हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय की तानाशाही नीतियों के खिलाफ विद्यार्थी परिषद जारी रखेगी अपना आंदोलन

HNN/ शिमला

अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय इकाई अध्यक्ष ने प्रेस वार्ता को सम्बोधित करते हुए कहा कि हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय छात्रों की आवाज को दबाते हुए तानाशाही पर उतर आया है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय ने पहले पीजी प्रवेश परीक्षा के नाम पर 1.5 करोड़ छात्रों से वसूल किए और अब मेरिट आधारित दाखिले कर रहा है। अपने दफ्तर में तो कुलपति महोदय पांच लोगों से अधिक छात्र नहीं आने देते तो अभाविप ने उनके दफ्तर के बाहर ही उनसे मिलकर कुछ सवाल करने चाहे लेकिन तानशाही दिखाते हुए कुलपति महोदय 2 घण्टे तक गाड़ी में बैठे रहे।

इसके बाद मजबूरन विद्यार्थी परिषद शांतिपूर्वक नारेबाजी करती है। इसके बाद पुलिस प्रशासन का गलत इस्तेमाल विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा होता है वो पुलिस जो जनता की सुरक्षा हेतु काम करती है उसे छात्रों के विरुद्ध इस्तेमाल किया जाता है। क्यूआरटी की एक गाड़ी विश्वविद्यालय आती है और छात्रों को रगड़ कर किनारे किया जाता है। छात्रों के खिलाफ पुलिस बल का इस्तेमाल करती है जिसमें कुछ को चोटें भी आई हैं। सारा दिन नारेबाजी करने के बावजूद भी कुलपति महोदय बातचीत नहीं करते यह तानाशाही नहीं तो क्या है।

अभाविप का स्पष्ट रुख है कि पीजी दाखिलों में प्रवेश परीक्षा होनी चाहिए , अनेकों ऐसे छात्र हैं जो सह पाठ्यक्रम गतिविधियों में भाग लेते हैं चाहे वो कला हो या खेल का क्षेत्र या अन्य गतिविधियां। ऐसे छात्र कक्षा में कम मौजूद होने की वजह से असेसमेंट में कम अंक अर्जित करते हैं। जिससे उनके कुल अंक व ग्रेड भी अन्य छात्रों से कम बनता है, तो वहीं अनेकों ऐसे छात्र भी हैं जो दिन भर दिहाड़ी लगाकर अपनी पढ़ाई का खर्चा देते हैं और रात में पढ़ाई करते हैं लेकिन असेसमेंट उनकी भी कम होती है।

ऐसे में मेरिट आधारित दाखिले व्यवहारिक नहीं हैं और हजारों छात्र बिना प्रतिस्पर्धा के ही दाखिले की दौड़ से बाहर हो गए हैं। तो वहीं परीक्षा परिणामों की बात करें तो अभी विश्वविद्यालय ने सिर्फ यूजी छटे सेमेस्टर का आधा अधूरा परिणाम घोषित किया है, रिअपीयर के कोई भी परिणाम घोषित नहीं हुए हैं तो साथ ही साथ बीबीए , बीसीए जैसे कोर्सेज में तो छटे सत्र का भी परिणाम घोषित नहीं हुआ है। वहीं ऐसे भी छात्र हैं जो कोरोना महामारी के चलते अपनी परीक्षा नहीं दे पाए और विश्वविद्यालय प्रशासन पीजी दाखिले करने जा रहा है और वो भी मेरिट आधार पर।

यह हजारों छात्रों के साथ छल है, धोखा है, खिलवाड़ है। विशाल ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन इसी तरह अपनी तानाशाही पर अड़ा रहा तो अपने आंदोलन को अभाविप आने वाले दिनों में और उग्र करेगी। ज्ञात हो एक ही दिन के आंदोलन में विश्वविद्यालय को एक छावनी में तब्दील कर दिया गया था। दो दो क्यूआरटी की बसें भर भर कर विश्वविद्यालय पहुंचती हैं और जो छात्र अपनी मांगों को उठा रहे थे और कुलपति से बात करना चाह रहे उनके खिलाफ पुलिस बल का प्रयोग करती है।

लेटेस्ट न्यूज़ एवम अपडेट्स अपने व्हाटसऐप पर पाने के लिए हमारी व्हाटसऐप बुलेटिन सर्विस को सब्सक्राइब करें। सब्सक्राइब करने के लिए क्लिक करें।

वीडियो