महामंडलेश्वर ने उठाया प्रदेश में गुरुकुल शिक्षा परंपरा का जिम्मा

अखंड भारत एक बार फिर बनेगा शिक्षा में विश्व गुरु

HNN / शिमला

भारतीय वैदिक शिक्षा में ना केवल गूड विज्ञान का सार छुपा है बल्कि संपूर्ण ब्रह्मांड का ज्ञान भी यहीं से उत्पन्न हुआ है। यह बात प्रदेश के एकमात्र महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती के द्वारा तर्कशास्त्र बैठक में रखी। इस बैठक में श्री धाम वृंदावन के धर्मगुरु के कृष्णमूर्ति सहित कई तर्क शास्त्रियों ने भाग लिया। बैठक में भारतीय संस्कृति, सभ्यता तथा वर्तमान में हिंदुओं का लगातार हो रहा गुणात्मक और संख्यात्मक संरक्षण आदि को लेकर विशेष चर्चा हुई।

सबसे महत्वपूर्ण कोरोना काल में एक बार फिर गुरुकुल शिक्षा पद्धति पर तर्क वितर्क दिए गए। महामंडलेश्वर का मानना है कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति ना केवल शास्त्र का ज्ञान देती है बल्कि देश पर संकट के दौरान पर शस्त्र शिक्षा को भी उपलब्ध कराती है। उन्होंने भगवान राम से लेकर श्री कृष्ण अर्जुन आदि का उल्लेख देते हुए बताया कि इन सब ने भी गुरुकुल शिक्षा ली थी।

महामंडलेश्वर ने बताया कि मौजूदा समय गंभीर समस्याओं के समाधान हेतु भारत में नई पीढ़ी के माध्यम से त्वरित बदलाव के लिए एक बार फिर से गुरुकुल शिक्षा पद्धति की आवश्यकता है। आचार्य के कृष्णमूर्ति ने बताया कि गुरुकुल शिक्षा पद्धति व परंपरा को गांव-गांव में पुन स्थापित करने के लिए प्रयास किए जाएंगे। उन्होंने महामंडलेश्वर के विचारों को जानते हुए इस महाअभियान को जल्द शुरू करने की भी बात कही।

गौरतलब हो कि इनके द्वारा पिछले 20 25 वर्षों से अध्यात्म तथा शिक्षा में परिवर्तन के लिए शोध पूर्ण सैद्धांतिक कथा लेखन कार्य निरंतर किए जा रहे हैं। यह भी कहा कि अब हम इस क्षेत्र में व्यावहारिक कार्य शुभारंभ करने के लिए अपना कदम भी आगे बढ़ा चुके हैं। कृष्णमूर्ति ने महामंडलेश्वर परमहंस पंच दशम जूना अखाड़ा श्री दयानंद भारती का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि धर्म तथा शिक्षा के क्षेत्र में जो अलग आपने जगाई है निश्चित ही विश्व कल्याण में यह महत्वपूर्ण साबित होगी।

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