सिरमौर उच्च शिक्षा विभाग में करुणा मूलक पर दोहरे मापदंड

करुणा मूलक आधार पर लगे हो गए 5 साल, अंशकालीन वेतन भोगियों से जोड़ी जा रही है पॉलिसी
सरकार द्वारा बनाई पॉलिसी को किया दरकिनार।

HNN News / शैलेश सैनी

30 सितंबर 2018 को 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके करना मुल्क आधार पर लगे दैनिक वेतन भोगियों की राह में दोहरी पॉलिसी का पेंंच फस गया है। यह रोड़ा सरकार के द्वारा नहीं बल्कि उपनिदेशक हायर जिला सिरमौर के द्वारा अटका दिया गया है।

जबकि एचपी नॉन टीचिंग एम्पलाइज फेडरेशन नाहन ब्लॉक ने बाकायदा नियमों का हवाला देकर उपनिदेशक को ऐसा ना करने की नसीहत भी दी है। उन्होंने इसे नियमों के विरुद्ध बताते हुए कहा कि पार्ट टाइम अंशकालीन जलवाहकों की पॉलिसी नियमित रूप से 8 साल के कार्यकाल पर आधारित है जबकि करुणा मूल के आधार पर सीधे नियमित सेवादार पद पर नियुक्ति की जाती है। सरकार की पॉलिसी व नियमानुसार इन्हें 5 साल बाद रेगुलर कर दिया जाता है।

जिला सिरमौर हायर एजुकेशन इस नियम को ना मानते हुए दोनों पॉलिसियों को प्लग कर नियमितीकरण की प्रक्रिया अपनाना चाहता है।
बताना जरूरी है कि करना मुल्क आधार पर लगे दैनिक वेतन भोगी 5 वर्षों में नियमित होते हैं जबकि अंशकालिक जलवाहक 8 साल के बाद तथा इसके 6 वर्षों के बाद यानी 14 वर्षों के उपरांत सेवादार के पद रिक्त होने पर नियमित होते हैं।
हैरानी तो इस बात की है कि इससे पूर्व 5 साल पूरा करने पर करुणा मूलकों को रेगुलर किया जाता रहा है।

जानकारी तो यह भी मिली है कि ऐसा नियम उपनिदेशक के ऊपर अनुभाग अधिकारी का अपना नजरिया बनाया जा रहा है। क्योंकि फेडरेशन ने इन्हें नियमितीकरण की जद में लाने के लिए अनुभाग अधिकारी द्वारा अनुचित आपत्ति लगाए जाना बताया जा रहा है।

फेडरेशन ने अपने ज्ञापन में यह भी स्पष्ट कर दिया है कि शिक्षा निदेशालय शिमला के द्वारा दिनांक 29 नवंबर 2018 को ईमेल भेजकर स्थिति भी स्पष्ट कर दी गई है। बावजूद इसके करुणा मूल के आधार पर अपना 5 वर्ष का कार्यकाल पूरा कर चुके कर्मियों को जानबूझकर नियमित किए जाने में देरी की जा रही है। हैरानी तो इस बात की भी है कि शिमला से डायरेक्शन आ चुकी है बावजूद इसके अनुभाग अधिकारी के द्वारा यह मामला जानबूझकर उलझाया जा रहा है।

हिमाचल प्रदेश नॉन टीचिंग इंप्लाइज फेडरेशन ने सख्त लहजे में जल्द नियमितीकरण प्रक्रिया को पूर्ण किए जाने को कहा है। उन्होंने कहा है कि यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो उन्हें संघर्ष की राह अपनानी पड़ेगी।
सहायक डीलिंग हैंड नरेश का कहना है कि शिक्षा निदेशालय से ईमेल के द्वारा आदेश आए थे। जो की उपनिदेशक को दे दिए गए थे फाइल भी पुट अप कर दी गई थी।

उपनिदेशक हायर एजुकेशन उमेश बहुगुणा का कहना है कि अभी क्लेरिफिकेशन नहीं आई है। रेशों कैसे फिक्स की जाए तथा सीनियरिटी लिस्ट अवेलेबल कराए जाने के लिए डीलिंग को कहा गया है।

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