पर्यावरण दिवस! आज हरी है मारकंडा नदी मगर ग्रीन मैन को भूल गया प्रदेश

श्री मारकंडा और पटवास नदी के बंजर 8 हेक्टेयर से ज्यादा डेल्टा मे लगाए थे 10,000 से अधिक शीशम के पेड़, आज 35 करोड़ से भी अधिक का बन गया है हरा जंगल- महान थे घनानंद फॉरेस्ट गार्ड

HNN News नाहन

प्रदेश वन विभाग में एक छोटे से पद पर नाहन बनकला बीट में तैनात रहे फॉरेस्ट गार्ड घनानंद भले ही आज हमारे बीच में ना हो मगर कभी प्रदेश में बतौर ग्रीन मैन के नाम से मीडिया की सुर्खियां हुआ करते थे। वर्ष 2000 के बाद यह नाम लगभग गुम हो चुका था। मगर इस बार पर्यावरण दिवस पर एचएनएन न्यूज ने सिरमौर के मातर गांव से ताल्लुक रखने वाले स्वर्गीय घनानंद को फिर से एक प्रेरणा स्त्रोत्र के रूप में याद किया है।

श्री मार्कंडेय नदी में घनानंद ग्रीन मैन के द्वारा लगाया गया शीशम के पेड़ का जंगल

कौन थे घनानंद?

यूं तो प्रदेश में पर्यावरण दिवस के ऊपर सैकड़ों सामाजिक संस्थाएं ,सरकारी संस्थान पर्यावरण संरक्षण को लेकर औपचारिकताएं तो निभाते हैं। मगर पर्यावरण संरक्षण के लिए चुनौतियों को कोई बिरला ही निभा पाता है।

घनानंद शर्मा नाहन वन डिवीजन के अंतर्गत बनकला बीट में फॉरेस्ट गार्ड थे। करीब 10 किलोमीटर से भी अधिक क्षेत्र में फैली इस बीट का ज्यादातर क्षेत्र श्री मार्कंडेय नदी और शंभू वाला से आगे की और एनएच का एरिया लगता था। यह क्षेत्र बरसात में भूमि कटाव के साथ साथ हरियाली मुक्त था।

घनानंद ग्रीन मैन ने वर्ष उन्नीस सौ 95 96 में ड्यूटी के दौरान इस पूरे क्षेत्र में पेड़ लगाने शुरू किए। और जो सबसे बड़ा ग्रीन पैच तैयार किया वह श्री मारकंडा नदी और पटवास नदी का डेल्टा क्षेत्र था। बियाबान पत्रों और बंजर इस नदी के दोआब क्षेत्र में करीब 8 हेक्टेयर जगह पर इन्होंने शीशम के पेड़ों की प्लांटेशन की। 10,000 से अधिक शीशम के बेशकीमती पेड़ लगाए भी और उनका पोषण भी छोटे बच्चों की तरह किया।

जिसका नतीजा आज यह निकला कि यह मारकंडा नदी का क्षेत्र एक बड़ा हरा भरा जंगल तैयार हो गया है। हर पेड़ स्वस्थ और जवान हो चुका है। अगर एक पेड़ की कीमत का आकलन किया जाए तो ढाई से तीन लाख तक की कीमत निकल कर आती है। इस प्रकार इस वन क्षेत्र में लगे पेड़ों की कुल लागत 35 करोड़ से भी अधिक की पहुंच चुकी है।

वन विभाग के बड़े अधिकारी या एनजीटी से आने वाली टीम भी इस 1 भूखंड को देखकर हैरान रह जाती है। इस वन खंड से ना केवल पर्यावरण का संरक्षण हुआ है बल्कि स्थानीय किसानों की सैकड़ों बीघा जमीन भूमि कटाव से बची है।

एनएच का रूखड़ी से लेकर कटासन तक का क्षेत्र पेड़ों से हरा भरा है। घनानंद जिन्हें ग्रीन मैन के नाम से जाना जाता था । स्वर्गीय घनानंद के बेटे तिलक राज शर्मा ने बताया कि उनके पिता छुट्टी के दिन भी प्लांटेशन में ही रहा करते थे। उन्हें स्वास्थ्य का हवाला देकर जबरन घर लाया जाता था।

Tilak Raj

लगातार बिगड़ती तबीयत और स्वास्थ्य कारणों के चलते सरकार ने उनकी सेवाओं से संतुष्ट होकर उन्हें घर पर आराम करने की सलाह दी और उनकी जगह उनके बेटे को वन विभाग में उनके कार्यों को देखते हुए करुणामूलक आधार पर नौकरी दी।

वर्ष 2011 में ग्रीन मैन अपने हरे भरे वन उपवन को छोड़कर भले ही इस दुनिया से रुखसत हो गए हो मगर जाते जाते उन्हें अपने लगाए हुए पेड़ों की भी चिंता बनी रही थी। वन विभाग व क्षेत्र के लोग बताते हैं कि घनानंद अक्सर पेड़ों से भी बातें किया करते थे। पेड़ों के बीच बैठकर वैदिक मंत्रों का उच्चारण भी किया करते थे।

अब भले ही ग्रीन मैन घनानंद दुनिया से रुखसत हो चुके हो मगर उनके द्वारा लगाए गए पेड़ों की हवा क्षेत्र के पर्यावरण और अबोहवा हवा को तरोताजा बनाए हुए हैं। उनके बेटे तिलक राम शर्मा वन विभाग में सीनियर असिस्टेंट हैं। यही नहीं अपने पिता के मार्गदर्शन पर चलते हुए वे वन महोत्सव भी मनाते हैं और पर्यावरण दिवस पर पेड़ लगाकर और सूखे पेड़ों को पानी देकर अपने पिता को सच्ची श्रद्धांजलि भी अर्पित करते हैं।

बरहाल ग्रीन मैन पर्यावरण दिवस व वन महोत्सव के लिए प्रदेश के एक रोल मॉडल हैं। भले ही सरकार व वन विभाग ने उन्हें भुला दिया हो मगर आज भी घनानंद ग्रीन मैन इन पेड़ों के रूप में श्री मारकंडा जी क्षेत्र में जिंदा है।

उधर कंजरवेटर फॉरेस्ट बी. डी. नेगी का कहना है कि सिरमौर की धरती पर ऐसे दिव्य पुरुष भी हमारे वन विभाग में रहे हैं यह बड़े सौभाग्य की बात है। निश्चित ही उन्हें वन विभाग के द्वारा पूरा मान-सम्मान दिया जाएगा कोशिश की जाएगी कि उनका स्मारक और उनके किए गए कार्यों को बनाए जा रहे दो नेचुरल पार्क में जगह भी दी जाएगी।