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नशीले पदार्थों की तस्करी पर सरकार का सख्त रुख, कड़े कानून और व्यापक कार्रवाई

हिमांचलनाउ डेस्क नाहन • 21 Feb 2025 • 1 Min Read

Himachalnow / शिमला

शिमला, 21 फरवरी 2025 : हिमाचल प्रदेश सरकार ने मादक पदार्थों की तस्करी और उनके दुरुपयोग के खिलाफ अपने कदम और सख्त कर लिए हैं। मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू के नेतृत्व में सरकार ने सख्त कानून लागू करने, समन्वित कार्रवाई और जनभागीदारी को बढ़ावा देने के लिए ठोस प्रयास किए हैं।

सख्त कानून और प्रवर्तन एजेंसियों की कार्रवाई
सरकारी प्रवक्ता के अनुसार, पुलिस विभाग ने विभिन्न प्रवर्तन एजेंसियों के सहयोग से मादक पदार्थों के नेटवर्क को तोड़ने में सफलता प्राप्त की है। अवैध संपत्तियों को जब्त कर लिया गया है और अपराधियों के खिलाफ स्वापक औषधि और मनः प्रभावी पदार्थ अधिनियम (एनडीपीएस एक्ट) और नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रोपिक सब्सटेंस (पीआईटी एनडीपीएस) अधिनियम, 1988 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की गई है।

सरकारी कर्मचारियों पर भी सख्त कार्रवाई
सरकार नशीले पदार्थों की तस्करी में लिप्त पाए जाने वाले पुलिसकर्मियों और सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ भी कठोर कदम उठा रही है। साथ ही, जनता को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के खतरों से अवगत कराने के लिए व्यापक जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं।

नया नशा निरोधक अधिनियम लाने की योजना
प्रदेश सरकार आगामी विधानसभा सत्र में हिमाचल प्रदेश नशा निरोधक अधिनियम लाने की योजना बना रही है। इस कानून के तहत बार-बार अपराध करने वालों को कठोर दंड देने और पहली बार अपराध करने वाले नाबालिगों के पुनर्वास को बढ़ावा देने का प्रावधान होगा।

2024 में जब्त नशीले पदार्थों का आंकड़ा
वर्ष 2024 के दौरान पुलिस ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़े स्तर पर अभियान चलाया, जिसमें:

  • 368.20 किलोग्राम चरस
  • 36.20 किलोग्राम अफीम
  • 11.14 किलोग्राम हेरोइन
  • 668.67 किलोग्राम पोस्त
  • 33.64 किलोग्राम गांजा जब्त किया गया।

इसके अतिरिक्त, 37,20,654 भांग के पौधे और 3,78,152 पोस्त के पौधे नष्ट किए गए तथा 2,89,68,041 नशीली गोलियां भी जब्त की गईं। पुलिस ने 2,515 लोगों को मादक पदार्थों की तस्करी में संलिप्त पाए जाने पर गिरफ्तार किया।

हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाने का लक्ष्य
सरकार का मुख्य उद्देश्य हिमाचल प्रदेश को नशा मुक्त बनाना है। इसके लिए नशीले पदार्थों के खिलाफ सख्त कानूनों के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और पुनर्वास कार्यक्रमों को भी प्राथमिकता दी जा रही है।