हिमाचल पुलिस भर्ती मामला/ अत्याधुनिक उपकरणों से लैस चार जैकेट बरामद, बनियान में इन्सर्ट की गई थी चिप

HNN News/ कांगड़ा

कांगड़ा पुलिस ने हरियाणा नंबर की स्विफ्ट डिजायर गाड़ी से नकल के लिए अत्याधुनिक उपकरणों से लैस चार जैकेट भी पकड़ी हैं। पुलिस जांच में सामने आया है कि अन्य अभ्यिर्थियों को भी जाल में फंसाने के लिए गिरोह अतिरिक्त जैकेट लेकर आया था।

लेकिन गिरोह के हत्थे कोई भी अभ्यर्थी नहीं चढ़ा और जैकेट गाड़ी में रह गईं। इसी बीच पुलिस को यह गाड़ी नजर में आ गई और इसमें सवार आरोपियों को दबोच लिया गया।

सूत्रों के अनुसार इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के साथ पकड़े गए अभ्यर्थी ने नकल करने के लिए कान में ईयरबड डाली थी जबकि बनियान में स्मार्ट चिप को पूरी तरह से सिल दिया था। यह अभ्यर्थी परीक्षा हाल में बैठ गया और प्रश्नों के उत्तर जानने के लिए धीमी आवाज में बात कर रहा था।

इस दौरान परीक्षा संचालकों को शक हुआ, जिस पर इसकी तलाशी ली गई और पूरा मामला खुल गया। एसपी विमुक्त रंजन ने बताया कि पुलिस ने हरियाणा नंबर की स्विफ्ट डिजायर गाड़ी को भर्ती स्थल से पकड़ा है। आरोपियों को 16 तक रिमांड पर भेजा गया है।

दोबारा परीक्षा में नहीं ली जाएगी अतिरिक्त फीस
मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने कहा कि पुलिस विभाग को निर्देश दिए गए हैं कि वे प्रतियोगी परीक्षा के लिए अपनाई जाने वाली बेहतर प्रणाली का प्रयोग करें। इसी आधार पर पुलिस भर्ती के लिए दोबारा लिखित परीक्षा का आयोजन करें। इसके लिए उम्मीदवारों को कोई अतिरिक्त फीस नहीं देनी होगी।

दूसरी भर्तियों तक भी पहुंच सकती है जांच
पुलिस को शुरूआती जांच में जिस तरह के साक्ष्य मिले हैं उससे साफ है कि गड़बड़ी करने वाले मुख्य आरोपी ने पहली बार किसी परीक्षा में सॉल्वर की व्यवस्था या नकल नहीं कराई है। चूंकि पिछले कुछ सालों में वह अमीर बन गया है।

ऐसे में पिछले समय में हुई विभिन्न विभागों की लिखित परीक्षाओं में भी गड़बड़ी कराने में उसका हाथ होने से इंकार नहीं किया जा सकता। फिलहाल पुलिस का पूरा फोकस उस मुख्य आरोपी को पकड़ने में है, जिसने परीक्षार्थियों से संपर्क साधा और उनसे पैसा लेकर नकल कराने के लिए हरियाणा और यूपी से लोगों को बुलवाया।

शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि मुख्य आरोपी बिक्रम ने पिछले दो तीन सालों में काफी संपत्ति अर्जित की है। ऐसे में अचानक इस संपत्ति की बढ़ोतरी ने पुलिस के कान खड़े कर दिए हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार पकड़े गए आरोपियों से इस बात की भी पूछताछ की जा रही है कि इस परीक्षा के अलावा वह किस किस और परीक्षा में बैठे थे।

चूंकि इन फर्जी परीक्षार्थियों का संपर्क बिक्रम से ही रहता था, इसलिए माना जा रहा है कि इस मामले में अभी कई और लोगों को पुलिस गिरफ्तार कर सकती है और उसके बाद ही पुलिस पूरी कहानी को खोल पाएगी।

नाम न लिखने की शर्त पर एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस की भर्ती के दौरान तलाशी और सख्ती के बाद कैमरा डिवाइस और ईयर डिवाइस लेकर डमी कैंडिटेड बैठ रहे हैं तो अन्य विभागों की परीक्षाओं में तो सिर्फ एडमिट कार्ड की मदद से कैंडिडेट सीधे परीक्षा हाल तक पहुंच जाते हैं।

जाहिर है कि आधुनिक उपकरणों की मदद से उन परीक्षाओं में भी नकल हुई हो और इसकी भनक ही न लगी हो। अधिकारी ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद कई बड़ी जानकारियां सामने आ सकती हैं।