उत्तराखंड जल प्रलय के बाद सिरमौर का जीत ठाकुर अभी तक सुरंग में बंद

एनटीपीसी के साथ कार्य कर रही रिशीथ कंस्ट्रक्शन कंपनी में डीजीएम है जीत बहादुर 35 साथियों के साथ सुरंग में सील

HNN News जोशीमठ /नाहन

उत्तराखंड के चमोली जिले में ग्लेशियर के फटने के बाद धौलीगंगा नदी में भारी तबाही वाली बाढ़ के बाद सिरमौर के माजरा गांव निवासी जीत बहादुर( ठाकुर) अपने साथियों सहित सुरंग में फंसे हैं। एनटीपीसी के आधिकारिक सूत्रों से प्राप्त जानकारी के अनुसार जीत बहादुर एनटीपीसी के साथ कार्य कर रही ऋषित कंस्ट्रक्शन कंपनी में डीजीएम पद पर कार्यरत है। उनके साथ करीब कंपनी के 35 व्यक्ति भी बताए जा रहे हैं।

प्राप्त जानकारी के अनुसार आज सुबह करीब 10:30 बजे के आसपास वह एनटीपीसी की एक टीम को सुरंग के अंदर सर्वे कराने लेकर गए थे। यहां यह भी बता दें कि जोशीमठ के तपोवन में इनकी कंपनी डैम बनाने का कार्य कर रही है। जगजीत बहादुर अपनी टीम के साथ सुरंग में करीब ढाई सौ मीटर अंदर थे तभी जल प्रलय करीब 11:30 बजे के आसपास आ गई।

अधिकारिक सूत्रों के अनुसार सुरंग के दूसरे और से करीब 18 से अधिक व्यक्तियों को रेस्क्यू कर लिया गया है। जबकि डीजीएम जीत ठाकुर अपनी टीम के साथ अभी भी सुरंग के अंदर फंसे हुए हैं। जीत बहादुर के साथ करीब 35 व्यक्ति साथ बताए जा रहे हैं ।

बताया जा रहा है जिस ओर से उन्हें रेस्क्यू किया जाना है उधर से टनल का एक काफी बड़ा हिस्सा मलबे से पूरी तरह बंद है। प्राप्त जानकारी के अनुसार एनडीआरएफ की टीम सेना के जवान मौके पर रेस्क्यू में लगे हुए हैं। बताया जा रहा है कि करीब रात के 12:00 12:30 बजे के आस पास रेस्क्यू टीम सुरंग में फंसे हुए लोगों तक पहुंच सकती है। यह भी केवल संभावना है।

यहां आपको यह भी बता दें कि जीत बहादुर की दो बेटियां नहान के साईं मल्टी स्पेशलिस्ट हॉस्पिटल में जॉब करती हैं। जबकि उनके परिवार के कुछ सदस्य गिरी नगर में भी रहते हैं। जीत बहादुर के माता पिता हिमाचल प्रदेश इलेक्ट्रिसिटी बोर्ड में कार्य करते थे। जीत बहादुर के पिता की भी किन्नौर के संजय विद्युत परियोजना में 80 के दशक में एक दुर्घटना में मृत्यु हो गई थी।

मौजूदा समय जीत ठाकुर अपनी पत्नी व बच्चों सहित उत्तराखंड में रह रहे हैं। उधर कंपनी के अधिकारी राकेश डिमरी ने बताया कि जीत बहादुर अपनी गाड़ी के साथ सुरंग के काफी अंदर हैं। अंदर ऑक्सीजन की भी व्यवस्था रहती है। क्योंकि अब काफी देर हो रही है लिहाजा रेस्क्यू मे तेजी लाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
जानकारी तो यह भी मिली है कि जो व्यक्ति इस प्रोजेक्ट पर बाहर की तरफ कार्य कर रहे थे वह सभी इस बाढ़ में बह गए हैं। उनकी संख्या कितनी थी इसकी अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार जिस जगह सुरंग में यह लोग फंसे हुए हैं उस सुरंग के मुहाने पर भारी मात्रा में मलबा गिरा हुआ है। और उस जगह रेस्क्यू करने के लिए मशीनरी पहुंचाना भी बड़ा मुश्किल कार्य बना हुआ है।

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