संकट में आ गई है मां रेणुका झील- यह कैसी श्रद्धा मां कर दी घायल.. स्टडी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

Renuka lake research by Wadiya Institute Dehradun

Renuka lake research by Wadiya Institute Dehradun

वाडिया इंस्टीट्यूट आफ हिमालयन जियोलॉजी की स्टडी रिपोर्ट में हुआ खुलासा ।

13 मीटर ही रह गई है झील की गहराई

झील का वजूद विस्फोटक स्थिति में, श्रद्धा नहीं अब डॉक्टर की है जरूरत ।

HNN News शैलेश सैनी

अंतरराष्ट्रीय धरोहर व धार्मिक महत्व से सत्यता पर प्रमाणित भगवान श्री परशुराम जी की मां रेणुका जी झील पर एक बड़ा संकट मंडराने लग पड़ा है। हैरानी तो इस बात की है कि जहां एक और पूरा उत्तर भारत सहित पूरा देश इस पवित्र स्थल पर साक्षात झील के रूप में अवतरित मां के लिए लोग श्रद्धा की अपार भावना रखते हैं। मगर श्रद्धा के सैलाब में मां के ऊपर जो संकट आ खड़ा हुआ है उसके लिए सबसे बड़ा जिम्मेवार भी श्रद्धालु ही बन गया है।

श्री रेणुका जी मेला के समापन के दिन वाडिया इंस्टीट्यूट ऑफ हिमालयन जूलॉजिकल रिसर्च सेंटर तथा एफ आर आई देहरादून वाइल्डलाइफ जैसलमेर के डीएफओ सहित नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल से जुड़े वैज्ञानिक यहां पहुंचे थे। हालांकि यह टीम गैर सरकारी टूर पर थी। मगर इस टीम से जुड़े कुछ वैज्ञानिक कई वर्षों से हिमालयन रेंज में स्थित वॉटर बॉडीज का गहन अध्ययन कर रहे हैं। इस अध्ययन से जुड़े वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ नरेन्द्र कुमार मीणा नई खबर की पुष्टि करते हुए बताया कि श्री रेणुका जी लेक से जुड़ी स्टडी आ चुकी है। उन्होंने बताया कि कोर सैंपल स्टडी में सेडिमेंटेशन निकाला गया था। उसमें सबसे चिंताजनक विषय न्यूट्रेड लेवल का बढ़ना है। इससे झील का ऑक्सीजन लेवल बहुत कम हो जाएगा जिससे झील में रहने वाले जीव जंतु मर सकते हैं।

गौरतलब हो कि हिमाचल प्रदेश की दूसरी बड़ी रिवालसर झील की रिसर्च भी इसी टीम के द्वारा दी गई थी। बावजूद इसके उस दौरान प्रदेश सरकार ने उस रिपोर्ट को गंभीरता से नहीं लिया था और झील में भारी तादाद में मछलियां मारी गई थी।

वाडिया इंस्टीट्यूट के द्वारा इस झील पर किए गए अध्ययन में कैलशियम मैग्निशियम क्लोराइड इत्यादि जैसे विभिन्न भौतिक रासायनिक मानकों की बढ़ती एकाग्रता के कारण इस झील का पानी अब पीने लायक भी नहीं रह गया है। रिपोर्ट के अनुसार इस पानी को पीने से गंभीर स्वास्थ्य प्रभाव भी पैदा हो सकते हैं। जबकि स्टडी में झील के पानी को केवल सिंचाई के योग्य ही उपयुक्त माना गया है।

रिपोर्ट में अच्छी बात तो यह सामने भी आई है कि 139 वर्ष का भारी धातु एकाग्रता यानि आस पास के जंगलों से बहकर आने वाला मड पत्थर प्रदूषण इतिहास का विश्लेषण भी वाडिया इंस्टीट्यूट के द्वारा किया गया। 60 स्थाई रेजिमेंटेशन रेट के अनुसार सन 1974 के बाद इसमें कमी आई है। इसकी वजह झील के चारों तरफ वह कराने वाले बरसाती नालों के पानी को हल्की-फुल्की बाउंड्री वॉल लगाकर रोका गया है। मगर अब इसके साथ ही मेलों के दौरान व अन्य अवसरों पर श्रद्धालुओं के द्वारा खुले में शौच का इस्तेमाल ज्यादा किया जाता है। चूंकि मानव यूरिन में यूरिया की मात्रा ज्यादा होती है और जब यह यूरिन जमीन के संपर्क में आ जाता है तो बरसाती पानी के साथ मिलकर यह झील तक पहुंच जाता है। जिसके चलते झील में पैदा हो रही वनस्पति को भारी मात्रा में नाइट्रोजन भी मिलता है। जलीय पौधों और वनस्पति के बढ़ने से ऑक्सीजन का लेवल कम हो जाता है। अब यदि प्रदूषण लेवल की बात की जाए तो लोड इंडेक्स न्यू ट्रेट्स के कारण स्थिति यू ट्रॉपिक हो गई है। जिसे हम खतरनाक कह सकते हैं।

यहां हम वैज्ञानिक शोध की भाषा भी बता दें कि इसकी 3 स्टेज होती हैं-

1-Oligo tropic
2-Mejo tropic
3-U tropic

इसके अनुसार झील तीसरी स्टेज पर है यानी कार्बन कंटेंट बढ़ रहे हैं प्रोडक्टिविटी बढ़ रही है। ऐसे में इस पवित्र झील को श्रद्धा कि नहीं बल्कि इलाज की जरूरत पड़ गई है। यह इलाज केवल इस स्टडी से जुड़े वहीं वैज्ञानिक कर सकते हैं जिन्होंने पहले भी इसका शोध किया है।

एचएनएन न्यूज ने जब डॉ नरेंद्र कुमार मीणा व सहयोगी वैज्ञानिकों से झील को कैसे बचाया जाए। तो उन्होंने बताया कि इसके लिए यहां की सरकार को इनीशिएट लेना पड़ेगा साथ ही इस झील से जुड़े श्रद्धालुओं को एक अभियान के तौर पर जुड़ कर इस पवित्र झील का संरक्षण करना पड़ेगा। इसके अलावा इसका वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उपचारित प्लान बनाना पड़ेगा। उस प्लान के तहत झील भी संरक्षित हो जाएगी और लोगों की आस्था भी संस्कारों के अनुरूप बरकरार रहेगी।

कितनी रह गई है झील की गहराई
वैज्ञानिकों ने झील की गहराई का भी शोध किया है उसकी स्टडी भी आ चुकी है। अब आप इस चित्र को देखकर ही समझ सकते हैं। किस झील की गहराई भी चिंताजनक स्थिति में है। वैज्ञानिकों ने पीबी 210 आइसोटोप से सेडिमेंटेशन रेट निकाला है। इस झील की गहराई को नापने के लिए शोध के दौरान 50 पॉइंट निर्धारित किए गए थे। जिसके अनुसार झील के केंद्र में मिनिमम गहराई शून्य दशमलव 30 मीटर तथा अधिकतम गहराई सिर्फ 13 मीटर ही रह गई है। बाहरी किनारों की ओर से झील की गहराई 1 से 3 मीटर यानी की झील का कुल 10 फ़ीसदी हिस्सा 1 से 10 मीटर गहरा ही रह गया है। अतिरिक्त पैरी फिल जोन जोगी पूरी झील का 50 फ़ीसदी है उसकी गहराई 3 से 6 मीटर निकाली गई है। बिल्कुल केंद्र का क्षेत्र जो कि कुल झील का 17 फ़ीसदी है 9 से 13 मीटर गहरा ही रह गया है। अब यहां श्रद्धालु व प्रदेश की सरकार पर्यावरणविद व महिला संगठनों से जुड़े संस्थान। यहां महिला संस्थानों को हम इसलिए लिख रहे हैं क्योंकि यह देश की महिलाओं का सिंबल भी है। खुद निर्धारित कर सकते हैं कि अब मां का हाल क्या हो चुका है।

हमारा इस खबर को प्रकाशित करने का उद्देश्य सनसनी फैलाना नहीं बल्कि इस प्राकृतिक झील के वजूद को बचाने के लिए एक अलर्ट जारी करना है। यह अलर्ट एक वैज्ञानिक शोध पर आधारित है।

पूरी दुनिया में क्या है झील का महत्व
यह पवित्र एक प्रसिद्ध धार्मिक पर्यटन स्थल है। तथा सेरिन इनसाइट है। यानी ध्रुवीय पक्षियों का प्रवास स्थल। वर्ष 2005 में इसे अंतरराष्ट्रीय महत्व के कारण रामसर साइट के रूप में घोषित किया गया है। इसके अलावा यह क्षेत्र वेटलैंड में भी आता है। अब आप समझ सकते हैं एक तरफ अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक महत्व और दूसरी और आस्था का साक्षात प्रमाण। सबसे बड़ी बात यह भी है कि राजनीतिक कारणों के चलते इस वेटलैंड क्षेत्र को राजनीतिक दबाव के चलते कुछ क्षेत्र वेटलैंड से बाहर करने की भी कोशिश की जा रही है। पर्यावरणविद यह भी मानते हैं कि यदि इससे अंतरराष्ट्रीय महत्वता यहां की जनता नहीं दिलाना चाहती है तो पूरा क्षेत्र ही वेटलैंड से बाहर करवा देना चाहिए। या फिर सदियों तक आस्था जिंदारहे और धर्म का वजूद प्रमाणित रहे उसके लिए श्रद्धालुओं को एक बड़ा समझौता भी करना पड़ेगा। यानि मेला क्षेत्र दादाहु की और गिरी नदी के डेल्टा में। और आस्था से जुड़ी तमाम औपचारिकताएं केवल झील क्षेत्र में होनी चाहिए।

बरहाल वैज्ञानिक शोध व स्टडी के बाद यह तो सबसे पहले प्रदेश के श्रद्धालुओं सहित आम जनता को डिसाइड करना है। की मां को उपचार दिलाना है या फिर केवल इस ऐतिहासिक धरोहर को धीरे धीरे दम तोड़ते हुए देखना है।

अब जो पाठक यह जानना चाहते हैं की इस झील की उम्र कितनी निकाली गई है तो वह हमारे अगले बुलेटिन का इंतजार जरूर करें…

1 thought on “संकट में आ गई है मां रेणुका झील- यह कैसी श्रद्धा मां कर दी घायल.. स्टडी रिपोर्ट में हुआ खुलासा

  1. अत्यंत चिंताजनक स्थिति में है माँ रेणुका झील। समय रह्ते मत बरतें हम दिल।

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