शिमला/ तलाई मात मंदिर के तालाब की सैकड़ों मछलियां ने तोड़ा दम

शिमला का नाम श्यामला यानी काली माता इसी मंदिर के नाम पर डला था , लोगों की आस्था को पहुंची भारी चोट

HNN News शिमला

प्रदेश की राजधानी शिमला से कुछ दूरी पर स्थित मशोबरा के ऐतिहासिक कालीबाड़ी यानी तलाई माता के मंदिर समीप ऐतिहासिक तालाब की सैकड़ों मछलियां दम तोड़ रही हैं।

धार्मिक आस्था से जुड़े इस तालाब की मछलियों के लगातार दम तोड़ने को लेकर एक और जहां लोगों की आस्था को भारी ठेस पहुंची है वही प्रशासन सहित राज्य पोलूशन कंट्रोल बोर्ड भी मौके पर जांच के लिए पहुंच रहा है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार प्रथम दृष्टया तालाब में ऑक्सीजन का लेवल कम होना माना जा रहा है। वही विशेषज्ञों का यह भी मानना है कि लोग आस्था में ज्यादा मात्रा में मछलियों को आटा खिलाते हैं। जिसके चलते मछलियां अपने नेचर सिस्टम को भूलकर तलाब केशवाला दिखाने की जगह केवल आटे पर निर्भर रह जाती हैं।

जिसके चलते झील का बीओडी लेवल भी बिगड़ सकता है। यह संभावना भी जताई जा सकती है। वहीं यह भी संभावना जताई जा रही है कि संभवत किसी शरारती तत्व के द्वारा इस तालाब में ब्लीचिंग आदि ना गिराया गया हो।

बता दें कि यह सिद्ध काली माता मंदिर तलाई माता के नाम से मशहूर है । 1845 में एक बंगाली ब्राह्मण के द्वारा इस मंदिर को बनवाया गया था। यहां पर माता काली को श्यामला के नाम से भी जाना जाता है। श्यामला के कारण ही राजधानी का नाम शिमला पड़ा है। बताया जाता है कि प्रदेश सहित बंगाल के बहुत से श्रद्धालु इस मंदिर में माता के दर्शनों हेतु आते हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार अगस्त महीने में यहां पर अब सिंबॉलिक तौर पर झोटों की लड़ाई भी करवाई जाती है। जबकि पहले यहां पर वास्तविक रूप से झोटों की लड़ाई होती थी।

बरहाल आस्था पर आए इस संकट को लेकर प्रशासन व प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड हरकत में आ चुका है। जांच के बाद ही पता चल पाएगा कि इन मछलियों की मौत की असली वजह क्या है।

उधर मेंबर्स सेक्रेटरी राज्य पॉल्यूशन बोर्ड आदित्य नेगी का कहना है कि इस प्रकरण को पूरी गंभीरता से लिया जा रहा है। इसके लिए विशेषज्ञों को मौके पर भेजे जाने के आदेश भी दे दिए हैं। जांच रिपोर्ट के बाद ही इन मछलियों की मौत के कारणों को स्पष्ट किया जा सकेगा।

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