हिमाचल प्रदेश फसल विविधिकरण प्रोत्साहन परियोजना (जायका) चरण-दो के अंतर्गत खंड परियोजना प्रबंधन इकाई ऊना द्वारा डठवाड़ा-बरेडा में एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला की अध्यक्षता डॉ. गुलशन मनकोटिया ने की, जिन्होंने किसानों को सिंचाई के सिद्धांतों और जल प्रबंधन की उपयोगी विधियों के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
ऊना/वीरेंद्र बन्याल।
डॉ. मनकोटिया ने किसानों को जल उपयोग दक्षता बढ़ाने, सूक्ष्म सिंचाई प्रणाली (ड्रिप एवं स्प्रिंकलर), वर्षा जल संचयन और फसल अनुसार जल आवश्यकता निर्धारण की वैज्ञानिक जानकारी दी। उन्होंने रसोई वाटिका के महत्व पर जोर देते हुए किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रेरित किया ताकि हर परिवार को ताज़ी और पौष्टिक सब्जियां घर पर ही मिल सकें।
वैज्ञानिक तकनीक से उत्पादन और भूजल संरक्षण
कृषि विशेषज्ञ रशम सूद ने बताया कि जल प्रबंधन की वैज्ञानिक तकनीकें अपनाने से कृषि उत्पादन में वृद्धि के साथ-साथ भूजल संरक्षण भी संभव है। किसानों को रबी सीजन की सब्जियों के बीज वितरित किए गए और उन्हें खेती की आधुनिक तकनीकें एवं पोषण प्रबंधन के तरीके सिखाए गए।
किसानों की भागीदारी और आभार
कार्यशाला में बड़ी संख्या में ग्रामीण किसानों और महिलाओं ने भाग लिया। कृषक विकास संघ के प्रधान जीत सिंह सहित उपस्थित किसानों ने सिंचाई, जल प्रबंधन और जैविक कृषि की महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने के लिए जायका परियोजना टीम का आभार व्यक्त किया।

