हत्या के दोषी को आजीवन कारावास व 10 हजार का अर्थदंड

त्रिलोकपुर में लड़की को धक्का देकर उतारा था मौत के घाट

HNN News/ नाहन

जिला एवं सत्र न्यायाधीश सिरमौर देविंदर कुमार सिंह की अदालत ने हत्या के एक मामले में आरोपी को दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना न देने की सूरत में दोषी को 6 मास का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। अदालत में मामले की पैरवी करते हुए जिला न्यायवादी ने बताया कि

त्रिलोकपुर में हुई हत्या के मामले में अदालत ने दोषी रितेश कुमार पुत्र राजेन्द्र प्रसाद निवासी इस्माइलपुरा, नांगरमाऊ जिला उन्नार यूपी को आईपीसी की धारा 302 के तहत ये सजा सुनाई। जिला न्यायवादी ने बताया कि मामला 20 जनवरी 2016 का है। ग्राम पंचायत त्रिलोकपुुर केे तत्कालीन प्रधान वीरेंद्र सिंह ने पुलिस थाना कालाअंब में टेलीफोन पर ललिता देवी मंदिर त्रिलोकपुर के पास जंगल में एक लड़की का शव मिलने की सूचना दी थी।

मौके पर पहुंची कालाअंब पुलिस ने देखा कि माता ललिता देवी मंदिर के पास जंगल में एक लड़की का शव शॉल से ढका था। घटनास्थल और शव के निरीक्षण पर पाया कि मृतक लड़की के गले और गर्दन पर निशान पाए गए। छानबीन के दौरान मंदिर के पास प्रसाद बेचने वाले शिकायतकर्ता रिंकू राम ने रिपोर्ट दर्ज कराई कि लड़का और लड़की दोनों प्रसाद लेने के बाद मंदिर गए थे।

इनमे लड़के की उम्र 26-27 और लड़की की 24 साल के करीब थी। कुछ समय बाद दोनों मंदिर से लौट आए थे, लेकिन कुछ समय जब वह शिव मंदिर के पास जंगल में घास काटने गया तो रास्ते के किनारे लड़का और लड़की बैठे मिले। कुछ समय लड़के ने लड़की को ढांक से नीचे धकेल दिया। ये देखते ही रिंकू राम ने मंदिर के चौकीदार को बुलाने की कोशिश की, लेकिन मन्दिर में स्पीकर की आवाज के कारण वह आवाज न सुन पाया।

ढांक से गिराने के बाद लड़की चिल्ला रही थी और उसके बाद आरोपी ने लड़की को मारने के लिए पत्थर उठाया, लेकिन उसके शोर को सुनकर आरोपी ने उसे फेंक दिया। तब रिंकूराम मंदिर गए और चौकीदार करम चंद को घटना बताई। जब वह 1.30 बजे वे पाया कि जो लड़की शॉल से ढकी हुई थी, वह मर चुकी थी। करमचंद ने प्रधान वीरेंद्र परमार को टेलीफोन पर इसकी जानकारी दी।

मामले की जांच एएसआई जयदेव ने की। तफ़्तीश पूरी होने पर अदालत में चालान पेश किया गया। जिला एवं न्यायाधीश नाहन में सिरमौर इस मामले में अभियोजन पक्ष ने 19 गवाहों की सुनवाई की और दलीलें सुनने के बाद दोषी को ये सजा सुनाई।