यहां औषधीय पौधों की खेती से किसानों को आय दे रही बंजर जमीन

किसानों द्वारा तैयार कैमिकल फ्री उत्पाद ग्रहकों की बने पहली पसंद

HNN News/ श्री रेणुकाजी

श्रीरेणुकाजी क्षेत्र में जंगली जानवरों व बंदरों के आतंक से बंजर हो रही भूमि अब किसानों के लिए कमाई का साधन बनने लगी है। विकासखंड के किसान क्लबों द्वारा करीब 6 वर्ष पहले रेणुकाजी में यह मुहिम शुरु की गई थी।

यहां पर किसान क्लबों व स्वयं सहायता समूहों को रोजगार का साधन उपलब्ध करवाने के लिए नाबार्ड द्वारा प्रोसेसिंग प्लांट लगवाया गया था। किसान क्लबों को भी नाबार्ड द्वारा प्रोत्साहन दिया गया। शुरु में किसानों को जानकारी के अभाव में औषधीय पौधों की खेती करने में परेशानी हुई।

मगर अब यह उद्योग जहां इससे जुडे किसानों को रोजगार उपलब्ध करवा रहा है, वहीं यहां पर बिना कैमिकल यूज से बने उत्पाद ग्राहकों को भी खूब भा रहे हैं।

बंजर जमीन पर हो रही औषधीय पौधों की खेती
खंड किसान क्लब द्वारा किसानों को बंजर जमीन पर खेती करने के लिए प्रोत्साहित कि या जा रहा है। फिलहाल क्लब द्वारा करीब 50 परिवारों से बंजर जमीन में ऐलोवीरा, लैमनग्रास, तुलसी, आंवला, बेहडा, हरड़ व सदाबाहर की खेती करवाई जा रही है। किसानों द्वारा तैयार उत्पाद खंड किसान क्लब द्वारा ही खरीदा जा रहा है। इसके बाद नाबार्ड के सहयोग से बनाए गए ओम फार्मा उद्योग में इन उत्पादों को प्रोसेस किया जा रहा है।

उद्योग द्वारा करीब 28 तरह के विभिन्न उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। खास बात यह है कि इन उप्तपादों को तैयार करने के लिए किसी प्रकार के कैमिकल का प्रयोग नहीं किया जा रहा है। इससे ग्रहकों को भी यह उत्पाद खूब भा रहे हैं।

यह उत्पाद तैयार कर रहे किसान
उद्योग में किसानों द्वारा ऐलोवीरा जैल, शैंपू, त्रिफला चूर्ण, गिलोय जूस, अर्जुन छाल जूस, नीम , हल्दी व गोमूत्र आदि से शैंपू व बाथ शॉप बनाया जा रहा है। इसके अलावा विभिन्न तरह के उत्पाद तैयार किए जा रहे हैं। रेणुकाजी क्षेत्र में मिलने वाले गुड करेला से भी शुगर रोगियों के लिए पाउडर तैयार किया जा रहा है। इससे किसानों के खेतों में व्यर्थ जाने वाले करेले की इस खास किस्म को भी नई पहचान मिली है।

किसान क्लब के संयोजक व ओम फार्मा के प्रोपराइटर महिमानंद ने बताया कि रेणुकजी क्षेत्र में जंगली जानवरों से परेशान होकर बहुत से किसान खेती करना छोड़ रहे हैं। इससे क्षेत्र की जमीन बंजर हो रही है। यही नहीं बाजारों में महंगे दामों पर मिलने वाले कई उत्पाद जानकारी के अभाव में सड़ रहे थे। किसान इन उत्पादों को बाजार में नहीं बेच पा रहे थे।

नाबार्ड द्वारा किसान क्लबों के सहायोग से यहां पर औषधीय पौधों की खेती शुरु करवाई गई थी। अब इसके अच्छे परिणाम आने शुरु हो गए हैं। किसानों को भी इससे लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि खंड किसान क्लब से किसानों के करीब 100 समूह व महिलाओं के करीब 250 स्वयं सहायता समूह जुडे हैं।