आर्थिक सशक्तिकरण के लिए एनआरएलएम के तहत बकरी पालन को बढ़ावा, प्रशिक्षणार्थियों को मिली व्यावहारिक जानकारी
कृषि विज्ञान केंद्र ऊना द्वारा बकरी पालन पर चार दिवसीय प्रशिक्षण शिविर का आयोजन किया गया, जिसमें जिले के 20 पशुपालकों ने भाग लिया। यह शिविर बकरी पालन को एक व्यवसायिक उद्यम के रूप में बढ़ावा देने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। पशुपालन विभाग के विशेष सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में प्रतिभागियों को बकरी पालन के तकनीकी और व्यवहारिक पहलुओं पर गहन जानकारी प्रदान की गई।
सरकार का समर्थन :
केंद्र की समन्वयक डॉ. योगिता शर्मा ने बताया कि राज्य सरकार बकरी पालन को प्रोत्साहित करने के लिए एनआरएलएम परियोजना के तहत 25 से 33 प्रतिशत तक अनुदान प्रदान कर रही है। उन्होंने किसानों, महिलाओं और युवाओं से अपील की कि वे बकरी पालन को अपनाकर अपनी आर्थिक स्थिति को मजबूत करें।
प्रशिक्षण का विवरण:
- पहला सत्र : पशुपालन विभाग के उपनिदेशक डॉ. विनय शर्मा ने विभाग द्वारा चलाई जा रही योजनाओं की जानकारी दी और पशुपालकों को इनका लाभ उठाने के लिए प्रेरित किया।
- तकनीकी सत्र : पशु पालन विशेषज्ञ डॉ. दीपाली कपूर ने संतुलित आहार, हरा चारा उत्पादन, अजोला उगाने की तकनीक, और सूखे चारे के पोषक तत्वों की वृद्धि पर प्रशिक्षण दिया।
- व्यावहारिक प्रशिक्षण : कठोह स्थित अजय जसवाल के बकरी फार्म का भ्रमण करवाया गया, जहां डॉ. अभिनव राणा ने बकरी पालन की व्यावहारिक जानकारी दी।
- अन्य विशेषज्ञों का योगदान : डॉ. राधिका ने जिला ऊना के लिए उपयुक्त बकरियों की नस्लों और प्रजनन प्रबंधन पर चर्चा की, जबकि डॉ. अंकुश ने बकरियों के प्रमुख रोगों और उनसे बचाव पर जानकारी दी।
प्रशिक्षणार्थियों की प्रतिक्रिया:
बकरी पालन में शामिल संजीव, पवन और बांगाणा के राजकुमार ने कहा कि शिविर से उन्हें न केवल तकनीकी जानकारी मिली, बल्कि बकरी पालन में उठाए जाने वाले उचित कदमों के बारे में भी गहराई से समझने का मौका मिला।
समापन समारोह:
शिविर के समापन पर उपनिदेशक पशुपालन विभाग डॉ. विनय शर्मा ने सभी प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र प्रदान किए और कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा बकरी पालन पर प्रकाशित पुस्तिका की प्रति भी वितरित की।
यह शिविर बकरी पालन को उन्नत तकनीकों और जागरूकता के माध्यम से बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम साबित हुआ।

