सोहराबुद्दीन शेख और कौसर बी :फर्जी मुठभेड़ मामले में 13 साल बाद आया फैसला ।

HNN News/मुंबई

तुलसीराम प्रजापति कथित फर्जी मुठभेड़ मामले में 13 साल बाद आया फैसला है। सोहराबुद्दीन शेख व उसकी पत्नी कौसर बी साल 2005 के इस मामले में मुंबई की सीबीआई अदालत ने सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं।

अदालत ने कहा कि आरोपों मे बताई गई थ्योरी साबित नहीं हो पाया। अगर गवाह पलट जाता है तो इसके लिए सरकारी पक्ष को जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है।

मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के करीब 92 गवाह मुकर गए थे। इस महीने की शुरूआत में आखिरी दलीलें पूरी किए जाने के बाद सीबीआई मामलों के विशेष न्यायाधीश एस जे शर्मा ने फैसला सुनाया है। ज्यादातर आरोपी गुजरात और राजस्थान के कनिष्ठ स्तर के पुलिस अधिकारी हैं।

सीबीआई के मुताबिक शेख की 26 नवंबर 2005 को अहमदाबाद के पास कथित फर्जी मुठभेड़ में हत्या कर दी गई. उसकी पत्नी को तीन दिन बाद मार डाला गया और उसके शव को ठिकाने लगा दिया गया।

अदालत ने सीबीआई ने 38 लोगों में 16 को सबूत के अभाव में आरोपमुक्त कर दिया है। इनमें अमित शाह, राजस्थान के तत्कालीन गृह मंत्री गुलाबचंद कटारिया, गुजरात पुलिस के पूर्व प्रमुख पी सी पांडे और गुजरात पुलिस के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी डीजी वंजारा शामिल हैं।

इस बीच बुधवार को अभियोजन के दो गवाहों ने अदालत से दरख्वास्त की कि उनसे फिर से पूछताछ की जाए. इनमें से एक का नाम आजम खान है और वह शेख का सहयोगी था।

उसने अपनी याचिका में दावा किया है कि शेख पर कथित तौर पर गोली चलाने वाले आरोपी एवं पूर्व पुलिस इंस्पेक्टर अब्दुल

रहमान ने उसे धमकी दी थी कि यदि उसने मुंह खोला तो उसे झूठे मामले में फंसा दिया जाएगा। एक अन्य गवाह एक पेट्रोल पंप का मालिक महेंद्र जाला है। दोनों की याचिका कोर्ट ने आज खारिज कर दी।

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