सौर सिंचाई योजना बनेगी कृषि उत्पादन व उत्पादकता बढ़ाने में वरदान

HNN News/ मंडी

 प्रदेश सरकार किसानों को मूलभूत सुविधाएं प्रदान करने और कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना के विकास के लिए कृत संकल्प है। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने सरकार गठन के उपरांत अपने प्रथम बजट में विभिन्न क्षेत्रों में 30 नई योजनाएं प्रारंभ की हैं जिनमें कृषि क्षेत्र को बढ़ावा देने के लिए अन्य योजनाओं के साथ सौर सिंचाई योजना भी सम्मिलित है।

सौर ऊर्जा के माध्यम से लोगों के घरों को जगमगाने के साथ ही कृषि क्षेत्र में इसका उपयोग एक नई पहल है। प्रदेश सरकार ने किसानों को आश्वस्त सिंचाई प्रदान करने के उद्देश्य से सौर सिंचाई योजना प्रारंभ की हैजिसमें विशेषकर उन दूरस्थ क्षेत्रों में जहां बिजली की निरंतर आपूर्ति नहीं हो पा रही है वहां जल उठाने की सुविधा इस योजना के अंतर्गत दी जा रही है ताकि फसलों के उत्पादन व उत्पादकता में वृद्धि हो सके। 

दूरदराज के क्षेत्रों में जहां विद्युत आपूर्ति के लिए ट्रांसमिशन लाईनें बिछाना व्यवहारिक तौर पर संभव नहीं है या जहां तक लाईन बिछाने पर अत्याधिक व्यय आएगा ऐसे क्षेत्रों में सौर ऊर्जा चालित सिंचाई योजना किसी वरदान से कम नहीं है।योजना के अंतर्गत एक से 10 हॉर्स पावर तक के सौर पम्प स्थापित करना प्रस्तावित है।

प्रदेश सरकार द्वारा इस योजना के अंतर्गत अगले पांच वर्षों में 5,850 कृषि सौर पम्प सेट किसानों को उपलब्ध करवाने का लक्ष्य रखा गया है जिस पर 200 करोड़ रुपए व्यय होने का अनुमान है। इस वर्ष योजना के लिए 30  करोड़ रुपए का बजट प्रावधान किया गया है।

इस योजना के अंतर्गत प्रदेश में सौर पंपों से सिंचाई के लिए जल उठाने के अंतर्गत आवश्यक अधोसंरचना स्थापित करना प्रस्तावित है। योजना के अंतर्गत सौर सिंचाई पम्पों से सिंचाई हेतु लघु एवं सीमांत वर्ग के किसानों को व्यक्तिगत रूप से पम्पिंग मशीनरी लगाने के लिए 90 प्रतिशत की सहायता का प्रावधान है।

मध्यम व बड़े वर्ग के किसानों को व्यक्तिगत स्तर पर पम्पिंग मशीनरी लगाने के लिए 80 प्रतिशत सहायता का प्रावधान इसमें किया गया है। इसके अतिरिक्त सामुदायिक स्तर पर (कम से कम पांच किसानों के समूह) पम्पिंग मशीनरी लगाने पर सभी वर्ग के किसानों के लिए शत-प्रतिशत व्यय सरकार द्वारा वहन करने का भी प्रावधान है।

विकट भौगोलिक परिस्थितियों वाले हमारे प्रदेश में कई गांव ऐसे हैं जहां उपजाऊ भूमि तो पर्याप्त है, मगर सिंचाई की सुनिश्चित व्यवस्था नहीं है और इक्का-दुक्का मकान एक-दूसरे से काफी दूरी पर स्थित हैं।

ऐसे गांवों तक निरंतर विद्युत सम्प्रेषण में कई कठिनाईयों का सामना करना पड़ता है और इन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा चालित सिंचाई योजना कृषि विकास के लिए निःसंदेह प्रभावी साबित हो सकेगी।

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