भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष के लिए ऊपरी हिमाचल से उठी वीरेंद्र कश्यप के लिए आवाज

संसदीय चुनाव में सुरेश कश्यप की जीत के लिए कुर्बान की थी अपनी दावेदारी और सोलन से दिलाई थी रिकॉर्ड लीड

HNN News/ नाहन

एक ओर उपचुनाव दूसरी ओर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का चुनाव दोनों चुनावों में सबसे अहम भाजपा प्रदेश अध्यक्ष को लेकर ऊपरी हिमाचल से वीरेंद्र कश्यप के लिए संगठन में आवाज उठनी शुरू हो चुकी है। हालाँकि अभी नए प्रदेश अध्यक्ष के चयन को लेकर केंद्रीय नेतृत्व प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों में संतुलन बनाने को लेकर पैनी नजर बनाए हुए है, इसकी मुख्य वजह प्रदेश से ही बतौर राष्ट्रीय भाजपा कार्यकारी अध्यक्ष J.P. नड्डा को आने वाले समय के लिए अपनी फौज में बेहतर कमांडर नियुक्त करने है।

इसके साथ साथ पार्टी में भीतर घात न हो इसके लिए राजनीतिक संतुलन भी बनाना है। अब प्रदेश में ऊपरी हिमाचल से न तो कांग्रेस में और न ही भाजपा में कोई कद्दावर नेता है। भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष बिलासपुर से सम्बन्ध रखते है। मुख्यमंत्री मंडी से है और मौजूदा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सत्ती ऊना से है। ऐसे में ऊपरी हिमाचल खुद को ठगा हुआ सा महसूस कर रहा है।

जबकि सदस्यता अभियान की बात की जाए तो कांग्रेस के बड़े गढ़ में जहाँ कांग्रेस के पूर्व मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह जैसे नेता के होने के बावजूद भाजपा लगातार इस क्षेत्र में बढ़त बना रही है ऐसे में ऊपरी हिमाचल से प्रदेश अध्यक्ष के लिए सबसे बेहतर चेहरा पूर्व सांसद वीरेंद्र कश्यप का उभर कर सामने आया है।

वीरेंद्र कश्यप एक ऐसा चेहरा है जो कोली समुदाय से सम्बन्ध रखता है बिरादरी के साथ साथ अन्य वर्ग पर भी मजबूत पकड़ रखता है। यही नहीं हाल ही में हुए संसदीय चुनाव में हाई कमान के एक ही इशारे पर बिना किसी विरोध के बिना किसी बयान के उन्होंने अपनी दावेदारी भी छोड़ दी थी। J.P. नड्डा का शुरू से सम्मान भी करते आए है।

यही नहीं संघ व संघ की विचारधारा से भी लम्बे समय से जुड़े है। ऊपरी हिमाचल के 17 विधानसभा क्षेत्रों से वीरेंद्र कश्यप के लिए बतौर प्रदेश अध्यक्ष आवाज भी उठ रही है। चूँकि वीरेंद्र कश्यप कोली समुदाय से सम्बन्ध रखते है जबकि प्रदेश के मुख्यमंत्री, मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष दोनों ठाकुर समुदाय से है तो वहीँ राष्ट्रीय अध्यक्ष J.P. नड्डा ब्राह्मण समुदाय से सम्बन्ध रखते है।

तीनो कद्दावर नेता निचले हिमाचल से सम्बन्ध रखते है इसके अलावा सरकार में भी अघिकतर मंत्री निचले हिमचाल से सम्बन्ध रखते है। ऐसे में राजनीतिक समीकरणों बैलेंस बनाने के लिए कोली समुदाय तथा ऊपरी हिमाचल से वीरेंद्र कश्यप बेहतर साबित हो सकते है।

वीरेंद्र कश्यप को लम्बा राजनितिक अनुभव भी है, दो बार MP रह चुके है सोलन क्षेत्र से सम्बन्ध रखते है। सोलन को हिमाचल का मिड पॉइंट भी माना जाता है। प्रदेश के अधिकतर जिलों के लोग जिसमे जनजातीय क्षेत्र किन्नौर के काफी ज्यादा लोग सोलनवासी हो चुके है, ऐसे में राजनीतिक समीकरण बेहतर संचालन व तालमेल बनाए रखने के लिए अच्छे माने जा सकते है।

बरहाल उपचुनाव के बाद प्रदेश में भाजपा को आने वाले विधानसभा चुनाव के लिए अच्छा खासा वक़्त भी अभी पड़ा है। जिस प्रकार सदस्यता अभियान में ऊपरी हिमाचल लगतार बढ़त बना रहा है निश्चित ही आने वाले समय में कांग्रेस के दुर्ग को और अधिक कमजोर करने के लिए वीरेंद्र कश्यप ऊपरी हिमाचल से दमदार चेहरा हो सकते है।