मशोबरा ब्लाॅक के किसी भी स्वास्थ्य संस्थान में नहीं 108 नेशनल एंबुलेंस सेवा

HNN / शिमला

कोरोना के ओमीक्रॉन वेरिएंट से निपटने के लिए जहां स्वास्थ्य विभाग द्वारा बड़े बड़े दावे किए जा रहे हैं वहीं पर मशोबरा ब्लाॅक में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत सबसे दयनीय है। बता दें कि समूचे चिकित्सा ब्लाॅक के किसी भी अस्पताल में 108 नेशनल एंबूलेंस सेवाएं उपलब्ध नहीं है, जिसके चलते गंभीर रोगियों को अस्पताल पहुंचाने में लोगों को काफी परेशानी से जूझना पड़ रहा है। लोग अक्सर रोगियों को निजी गाड़ियों में अस्पताल पहुंचाते हैं। दूसरी ओर सूबे की सरकार देश में सबसे बेहतरीन स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने का दावा कर रही है।

बता दें कि मशोबरा ब्लाॅक में कुल 65 स्वास्थ्य संस्थान कार्यरत है जिनमें एक सिविल अस्पताल जुन्गा, चार सीएचसी, 17 पीएचसी और 43 उप स्थास्थ्य केंद्र कार्यरत है। आलम यह है कि बीएमओ मुख्यालय मशोबरा में भी 108 नेशनल एंबुलेंस सेवा उपलब्ध नहीं है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान विशेषकर जुन्गा क्षेत्र के लोगों को चिकित्सा सेवाओं के लिए काफी भटकना पड़ा। इसी प्रकार कोरोना की तीसरी संभावित लहर में 108 एंबुलेंस सेवा न होने पर मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में बहुत मुसीबत पेश आएगी।

प्रदेश किसान सभा के अध्यक्ष डाॅ. कुलदीप तंवर ने बताया कि कसुंपटी विधानसभा में स्वास्थ्य क्षेत्र की सबसे दयनीय स्थिति है और सरकार के बेहतरीन व गुणात्मक चिकित्सा सेंवाएं प्रदान करने के दावे खोखले साबित हो रहे हैं । जुन्गा क्षेत्र की 12 पंचायतों में स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति सबसे खराब है। अनेक स्वास्थ्य संस्थानों में डाॅक्टर व पैरा मेडिकल स्टाॅफ नहीं है। सिविल अस्पताल जुन्गा में भी 108 नेशनल एंबुलेंस नहीं है। इसके अतिरिक्त जुन्गा क्षेत्र के किसी भी अस्पताल में स्त्री रोग, बाल रोग, और हडडी रोग विशेषज्ञ नहीं है लिहाजा किसी अस्पताल में टेस्ट की सुविधा नहीं है।

जिस कारण रोगियों को इलाज करवाने के लिए शिमला जाना पड़ता है। बताया कि डुब्लु आयुर्वेदिक औषधालय में डाॅक्टर बीेते कई वर्षों से नहीं है। इसी प्रकार आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी पीरन व पीएचसी ट्रहाई में एक-एक चिकित्सक के अलावा कोई भी पैरा मेडिकल स्टाॅफ नहीं है। डाॅक्टर के अवकाश पर जाने पर कोई भी स्टाॅफ उपलब्ध नहीं होता है । उधर, सीएमओ शिमला डाॅ. सुरेखा चोपड़ा से काफी बार बात करनी चाही परंतु उनके द्वारा फोन नहीं उठाया गया। बीएमओ मशोबरा डाॅ. राकेश प्रताप ने बताया कि इस बारे उच्चाधिकारियों के साथ पत्राचार किया गया है ।

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