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1138 करोड़ के इटली वाले एप्पल प्रोजेक्ट पर विजिलेंस की नजर

बागवानी मिशन के तहत वर्ल्ड बैंक की वित्तीय मदद से आयात किए गए थे सेब के पौधे.. पौधों से आए क्रांतिकारी बदलाव मगर अब…… सच यह भी है जिसे विजिलेंस को भी मानना होगा

HNN News शिमला नाहन

देश में हिमाचल प्रदेश को फलों की टोकरी भी कहा जाता है। इस उपमा को चरितार्थ करने के लिए पूर्व व वर्तमान सरकार दोनों ने सराहनीय कदमों के साथ अच्छे प्रयास भी किए हैं।

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फलों की टोकरी कहलाने वाले प्रदेश की लो बैल्ट बागवानी से मैहरूम चल रही थी। इस लो बैल्ट में उचित दोहन के उद्देश्य से बागवानी मिशन को सफल बनाने के लिए इटली के सेब की विशेष वैरायटी को प्रदेश के वैज्ञानिकों ने चुना था।

अब हुआ यूं कि क्रांतिकारी प्रभाव देने वाली इस इटली के सेब की पौध पर एक बड़ा अपशकुन भी बैठ गया है। यह सेब के पौधे जहां जनवरी-फरवरी में आने चाहिए थे यह उस दौरान ना लाकर बल्कि अप्रैल-मई में लाए गए। यह प्लांटेशन सीजन नहीं था।

जबकि इस पौधे के रोपण का समय सर्दियों में यानी जनवरी-फरवरी में होता है। लेट लाए जाने के कारण आयातित पौधा 25 फ़ीसदी के आसपास सूख गया। यहां यह बात भी साफ कर देनी जरूरी है कि इटली से यह पौधे बिल्कुल स्वस्थ लाए गए थे मगर यहां उचित प्रबंधन ना होने के कारण और समय पर इनका डिस्ट्रीब्यूशन ना होने के चलते करीब 25 फ़ीसदी पौधे सूख गए।

इसका खामियाजा वहां से आयात पर लगाया जा रहा है। जबकि सच्चाई कुछ और थी। यही नहीं विदेश से आयात करने की प्रक्रिया में भी भारी कोताही बरती गई। जिन अधिकारियों को और वैज्ञानिकों को इटली जाकर स्वस्थ पौधे लेकर आने थे उसकी जगह विदेशी व्यक्ति को ही विदेश भेजकर यह पौधे आयात किए गए।

यह घटनाक्रम एचएनएन पहले भी प्रकाशित कर चुका है। इसके पीछे सबसे बड़ी वजह उस दौरान एक विभाग में दो उच्च पदस्थ अधिकारियों की आपसी लड़ाई रही थी। इस लड़ाई के चलते जल्दबाजी में गलत समय पर पौधे मंगाए गए जो कि यहां पहुंचने के बाद उचित समय पर रोपण ना होने के कारण सूख गए।

अब यहां यह भी बताना जरूरी है कि पूर्व सरकार के समय में वर्ष 2017 के दौरान इस पौधे की कीमत ₹300 रखी गई थी। मगर मौजूदा जयराम सरकार ने किस पौधे से जबरदस्त पैदावार और लो बेल्ट में मात्र 3 साल के अंदर बंपर फसल देने वाले इस सेब के पौधे के महत्व को समझते हुए इसकी कीमत 300 से घटाकर ₹200 प्रति पैदा कर दी है।

आप यह भी जानकर हैरान हो जाएंगे की किसानों का क्लस्टर सिस्टम बनाकर जिन्होंने इन सेब के पौधों को लगाया है उनके बगीचों में जबरदस्त फसल भी तैयार हुई है।

इसके पॉजिटिव रिजल्ट आने के बाद किसानों में लगातार इसकी मांग भी बढ़ रही है। जिला सिरमौर हॉर्टिकल्चर विभाग के द्वारा बाघ थन में बड़े स्तर पर इसकी पौध तैयार की जा चुकी है। प्रदेश में इस इटली से मंगाए गए सेब के पौधे की करीब 10 किस्में कुल्लू के बिजोरा पालमपुर नौनी यूनिवर्सिटी में लगाई जा चुकी हैं। यहां पर इनकी बड़ी अच्छी नर्सरिया भी तैयार हो चुकी हैं।

मगर अब इस इटली के सेब की पौध के आयात पर बरती गई कोताही को लेकर एक बड़े घोटाले की आशंका जताई जा रही है। तो वही बागवानी मंत्री महेंद्र सिंह ने बी इसकी जांच विजिलेंस से करवाने की बात कह दी है। मगर यह भी तय है कि आपसी लड़ाई के बाद विवादों में आए इस प्रोजेक्ट पर घोटाला तो भले हुआ हो या नहीं मगर कोताही तो बरती ही गई है। जिसके कारण तीन लाख सेब के पौधों में से करीब 25 फ़ीसदी पौधे सूख गए थे।

अब देखना यह होगा कि विजिलेंस किस एंगल को ध्यान में रखते हुए जांच आगे बढ़ाएगी।

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