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” विकलांग हैं तो घर बैठें”- DDh हायर इंस्पेक्शन ने घर भेजा अध्यापक

उच्च न्यायालय के आदेश की करी उपनिदेशक हायर इंस्पेक्शन ने अवहेलना, ड्यूटी पर आए अध्यापक को कहा घर जाओ

HNN News नाहन

हिमाचल प्रदेश शिक्षा विभाग के उच्च अधिकारियों की नजर में ईमानदार और कर्तव्यनिष्ठ अध्यापकों की शायद कोई अहमियत नहीं रह गई है।

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हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय से विकलांग अध्यापक महेश गुप्ता के लिए जारी आदेशों को ताक पर रखते हुए जिला सिरमौर हायर एजुकेशन के उपनिदेशक इंस्पेक्शन ने अध्यापक को कार्यालय में नॉट एलाऊ कहते हुए घर भेज दिया है।

अध्यापक महेश कुमार कैंट मिडिल स्कूल में बतौर मुख्य अध्यापक तैनात थे। जिनका हाल ही में शिक्षा विभाग द्वारा उपनिदेशक हायर इंस्पेक्शन कार्यालय में तबादला कर दिया गया था।

अध्यापक अपने सर्विस टाइम में कई बार सड़क दुर्घटनाओं का शिकार हुआ है। जिसके चलते उनकी स्थिति एक अपंग जैसी बन गई है। महेश गुप्ता बैसाखी के सहारे ड्यूटी पर आते हैं। बड़ी बात तो यह है कि अपने ड्यूटी काल के दौरान जबकि डॉक्टरों के द्वारा उन्हें आराम करने की सलाह दी गई थी। बावजूद उसके बच्चों की शिक्षा प्रभावित ना हो वे स्कूल आते रहते थे।

महेश गुप्ता की जिला सिरमौर के बेस्ट अध्यापकों में गिनती रही है। निहायती सरल स्वभाव के चलते उन्हें विभाग के द्वारा जो भी आदेश मिले उन्होंने उसे अपना फर्ज समझते हुए निभाया है।

अपंग स्थिति में भी उनका तबादला विभाग के द्वारा हायर एजुकेशन उपनिदेशक कार्यालय के इंस्पेक्शन विंग में कर दिया गया।

बताया जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से वे काफी अस्वस्थ भी चल रहे थे जिसके चलते महेश गुप्ता 2 दिन की छुट्टी पर रहे। छुट्टी के बाद जब वे आज बुधवार को अपने कार्यालय पहुंचे तो उपनिदेशक इंस्पेक्शन ने उन्हें ऑफिस में नॉट अलाउड करते हुए घर जाने की नसीहत दी।

महेश गुप्ता ने बताया कि उपनिदेशक ने उन्हें यह कहा कि उन्हें ड्यूटी पर आने की जरूरत नहीं है अगर आप हैंडिकैप्ड हैं तो मेडिकल लेकर घर पर बैठें। जबकि महेश गुप्ता ने बार-बार यह भी कहा कि उन्हें ऑफिस में कोई भी काम दे दें उन्हें कोई इंकार नहीं है।

बावजूद इसके उपनिदेशक ने उन्हें प्रताड़ित करते हुए तथा उच्च न्यायालय के आदेशों को भी दरकिनार करते हुए घर जाने के आदेश दे दिए। उपनिदेशक के ऐसे रवैया के चलते मिनिस्ट्रियल स्टाफ एसोसिएशन की ओर से काफी नाराजगी व्यक्त की गई है। संघ के नाहन इकाई अध्यक्ष का कहना है कि इस प्रकार किसी कर्मचारी को प्रताड़ित करना अच्छा नहीं है

बता दें कि माननीय उच्च न्यायालय ने शिक्षा विभाग को साफ तौर पर यह आदेश किए हैं कि इनसे कोई भी कठिन कार्य ना लिया जाए। उपनिदेशक के इस रवैया के बाद महेश गुप्ता एक बड़े मानसिक दबाव में आ चुके हैं।

उधर उच्च शिक्षा उपनिदेशक इंस्पेक्शन जिला सिरमौर राकेश कुमार का कहना है कि अगर महेश गुप्ता हैंडिकैप्ड है तो उन्हें घर बैठना चाहिए। उप निदेशक का कहना है कि हमारा काम स्कूलों में जाकर इंस्पेक्शन करने का है। ऑफिस में हमारा कोई काम नहीं होता है।

उनका कोर्ट मैटर है उस पर मैं कोई टिप्पणी नहीं करना चाहता।

बरहाल यह बड़ी हैरानी का विषय है कि एक जिम्मेदार ओहदे पर बैठे अधिकारी माननीय उच्च न्यायालय के आदेशों की अवहेलना तो करते ही हैं साथ ही गैर जिम्मेदाराना बयानबाजी करने से भी गुरेज नहीं करते हैं।

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