Author: हिमाचलनाउ डेस्क

  • रावी नदी को बचाने की पुकार, गंदगी की मार झेल रही रावी नदी! अगर अब नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी!

    रावी नदी को बचाने की पुकार, गंदगी की मार झेल रही रावी नदी! अगर अब नहीं जागे, तो कल बहुत देर हो जाएगी!

    चंबा, हिमाचल प्रदेश – ऐतिहासिक चंबा शहर की जीवनरेखा रावी नदी इन दिनों गंदगी और प्रदूषण के संकट से जूझ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ सफाई ठेकेदार और नागरिक रात के अंधेरे में नदी किनारे कूड़ा-कचरा डाल जाते हैं, जो धीरे-धीरे बहकर नदी में समा जाता है। यह न केवल पर्यावरण और जैव विविधता के लिए खतरनाक है, बल्कि स्थानीय निवासियों के स्वास्थ्य पर भी प्रतिकूल प्रभाव डाल सकता है।

    क्या कहते हैं चंबा के लोग?

    रावी नदी की स्वच्छता को लेकर शहरवासियों में गहरी चिंता है। कई नागरिकों ने नगर परिषद से मांग की है कि कूड़ा निस्तारण के लिए उचित इंतजाम किए जाएं और नियम तोड़ने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

    “हमारी रावी नदी सिर्फ एक जल स्रोत नहीं, बल्कि हमारी संस्कृति और परंपरा की पहचान है। अगर इसे ऐसे ही गंदा किया जाता रहा तो आने वाली पीढ़ियों को हम क्या देंगे?” – एक स्थानीय निवासी

    नगर परिषद की प्रतिक्रिया

    नगर परिषद चंबा के कार्यकारी अधिकारी संजय कुमार ने इस मुद्दे पर गंभीर रुख अपनाते हुए कहा कि जल्द ही सफाई ठेकेदारों और कर्मचारियों की बैठक बुलाई जाएगी।

    “हम सफाई कर्मियों को स्पष्ट निर्देश देंगे कि नदी के किनारे किसी भी तरह का कूड़ा न फेंका जाए। इसके अलावा, जो भी नियमों का उल्लंघन करेगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।” – संजय कुमार, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद चंबा

    उन्होंने यह भी बताया कि शहर में बिखरे कचरे को हटाने के लिए एक विशेष मुहिम चलाई जाएगी। सफाई सेवकों को सुबह वार्डों में सफाई करने और दिन में हॉटस्पॉट्स से कचरा हटाने की जिम्मेदारी दी जाएगी।

    रावी नदी का महत्व: सिर्फ पानी नहीं, जीवन है

    रावी नदी सिर्फ एक जल स्रोत नहीं है, यह चंबा की सांस्कृतिक धरोहर भी है। गद्दी समुदाय और अन्य स्थानीय निवासियों की आजीविका इस नदी पर निर्भर करती है। यदि समय रहते इस प्रदूषण को नहीं रोका गया, तो नदी का जलस्तर और उसकी गुणवत्ता दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

    विशेषज्ञों का मानना है कि नदी में फेंका गया प्लास्टिक और अन्य अपशिष्ट पदार्थ जलीय जीवों और मिट्टी की उर्वरता को नुकसान पहुंचाते हैं। यदि यही स्थिति बनी रही, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और गंभीर हो सकती है।

    हम क्या कर सकते हैं?

    • नदी किनारे कूड़ा फेंकने वालों को रोकें और प्रशासन को इसकी सूचना दें।
    • कचरा प्रबंधन के लिए सरकार और नगर परिषद की योजनाओं में सहयोग करें।
    • प्लास्टिक और अन्य गैर-बायोडिग्रेडेबल कचरे का उपयोग कम करें।
    • स्थानीय संगठनों द्वारा चलाई जा रही सफाई मुहिम में भाग लें।

    आखिरी सवाल – क्या हम अपनी रावी को बचा पाएंगे?

    अब यह हम सभी पर निर्भर करता है कि हम अपनी नदियों को स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त रखने के लिए कितने जागरूक हैं। क्या हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रहेंगे, या फिर अपनी चंबा की खूबसूरती और पर्यावरण को बचाने के लिए कदम उठाएंगे?


    यह सिर्फ एक खबर नहीं, बल्कि एक अपील है – रावी नदी को बचाने के लिए। 🌿💙

  • जरूरी खबर / बिना ई-केवाईसी नहीं मिलेगा जल बिल, इन लोगों को मिलेगा खास फायदा

    जरूरी खबर / बिना ई-केवाईसी नहीं मिलेगा जल बिल, इन लोगों को मिलेगा खास फायदा

    मुख्य बिंदु:

    • ई-केवाईसी पूरी करने के बाद ही उपभोक्ताओं को पेयजल कनेक्शन बिल जारी होंगे।
    • जलशक्ति विभाग, हमीरपुर ने ई-केवाईसी प्रक्रिया अनिवार्य की।
    • विधवा महिलाओं, एकल नारियों, अनाथ और दिव्यांग उपभोक्ताओं को निशुल्क जल आपूर्ति।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में 50,000 रुपये से कम आय वाले उपभोक्ताओं को आधे दर पर बिल।
    • उपभोक्ता आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ नजदीकी जलशक्ति कार्यालय में केवाईसी करवा सकते हैं।

    हमीरपुर में जलशक्ति विभाग ने शुरू की ई-केवाईसी प्रक्रिया

    हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर जिले में जलशक्ति विभाग ने पेयजल कनेक्शन धारकों की ई-केवाईसी (e-KYC) प्रक्रिया शुरू कर दी है। विभाग ने साफ कर दिया है कि बिना ई-केवाईसी के उपभोक्ताओं को जल बिल जारी नहीं किया जाएगा।

    ई-केवाईसी क्यों जरूरी है?

    जलशक्ति विभाग के अधिशासी अभियंता, हमीरपुर, राजेश तिमान ने बताया कि पेयजल उपभोक्ताओं के रिकॉर्ड को अपडेट करने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए ई-केवाईसी को अनिवार्य किया गया है।

    ई-केवाईसी कैसे करें? (Step-by-Step Process)

    1. उपभोक्ता को आधार कार्ड और मोबाइल नंबर के साथ निकटतम जलशक्ति विभाग कार्यालय में जाना होगा।
    2. पंचायत स्तर पर जरूरी दस्तावेज जमा करवाने होंगे।
    3. उपभोक्ताओं को फील्ड कर्मचारियों या जलशक्ति विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने की सलाह दी गई है।
    4. ई-केवाईसी प्रक्रिया पूरी होने के बाद जल बिल जारी किया जाएगा।

    इन उपभोक्ताओं को मिलेगी विशेष राहत

    राज्य सरकार ने विशेष श्रेणी के उपभोक्ताओं को पेयजल शुल्क में छूट देने की घोषणा की है:

    • विधवा महिलाएं, एकल नारियां, अनाथ और दिव्यांग उपभोक्ताओं को निःशुल्क जल आपूर्ति।
    • ग्रामीण क्षेत्रों में सालाना 50,000 रुपये से कम आय वाले उपभोक्ताओं को आधे दर पर जल बिल।

    जल्द करें ई-केवाईसी, अन्यथा हो सकता है कनेक्शन प्रभावित

    सरकार ने स्पष्ट किया है कि ई-केवाईसी नहीं कराने पर उपभोक्ताओं को जल बिल नहीं मिलेगा, और भविष्य में उनका कनेक्शन भी प्रभावित हो सकता है।

    अधिक जानकारी के लिए अपने निकटतम जलशक्ति विभाग कार्यालय से संपर्क करें।

  • शूलिनी विश्वविद्यालय नवाचार और अनुसंधान में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है – केवल सिंह पठानिया

    शूलिनी विश्वविद्यालय नवाचार और अनुसंधान में उत्कृष्ट कार्य कर रहा है – केवल सिंह पठानिया

    प्रदेश के उप मुख्य सचेतक एवं शाहपुर के विधायक केवल सिंह पठानिया ने कहा कि शूलिनी विश्वविद्यालय देश के निजी विश्वविद्यालयों में बेहतरीन कार्य कर रहा है और इसे नवाचार और अनुसंधान के लिए जाना जाता है।

    शासी निकाय की 33वीं बैठक में रखे गए विचार

    केवल सिंह पठानिया शूलिनी विश्वविद्यालय की शासी निकाय की 33वीं बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय उच्चतम स्तर पर ज्ञानार्जन का श्रेष्ठतम संस्थान है और इससे अनुसंधान के क्षेत्र में अनेक आशाएं हैं।

    उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू के नेतृत्व में प्रदेश सरकार शिक्षा क्षेत्र में सकारात्मक परिवर्तन कर रही है। इसके तहत कमजोर वर्गों के प्रतिभावान छात्रों को शिक्षा एवं रोजगार में मदद दी जा रही है।

    मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना पर विशेष जोर

    केवल सिंह पठानिया ने बैठक में मुख्यमंत्री सुखाश्रय योजना की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि:

    • सरकार निराश्रित बच्चों के पालन-पोषण के लिए प्रतिबद्ध है।
    • 6000 से अधिक बच्चे इस योजना से लाभान्वित हो चुके हैं।
    • सरकार ने कानून बनाकर इन बच्चों को “चिल्ड्रन ऑफ स्टेट” का दर्जा दिया है।
    • उनकी शिक्षा और अन्य खर्चे प्रदेश सरकार द्वारा वहन किए जा रहे हैं।

    शूलिनी विश्वविद्यालय की सराहना

    बैठक में कसौली के विधायक विनोद सुल्तानपुरी ने भी अपने बहुमूल्य सुझाव दिए।
    शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. पी.के. खोसला ने मुख्य अतिथि का स्वागत करते हुए विश्वविद्यालय की उपलब्धियों और अनुसंधान कार्यों की जानकारी दी।

    देवदार का पौधारोपण

    बैठक के उपरांत केवल सिंह पठानिया और विनोद सुल्तानपुरी ने शूलिनी विश्वविद्यालय के प्रांगण में देवदार का पौधा रोपित किया।

    बैठक में उपस्थित गणमान्य व्यक्ति

    इस अवसर पर शूलिनी विश्वविद्यालय के कुलसचिव डॉ. सुनील पुरी, विशाल आनंद, एस.डी. मेहता, डॉ. आशु खोसला, सतीश आनंद सहित अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे।

  • ददाहू में 5 फरवरी को आयोजित होने वाला परिवार नियोजन शिविर रद्द, अब 25 फरवरी को होगा आयोजन

    ददाहू में 5 फरवरी को आयोजित होने वाला परिवार नियोजन शिविर रद्द, अब 25 फरवरी को होगा आयोजन

    नाहन, 4 फरवरी – सिविल अस्पताल ददाहू में 5 फरवरी को आयोजित होने वाला परिवार नियोजन शिविर रद्द कर दिया गया है। मुख्य चिकित्सा अधिकारी (CMO) सिरमौर डॉ. अजय पाठक ने यह जानकारी दी।

    कम पंजीकरण बना कारण

    सिविल अस्पताल ददाहू के एसएमओ प्रभारी और एचएफडब्ल्यू एमसीएच ददाहू के साथ टेलीफोन पर हुई बातचीत में यह निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि शिविर के लिए केवल 4 लाभार्थियों ने पंजीकरण कराया, जिसे देखते हुए शिविर को रद्द करने का निर्णय लिया गया।

    अब 25 फरवरी को होगा शिविर

    नया शिविर आयोजन: 25 फरवरी 2025
    लाभार्थियों को आशा कार्यकर्ताओं द्वारा सूचित किया जाएगा
    इच्छुक लोग अब 25 फरवरी के शिविर के लिए पंजीकरण कर सकते हैं

    निष्कर्ष

    इस निर्णय से बेहतर भागीदारी और अधिक लोगों को लाभ पहुंचाने की कोशिश की जाएगी। परिवार नियोजन सेवाओं को लेकर जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है, ताकि अधिक लोग इस सुविधा का लाभ उठा सकें।

  • मोगीनंद स्कूल में लैंगिक समानता शिविर का आयोजन, 120 छात्र-छात्राओं ने लिया भाग

    मोगीनंद स्कूल में लैंगिक समानता शिविर का आयोजन, 120 छात्र-छात्राओं ने लिया भाग

    नाहन, 4 फरवरी – बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना के तहत वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला मोगीनंद में लैंगिक समानता शिविर का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 120 छात्र-छात्राओं ने भाग लिया।

    वाद-विवाद प्रतियोगिता में दिखी छात्रों की प्रतिभा

    कार्यक्रम के दौरान लैंगिक समानता पर वाद-विवाद प्रतियोगिता का आयोजन भी किया गया, जिसमें तीन छात्र-छात्राओं को पुरस्कार प्रदान किए गए:
    🏆 प्रथम स्थान – समीर
    🥈 द्वितीय स्थान – अचला
    🥉 तृतीय स्थान – नम्रता

    कार्यक्रम का उद्देश्य

    बाल विकास परियोजना अधिकारी ईशाक मोहम्मद ने बताया कि इस शिविर का मुख्य उद्देश्य:
    शिशु लिंग अनुपात में सुधार
    लैंगिक समानता को बढ़ावा
    लड़कियों को सशक्त बनाना

    सरकारी योजनाओं की दी गई जानकारी

    शिविर में कुमारी कृतिका (समन्वयक) ने छात्रों को बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ योजना, मुख्यमंत्री कन्यादान योजना, मुख्यमंत्री शगुन योजना, इंदिरा गांधी सुख शिक्षा योजना और अन्य सरकारी योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी।

    इसके अलावा, जिला बाल संरक्षण इकाई, नाहन की प्रवीन अख्तर ने बाल संरक्षण अधिनियम, चाइल्ड लाइन, गुड टच-बैड टच जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दीं।

    स्कूल प्रशासन की भूमिका

    शिविर में प्रधानाचार्य शिवा खन्ना, कुमारी सोनम, सरिता राणा, दया देवी, और अंजू बाला सहित सभी शिक्षक उपस्थित रहे।

    निष्कर्ष

    यह कार्यक्रम न केवल छात्रों में लैंगिक समानता की समझ विकसित करने में सहायक रहा, बल्कि महिला सशक्तिकरण और सामाजिक जागरूकता को भी बढ़ावा देने में सफल रहा।

  • नूरपुर: चौगान बाजार में अतिक्रमण हटाने की कड़ी कार्रवाई, प्रशासन ने जब्त किया सामान

    नूरपुर: चौगान बाजार में अतिक्रमण हटाने की कड़ी कार्रवाई, प्रशासन ने जब्त किया सामान

    हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले के नूरपुर शहर में चौगान बाजार से अतिक्रमण हटाने के लिए प्रशासन ने कड़ी कार्रवाई की है। नगर परिषद नूरपुर की कार्यकारी अधिकारी आशा वर्मा ने बताया कि बाजार में कुछ दुकानदारों द्वारा अतिक्रमण करने की लगातार शिकायतें मिल रही थीं, जिससे यातायात बाधित हो रहा था।

    क्या है मामला?

    🔹 दुकानदारों द्वारा बाजार में अतिक्रमण करने से जाम की समस्या बढ़ रही थी।
    🔹 स्थानीय लोगों की शिकायत पर प्रशासन ने औचक निरीक्षण कर कार्रवाई की।
    🔹 अतिक्रमण करने वाले कारोबारियों का सामान जब्त कर लिया गया।
    🔹 प्रशासन ने दुकानदारों को दुकान के भीतर ही सामान रखने की सख्त हिदायत दी।

    प्रशासन की सख्ती

    नगर परिषद नूरपुर द्वारा पहले भी अतिक्रमण रोकने के लिए रेलिंग लगाई गई थी, लेकिन कई दुकानदारों ने रेलिंग हटा दी और सड़क पर सामान रखना जारी रखा। इसको लेकर प्रशासन ने अब सख्त रुख अपनाते हुए कार्रवाई तेज कर दी है।

    “हमने दुकानदारों से अपील की है कि वे अतिक्रमण न करें। यदि वे नियमों का पालन नहीं करेंगे, तो प्रशासन उनके खिलाफ चालान और कानूनी कार्रवाई करेगा।”आशा वर्मा, कार्यकारी अधिकारी, नगर परिषद नूरपुर

    अगले कदम क्या होंगे?

    प्रशासन पीडब्ल्यूडी और नगर परिषद के सहयोग से विशेष सफाई अभियान चलाएगा।
    अतिक्रमण करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाएगा।
    स्थायी समाधान के लिए बाजार में ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम लागू किया जाएगा।

    निष्कर्ष

    चौगान बाजार में अतिक्रमण हटाने की इस कार्रवाई से स्थानीय निवासियों और दुकानदारों को यातायात जाम और अव्यवस्था से राहत मिलेगी। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यदि भविष्य में दोबारा अतिक्रमण किया गया, तो और सख्त कदम उठाए जाएंगे।

  • SMC अध्यापकों का सरकार को अल्टीमेटम: 21 फरवरी से हड़ताल पर जाएंगे शिक्षक

    SMC अध्यापकों का सरकार को अल्टीमेटम: 21 फरवरी से हड़ताल पर जाएंगे शिक्षक

    हिमाचल प्रदेश में SMC (स्कूल मैनेजमेंट कमेटी) अध्यापकों ने नियमितीकरण की मांग को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। बोर्ड परीक्षाओं से ठीक पहले 21 फरवरी से प्रदेशभर के SMC शिक्षक हड़ताल पर जाने का फैसला कर चुके हैं।

    क्या है मामला?

    SMC अध्यापक संघ के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने शिमला में प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि 7 मार्च 2024 को प्रदेश कैबिनेट ने अध्यापकों के नियमितीकरण की मंजूरी दी थी, लेकिन अब तक इस पर कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है।

    उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री से कई बार मुलाकात के बावजूद कोई समाधान नहीं निकला। सरकार की तरफ से केवल आश्वासन ही दिए जा रहे हैं, लेकिन ज़मीनी स्तर पर कुछ नहीं किया गया।

    क्या है SMC अध्यापकों की मांग?

    कैबिनेट के फैसले को तुरंत लागू किया जाए
    नियमितीकरण प्रक्रिया को जल्द से जल्द पूरा किया जाए
    SMC शिक्षकों को सरकारी शिक्षकों के समान सुविधाएं दी जाएं

    क्या होगा अगर सरकार मांगें नहीं मानती?

    🔴 21 फरवरी से प्रदेशभर में SMC अध्यापक हड़ताल पर चले जाएंगे
    🔴 शिक्षक कक्षाओं का बहिष्कार करेंगे
    🔴 आंदोलन को और बड़ा किया जाएगा

    क्या बोले शिक्षक नेता?

    SMC अध्यापक संघ के अध्यक्ष सुनील शर्मा ने कहा:
    “कैबिनेट से LDR (Limited Direct Recruitment) प्रस्ताव पारित होने के बाद मुख्यमंत्री जी ने खुद 2,421 SMC शिक्षकों को सीमित भर्ती के माध्यम से नियमित करने की बात कही थी। लेकिन अभी तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। अगर जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया, तो शिक्षक सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे।”

    निष्कर्ष

    बोर्ड परीक्षाओं से पहले SMC अध्यापकों की हड़ताल छात्रों की पढ़ाई पर असर डाल सकती है। सरकार अगर समय पर समाधान नहीं निकालती है, तो प्रदेशभर में आंदोलन तेज़ होने की संभावना है। अब देखना यह होगा कि सरकार 21 फरवरी से पहले कोई ठोस कदम उठाती है या नहीं।

  • गिरी पावर हाउस का होगा अपग्रेडेशन, 440 करोड़ की लागत से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

    गिरी पावर हाउस का होगा अपग्रेडेशन, 440 करोड़ की लागत से बढ़ेगी उत्पादन क्षमता

    हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित गिरी पावर हाउस का स्तर उन्नत करने का कार्य जल्द शुरू होने जा रहा है। 440 करोड़ की लागत से इस जल विद्युत परियोजना का आधुनिकीकरण किया जाएगा।

    क्यों किया जा रहा अपग्रेडेशन?

    🔹 गिरी पावर हाउस की मौजूदा मशीनरी काफी पुरानी हो चुकी है
    🔹 मशीनों की ओवरहालिंग और अपग्रेडेशन के लिए 440 करोड़ की योजना तैयार
    🔹 बिजली उत्पादन क्षमता 60 मेगावाट से बढ़कर 66 मेगावाट होगी

    क्या बोले पावर हाउस के अभियंता?

    गिरी पावर हाउस के स्थानिक अभियंता अजय चौधरी ने जानकारी दी कि इस परियोजना के तहत नई मशीनरी स्थापित की जाएगी, जिससे बिजली उत्पादन में बढ़ोतरी होगी।

    “पहले गिरी पावर हाउस में 60 मेगावाट बिजली उत्पादन होता था, जिसे अब 66 मेगावाट तक बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। इस प्रोजेक्ट में 32.1 करोड़ की लागत से हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर सिस्टम अपग्रेड किया जाएगा, जबकि कुल परियोजना की लागत 440 करोड़ होगी।”

    पावर हाउस अपग्रेडेशन के फायदे

    बिजली उत्पादन क्षमता में वृद्धि
    आधुनिक तकनीक से दक्षता में सुधार
    पुरानी मशीनों को बदलकर बेहतर आउटपुट सुनिश्चित किया जाएगा

    निष्कर्ष

    गिरी पावर हाउस का आधुनिकीकरण हिमाचल प्रदेश की जल विद्युत परियोजनाओं को और मजबूत करेगा। इस परियोजना से प्रदेश में बिजली आपूर्ति को और स्थिर करने में मदद मिलेगी। अब देखना होगा कि यह प्रोजेक्ट कितनी जल्दी पूरा किया जाता है और प्रदेश को इससे कितने लाभ मिलते हैं।

  • धर्मशाला में होंगे नेशनल मास्टर गेम्स, 6000 खिलाड़ी 24 खेलों में दिखाएंगे दमखम

    धर्मशाला में होंगे नेशनल मास्टर गेम्स, 6000 खिलाड़ी 24 खेलों में दिखाएंगे दमखम

    हिमाचल प्रदेश का धर्मशाला अप्रैल 2025 में नेशनल मास्टर गेम्स की मेजबानी करेगा। इस प्रतिष्ठित खेल आयोजन में फुटबॉल, वॉलीबॉल समेत 24 खेलों में देशभर के करीब 6000 खिलाड़ी अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करेंगे30 वर्ष से अधिक आयु के खिलाड़ी इस राष्ट्रीय प्रतियोगिता में हिस्सा लेंगे।

    मुख्यमंत्री करेंगे शुभारंभ

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू इस खेल महाकुंभ का उद्घाटन करेंगे। इस आयोजन की घोषणा सुपर मास्टर्स गेम्स एवं स्पोर्ट्स फेडरेशन के निदेशक ऑर्गेनाइजर और प्रदेश मास्टर गेम्स एसोसिएशन के महासचिव तेजस्वी शर्मा ने पत्रकार वार्ता में की।

    इस दौरान सुपर मास्टर्स गेम्स एवं स्पोर्ट्स फेडरेशन के अधिकारी विनोद कुमार ने खेलों के आयोजन की तैयारियों की विस्तृत जानकारी दी और नेशनल मास्टर गेम्स का आधिकारिक पोस्टर भी जारी किया गया

    किन खेलों में होगी प्रतियोगिता?

    इस टूर्नामेंट में 24 अलग-अलग खेलों में प्रतिस्पर्धा होगी, जिनमें प्रमुख रूप से शामिल हैं:
    फुटबॉल
    वॉलीबॉल
    एथलेटिक्स
    बैडमिंटन
    बास्केटबॉल
    टेबल टेनिस
    कबड्डी
    वेटलिफ्टिंग

    अंतरराष्ट्रीय मंच पर भी दिखेगा जलवा

    धर्मशाला में शानदार प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी ताइवान में होने वाले अंतरराष्ट्रीय मास्टर गेम्स में भी भाग लेंगे।

    धर्मशाला को क्यों चुना गया?

    अत्याधुनिक खेल सुविधाएं
    अनुकूल मौसम और शानदार पर्यटन स्थल
    पहले भी कई राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय खेलों की सफल मेजबानी

    निष्कर्ष

    धर्मशाला में नेशनल मास्टर गेम्स खिलाड़ियों और खेल प्रेमियों के लिए एक शानदार आयोजन होगा। हिमाचल प्रदेश में इस तरह के बड़े आयोजन से खेल संस्कृति को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय खिलाड़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी

  • हिमाचल: 18 कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थी, शिक्षा निदेशालय ने बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा

    हिमाचल: 18 कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थी, शिक्षा निदेशालय ने बंद करने का प्रस्ताव सरकार को भेजा


    हिमाचल प्रदेश में छात्रों की घटती संख्या के चलते कई कॉलेजों पर बंद होने का खतरा मंडरा रहा है। राज्य के छह कॉलेजों में 50 से भी कम और 12 कॉलेजों में 100 से कम विद्यार्थी हैं। सरकार के निर्देशों के बाद उच्च शिक्षा निदेशालय ने इन कॉलेजों को बंद करने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है

    अब इस पर अंतिम फैसला राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में लिया जाएगा। इसके अलावा, 150 विद्यार्थियों की संख्या वाले 11 कॉलेजों के भविष्य पर भी विचार किया जा रहा है। यदि यह प्रस्ताव मंजूर होता है, तो इन कॉलेजों को बंद कर दिया जाएगा और छात्रों को नजदीकी संस्थानों में शिफ्ट किया जाएगा।

    छात्रों की घटती संख्या बनी कारण

    शिक्षा विभाग के अधिकारियों के अनुसार, राजधानी शिमला और मुख्यालयों के कॉलेजों में दाखिले बेहतर हो रहे हैं, लेकिन दूरदराज़ के इलाकों में स्थित कॉलेजों में लगातार छात्रों की संख्या घट रही है। ऐसे में सरकार ने गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने के लिए कम छात्रों वाले कॉलेजों को बंद करने का निर्णय लिया है

    कौन-कौन से कॉलेज हो सकते हैं बंद?

    50 से कम विद्यार्थियों वाले कॉलेज:

    • भलेई – 49
    • कुपवी – 43
    • कुकुमसेरी – 38
    • टिक्कर – 15
    • टौणी देवी – 0
    • गलोड – 0

    51 से 100 विद्यार्थियों वाले कॉलेज:

    • शिवनगर – 97
    • चिंतपूर्णी – 96
    • रोनहाट – 95
    • हरीपुर गुलेर – 90
    • रामशहर – 88
    • कोटली – 85
    • पझोता – 82
    • ननखड़ी – 81
    • सुग भटोली – 79
    • थाची – 74
    • संधोल – 67
    • जयनगर – 67

    101 से 150 विद्यार्थियों वाले कॉलेज:

    • श्री नयनादेवी – 150
    • रिवालसर – 147
    • लिलकोठी – 146
    • रे – 143
    • डैहर – 135
    • सुबाथू – 133
    • चैलकोटी – 132
    • कुमारसेन – 131
    • देहरा – 127
    • गाडागुसैन – 125
    • रक्कड़ – 121

    पहले भी हो चुकी है कॉलेजों की बंदी

    मार्च 2023 में हिमाचल सरकार ने भाजपा शासनकाल में एक अप्रैल 2022 के बाद खुले 17 डिग्री कॉलेज और 2 संस्कृत कॉलेजों को बंद कर दिया था। इनमें से छत्तरी कॉलेज को बचा लिया गया, लेकिन बाकी 19 कॉलेजों को बंद कर दिया गया था, जहां छात्रों की संख्या शून्य से 61 के बीच थी

    बंद कॉलेजों के छात्रों का क्या होगा?

    • इन कॉलेजों में पढ़ने वाले छात्रों को नजदीकी कॉलेजों में शिफ्ट किया जाएगा
    • शिक्षकों और गैर-शिक्षण स्टाफ को अन्य कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा
    • सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि छात्रों की शिक्षा पर कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े

    निष्कर्ष

    हिमाचल प्रदेश में कॉलेजों की संख्या बढ़ने के बावजूद कई संस्थानों में छात्रों की कमी के कारण बंदी का खतरा मंडरा रहा है। सरकार शिक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने के लिए निर्णय लेने की तैयारी में है। अब देखना यह होगा कि राज्य मंत्रिमंडल इस प्रस्ताव को मंजूरी देता है या नहीं