक्षा बलों और उनके उपकरणों को तेजी से आवागमन की सुविधा मिलेगी। इसका निर्माण इस तरह से किया गया था कि आपात स्थिति में एक लड़ाकू विमान भी इस पर उतर सके।’


प्रणव ज्योति शर्मा ( पूर्वोत्तर सीमांत रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी ) ने कहा, ‘चीन के साथ भारत की 4,000 किलोमीटर लंबी सीमा का लगभग 75 प्रतिशत हिस्सा अरुणाचल प्रदेश में है और यह पुल भारतीय सेना के लिए सीमा तक आवागमन में मदद करेगा।

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