सबसे पहले माशू से मां रेणुका जी को मिलने शोभा यात्रा स्थल पहुंचे भगवान परशुराम

शोभायात्रा में सबसे पहले जामू कोटी फिर डांग कटाहां, माशू और सबसे पीछे भगवान शिरगुल महाराज पालकी चलती है।जेठू चीणूं है मांशु के च्योग में, ददाहु मैदान में जुटनी शुरू हुई भक्तों के दर्शनों को देवताओं की पालकीयां

HNN News श्री रेणुका जी

सिरमौर रियासत के राजघराना परिवार द्वारा जामू कोटी से आने वाली भगवान परशुराम जी की प्रमुख पालकी का स्वागत करने के बाद देवता स्वागत स्थल पर जुटने शुरू हो जाते हैं। ददाहू स्कूल मैदान में वीरवार को दशमी के दिन अलग-अलग स्थानों से आई भगवान परशुराम जी की पालकीयां तथा शिरगुल महाराज की पालकी भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए इकट्ठा हुई।

स्वागत स्थल पर सबसे पहले शिलाई के माशू च्योग मंदिर जय भगवान परशुराम की पालकी सबसे पहले मां से मिलने पहुंची। मां बेटे के इस मिलन मिलन का साक्षात कराता श्री रेणुका जी का अंतरराष्ट्रीय मेला मुख्य जामू पालकी के आने के बाद शुरू माना जाता है।

क्या है माशू मंदिर का इतिहास

इस मंदिर का इतिहास काफी प्राचीन माना जाता है। बताया जाता है की उस काल में मंदिर की स्थापना के बाद जब पुजारी और गांव के लोग श्री रेणुका जी में मूर्ति लेने के लिए जामू पहुंचे थे तो उन्हें सबसे छोटी मूर्ति देने के लिए कहां गया।

इस मंदिर के पुजारी शूरवीर ने बताया कि उनके भक्तों की इच्छा बड़ी मूर्ति ले जाने की थी। उन्होंने बताया कि जब यहां के पुजारी ने छोटी मूर्ति को उठाने के लिए कहा तो वह नहीं उठी। जिसके बाद माशू के पुजारी ने कहा कि उन्हें बड़ी मूर्ति ले जाने दे। इस पर यहां के पुजारी ने कहा कि आप पीछे हाथ करके अगर उठा सकते हैं तो आप बड़ी मूर्ति ले जाएं।

बताया जाता है कि जैसे उन्होंने पीछे हाथ करके मूर्ति को सम्मान के साथ उठाया पूर्ति आसानी से उठ गई। पंडित सुरभि ने बताया कि इसीलिए भगवान परशुराम जी की सबसे बड़ी मूर्ति माशू मंदिर से ही आती है।

उन्होंने बताया कि मां रेणुका जी से मिलने प्राचीन काल से तीन प्रमुख देव स्थलों की पालकीयां आती हैं। इसमें सबसे पहले नंबर पर जामू कोटी की मुख्य पालकी, ढांग कटाहां और माशू की ही पालकीयां आती रही हैं। बाद में मंडलाहां से भगवान शिरगुल महाराज की पालकी भी प्रमुख स्थल पर लाई जाती है।

वीरवार को दूसरे नंबर पर भगवान शिरगुल की पालकी दर्शन स्थल पर पहुंची। जिसके बाद डांग कटाहां और फिर बाकी मंदिरों की पालकीया एकजुट होती हैं। जबकि शोभायात्रा में प्रोटोकॉल भी पूरा रहता है। जिसमें सबसे आगे जामू कोटी जय भगवान परशुराम की मुख्य पालकी सबसे आगे अगुवाई करती है।

वही मेले के शुभारंभ पर इस बार मुख्यमंत्री की जगह विधानसभा अध्यक्ष डॉ राजीव बिंदल ने कंधा दीया। इस दौरान उनके साथ जिला भाजपा अध्यक्ष विनय गुप्ता, प्रताप ठाकुर के अलावा प्रशासन की ओर से उपायुक्त सिरमौर डॉक्टर आरके परुथी एसडीएम विवेक शर्मा रेणुका विकास बोर्ड के कार्यकारी मुख्य अधिकारी दीप राम शर्मा