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  • मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए 1617 करोड़ रुपये स्वीकृत

    मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए 1617 करोड़ रुपये स्वीकृत

    प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के लिए 3,000 करोड़ की पहल के प्रथम चरण में 1,617 करोड़ रुपये मंजूर किए गए। इससे मेडिकल कॉलेजों और सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों का बुनियादी ढांचा उन्नत होगा।

    शिमला

    स्वास्थ्य आधुनिकीकरण परियोजना का प्रथम चरण

    प्रदेशभर में सुलभ एवं उच्च गुणवत्तापूर्ण वाली स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने 3,000 करोड़ रुपये की व्यापक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण पहल के प्रथम चरण में 1,617 करोड़ रुपये स्वीकृत किए हैं। इस निवेश के तहत सरकारी चिकित्सा महाविद्यालयों, सुपर स्पेशियलिटी केन्द्रों और आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों के बुनियादी ढांचे को उन्नत किया जाएगा। यह परियोजना 1 अप्रैल, 2026 से 30 अप्रैल, 2031 तक लागू की जाएगी।

    समय पर उपचार की आवश्यकता

    समय पर चिकित्सा सुविधा की उपलब्धता रोगियों के उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। निदान और उपचार में देरी से न केवल स्वास्थ्य स्थिति गंभीर बनती है, बल्कि लागत में भी वृद्धि होती है। अध्ययनों के अनुसार, देर से निदान होने पर रोगी का चिकित्सा व्यय 30–50 प्रतिशत तक बढ़ सकता है, जो स्वास्थ्य अवसंरचना को सुदृढ़ करने और गुणवत्तापूर्ण उपचार तक शीघ्र पहुंच सुनिश्चित करने की आवश्यकता को रेखांकित करता है।

    अत्याधुनिक सुविधाओं से होंगे लैस संस्थान

    सरकारी प्रवक्ता ने आज यहां बताया कि इस महत्वाकांक्षी पहल के तहत संस्थानों को अत्याधुनिक डायग्नोस्टिक सुविधाओं, सिमुलेशन-आधारित मेडिकल प्रशिक्षण प्रणालियों, एआई-सक्षम हैंडहेल्ड एक्स-रे उपकरणों तथा एकीकृत डिजिटल स्वास्थ्य प्लेटफॉर्म से सुसज्जित किया जाएगा। इस परियोजना का उद्देश्य विशेषज्ञ उपचार तक समयबद्ध पहुंच सुनिश्चित करना, रेफरल से संबंधित लागत को कम करना, रोगियों के स्वास्थ्य में सुधार करना तथा दूरदराज और दुर्गम क्षेत्रों में आपातकालीन प्रतिक्रिया प्रणाली को सुदृढ़ करना है। इससे लैंगिक समानता और जलवायु अनुकूल स्वास्थ्य सेवाओं को भी बढ़ावा मिलेगा, जिससे हिमाचल प्रदेश सुलभ और तकनीक-आधारित सार्वजनिक स्वास्थ्य आधुनिकीकरण में अग्रणी राज्य के रूप में स्थापित होगा।

    भौतिक अवसंरचना का सुदृढ़ीकरण

    प्रवक्ता ने बताया कि परियोजना का पहला चरण भौतिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने पर केंद्रित है। इसके अंतर्गत राजकीय चिकित्सा महाविद्यालयों में नए भवनों का निर्माण, नवीनीकरण और शैक्षणिक ब्लॉकों, बाह्य एवं आंतरिक रोगी सुविधाओं का उन्नयन किया जाएगा। उच्च स्तरीय सिमुलेशन केंद्र, एआर/वीआर आधारित प्रशिक्षण सुविधाएं, डिजिटल पुस्तकालय और ई-लर्निंग प्लेटफॉर्म से एकीकृत स्किल लैब स्थापित की जाएंगी। एमआरआई, सीटी स्कैनर, डिजिटल रेडियोलॉजी सिस्टम और मॉलिक्यूलर डायग्नोस्टिक प्रयोगशालाओं जैसे उन्नत इमेजिंग और जांच उपकरण स्थापित किए जाएंगे। पीएसीएस, एलआईएमएस, टेलीमेडिसिन और लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम (एलएमएस) सहित डिजिटल प्लेटफॉर्म को एबीडीएम मानकों के अनुरूप इंटरऑपरेबल डेटा विनिमय के लिए एकीकृत किया जाएगा।

    तृतीयक उपचार केंद्रों का विस्तार

    दूसरे चरण में आईजीएमसी शिमला, एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राधाकृष्णन राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, हमीरपुर में तृतीयक उपचार केन्द्रों को और सुदृढ़ किया जाएगा। रीनल और बोन मैरो ट्रांसप्लांट, न्यूरोसर्जरी, कार्डियोथोरेसिक सर्जरी, उन्नत एंडोस्कोपिक प्रक्रियाएं, बाल चिकित्सा सेवाएं तथा रोबोटिक-सहायता प्राप्त सर्जरी जैसी सेवाओं का विस्तार किया जाएगा। संस्थानों को ओ-आर्म 3डी इमेजिंग, न्यूरो-नेविगेशन सिस्टम, रोबोटिक सर्जरी प्लेटफॉर्म और एकीकृत क्रिटिकल केयर मॉनिटरिंग सिस्टम जैसी अत्याधुनिक तकनीकों से लैस किया जाएगा। एक उन्नत बाल चिकित्सा देखभाल एवं नवाचार केंद्र भी स्थापित किया जाएगा, जो क्रिटिकल, सर्जिकल और टेली-सक्षम बाल चिकित्सा सेवाओं को एकीकृत करेगा।

    आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों का सुदृढ़ीकरण

    परियोजना के तीसरे चरण में आदर्श स्वास्थ्य संस्थानों को सुदृढ़ किया जाएगा, जिसके तहत इन संस्थानों को सीटी स्कैनर, मोबाइल एक्स-रे यूनिट, अल्ट्रासाउंड मशीनें, लैप्रोस्कोपिक सिस्टम और नेत्र शल्य चिकित्सा इकाइयों सहित आधुनिक डायग्नोस्टिक और सर्जिकल सुविधाओं से सुसज्जित किया जाएगा। टेलीमेडिसिन सेवाओं और डिजिटल रेफरल नेटवर्क का विस्तार कर जिला अस्पतालों को तृतीयक और सुपर स्पेशियलिटी केंद्रों से निर्बाध रूप से जोड़ा जाएगा।

    मुख्यमंत्री का बयान

    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविन्द्र सिंह सुक्खू ने कहा कि राज्य सरकार प्रदेशवासियों को विशेषज्ञ और गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने बताया कि राज्य में स्वास्थ्य संस्थानों के आधुनिकीकरण के लिए कई पहलें की जा चुकी हैं। एआईएमएसएस चमियाना और डॉ. राजेंद्र प्रसाद राजकीय चिकित्सा महाविद्यालय, टांडा में रोबोटिक सर्जरी सुविधाएं शुरू की गई हैं और जल्द ही अन्य मेडिकल कॉलेजों में भी यह सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आने वाले समय में स्वास्थ्य संस्थानों को अत्याधुनिक चिकित्सा उपकरणों से सुसज्जित करने के लिए 3,000 करोड़ रुपये का निवेश करने की योजना बना रही है।

    आर्थिक प्रभाव और संभावित बचत

    स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रतिवर्ष 9.5 लाख मरीज उपचार के लिए हिमाचल प्रदेश से बाहर जाते हैं, जिससे राज्य की जीडीपी को लगभग 1,350 करोड़ रुपये का आर्थिक नुकसान होता है। यदि गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सेवाएं राज्य के भीतर उपलब्ध कराई जाएं, तो अनुमान है कि प्रतिवर्ष लगभग 550 करोड़ रुपये की जीडीपी की बचत की जा सकती है, साथ ही मरीजों का बहुमूल्य समय भी बचेगा।

  • सुप्रीम कोर्ट की हिमाचल हाईकोर्ट को नसीहत, चुनी सरकार को काम करने दें

    सुप्रीम कोर्ट की हिमाचल हाईकोर्ट को नसीहत, चुनी सरकार को काम करने दें

    स्थानीय निकाय चुनाव 31 मई 2026 तक कराने की मोहलत, बार-बार हस्तक्षेप पर नाराजगी

    दिल्ली/शिमला :

    सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट को स्पष्ट शब्दों में कहा है कि चुनी हुई सरकार को काम करने दिया जाए और उसके फैसलों में बार-बार दखल उचित नहीं है। सर्वोच्च अदालत ने चेतावनी दी कि भविष्य में इस तरह के हस्तक्षेप को गंभीरता से लिया जाएगा।

    मामला हिमाचल प्रदेश में स्थानीय निकाय चुनाव से जुड़ा है। सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को राहत देते हुए चुनाव कराने की समय सीमा 31 मई 2026 तक बढ़ा दी। इससे पहले प्रारंभिक कार्यों के लिए 28 फरवरी की समयसीमा तय थी, जिसे अब बढ़ाकर 31 मार्च 2026 कर दिया गया है।

    अदालत ने निर्देश दिया कि सीमांकन और आरक्षण सहित सभी औपचारिकताएं 31 मार्च तक पूरी की जाएं और उसके बाद आठ सप्ताह के भीतर चुनाव संपन्न कराए जाएं।


    पीठ में न्यायमूर्ति सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची शामिल थे। सुनवाई के दौरान अदालत ने मौखिक टिप्पणी में कहा कि ऐसा प्रतीत हो रहा है कि हाईकोर्ट चुनी हुई सरकार को काम नहीं करने दे रहा है। हालांकि, अदालत ने यह भी दोहराया कि हाई कोर्ट नागरिकों के अधिकारों के संरक्षक हैं, लेकिन उन्हें कार्यपालिका के कार्य में अनावश्यक बाधा नहीं डालनी चाहिए।
    सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के उस फैसले का समर्थन किया जिसमें सीमांकन लंबित होने के आधार पर चुनाव टालने की राज्य सरकार की मांग खारिज की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि सीमांकन लंबित होना चुनाव स्थगित करने का पर्याप्त आधार नहीं हो सकता। साथ ही यह भी माना कि कार्यकाल समाप्ति के बाद समय पर चुनाव कराना संवैधानिक दायित्व है।


    प्रदेश में करीब 3,500 ग्राम पंचायतें, 90 पंचायत समितियां, 11 जिला परिषद और 71 शहरी निकायों में इस वर्ष चुनाव प्रस्तावित हैं। अदालत ने साफ किया कि तय समयसीमा के बाद किसी भी प्रकार के और विस्तार के आवेदन पर विचार नहीं किया जाएगा।

  • हिमाचल में जारी रहेगी ओपीएस और सब्सिडी, 1066 पद भरने को कैबिनेट की मंजूरी

    हिमाचल में जारी रहेगी ओपीएस और सब्सिडी, 1066 पद भरने को कैबिनेट की मंजूरी

    आरडीजी बंद होने के बावजूद सुक्खू सरकार ने कर्मचारियों और पात्र परिवारों को दी राहत

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में सुक्खू सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए स्पष्ट कर दिया है कि कर्मचारियों को पुरानी पेंशन योजना (ओपीएस) और पात्र लोगों को दी जा रही सब्सिडी योजनाएं जारी रहेंगी।

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई बैठक में वित्त विभाग की प्रस्तुति पर विस्तार से चर्चा के बाद यह निर्णय लिया गया। सरकार ने दो साल से खाली पड़े पदों को समाप्त करने के प्रस्ताव को खारिज कर दिया।

    कैबिनेट ने विभिन्न विभागों में 1066 पद भरने को मंजूरी दी है। इनमें शिक्षकों, कनिष्ठ अभियंताओं, स्वास्थ्य और तकनीकी पद शामिल हैं। प्रस्तावित सीबीएसई स्कूलों के लिए 600 पद, 190 कनिष्ठ अभियंता, औषधि प्रयोगशाला में 36 पद और अन्य विभागों में भर्ती को स्वीकृति मिली है।

    मंत्रिमंडल ने स्पष्ट किया कि रेवेन्यू डेफिसिट ग्रांट (आरडीजी) बंद होने के बावजूद ओपीएस जारी रहेगी। सरकार ने हिमकेयर, आयुष्मान और एमआईएस जैसी योजनाएं भी जारी रखने का फैसला लिया है।

    स्वास्थ्य क्षेत्र में 1617 करोड़ रुपये की परियोजना को स्वीकृति दी गई है। अस्पतालों में आधुनिक उपकरणों की खरीद होगी और नाहन मेडिकल कॉलेज में ब्लड ट्रांसफ्यूजन विभाग स्थापित किया जाएगा।

    शिक्षा क्षेत्र में 777 अतिरिक्त स्कूलों में डिजिटल क्लासरूम बनाए जाएंगे। दिव्यांग विवाह अनुदान राशि बढ़ाकर 2 लाख रुपये तक कर दी गई है।होमगार्ड महिला स्वयंसेवकों को 26 सप्ताह का मातृत्व अवकाश देने का निर्णय भी लिया गया।

    कैबिनेट ने विधानसभा के बजट सत्र को लेकर राज्यपाल के अभिभाषण को मंजूरी दी है। बजट सत्र 16 फरवरी से शुरू होगा।बैठक के बाद उद्योग मंत्री हर्षवर्धन चौहान ने कहा कि सरकार अपने संसाधनों से विकास की गति बनाए रखेगी और कर्मचारियों व आम जनता को राहत देने के फैसले पर अडिग है।

  • हिमाचल में अब ई-ऑक्शन से बिकेंगे शराब ठेके, न कैश न खुली बोली

    हिमाचल में अब ई-ऑक्शन से बिकेंगे शराब ठेके, न कैश न खुली बोली

    नई आबकारी नीति 2026-27 को कैबिनेट की मंजूरी, टोल बैरियर के लिए 173 करोड़ बेस प्राइस तय

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    हिमाचल प्रदेश में अब शराब ठेकों का आवंटन पूरी तरह ई-ऑक्शन प्रणाली से होगा। मंत्रिमंडल ने आबकारी नीति 2026-27 को मंजूरी देते हुए साफ कर दिया है कि न तो कैश चलेगा और न ही खुली बोली लगेगी।

    मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में यह बड़ा फैसला लिया गया। अब सभी ठेकों की ई-ऑक्शन एनआईसी पोर्टल के माध्यम से कराई जाएगी, जिससे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित होगी।

    सरकार ने टोल बैरियर के लिए 173 करोड़ रुपये का बेस प्राइस तय किया है। टोल और आबकारी नीति 2026-27 दोनों को एक साथ मंजूरी दी गई।
    कैबिनेट ने वेंडर पॉलिसी को भी स्वीकृति दी है।

    सरकार का मानना है कि नई ई-ऑक्शन प्रणाली से राजस्व में बढ़ोतरी होगी और अवैध हस्तक्षेप व मनमानी पर रोक लगेगी।
    बैठक के बाद मंत्रिमंडल के फैसलों की जानकारी देते हुए मंत्रियों ने कहा कि सरकार राजस्व सुदृढ़ीकरण और पारदर्शिता को प्राथमिकता दे रही है।

    सरकार का अनुमान है कि ई-नीलामी से शराब ठेकों के ठेकों की बिक्री से करीब 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का राजस्व प्राप्त होगा, जो पिछले वर्ष के आंकड़ों से बढ़कर है। इससे पहले टेंडर-आधारित या पारंपरिक आवंटन में छुपे वित्तीय अवसर पूरी तरह उपयोग नहीं हो पा रहे थे। इस कदम को वित्तीय मजबूती और नीति-आधारित निर्णय के रूप में देखा जा रहा है।

  • पशु मित्र नीति पर बढ़ी आलोचना के बीच सरकार की सफाई, शारीरिक परीक्षा पर दिया स्पष्टीकरण

    पशु मित्र नीति पर बढ़ी आलोचना के बीच सरकार की सफाई, शारीरिक परीक्षा पर दिया स्पष्टीकरण

    पशु मित्र नीति 2025 को लेकर उठ रही आलोचनाओं के बीच सरकार ने आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी किया है। विभाग ने स्पष्ट किया है कि शारीरिक परीक्षा केवल कार्यात्मक फिटनेस जांच है और प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी है।

    शिमला

    आलोचना के बीच आई आधिकारिक प्रतिक्रिया
    पशुपालन विभाग के प्रवक्ता ने कहा कि पशु मित्रों की शारीरिक परीक्षा को लेकर सोशल मीडिया और कुछ समाचार पत्रों में प्रकाशित खबरें भ्रामक हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि चयन प्रक्रिया 14 अगस्त 2025 को अधिसूचित पशु मित्र नीति, 2025 के अनुरूप ही संचालित की जा रही है।

    सामान्य कार्यात्मक फिटनेस की जांच
    प्रवक्ता के अनुसार यह परीक्षा केवल यह सुनिश्चित करने के लिए है कि चयनित अभ्यर्थी पशु चिकित्सा संस्थानों और पशुपालन फार्मों में अपने दायित्व सुरक्षित रूप से निभा सकें। इसमें पशुओं को संभालना, लगभग 25 किलोग्राम वजन की बीमार भेड़ या बकरी को उठाना तथा चारे की बोरियां ले जाना जैसे कार्य शामिल हैं।

    भेदभाव का उद्देश्य नहीं
    उन्होंने कहा कि यह कोई सहनशक्ति प्रतियोगिता नहीं है और न ही किसी अभ्यर्थी, विशेषकर महिलाओं, के साथ भेदभाव का उद्देश्य रखती है। परीक्षा सभी अभ्यर्थियों पर समान रूप से लागू है और इसका एकमात्र उद्देश्य पशुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करना है।

    मानदेय और कार्य की प्रकृति
    प्रवक्ता ने बताया कि 5,000 रुपये प्रतिमाह का मानदेय चार घंटे प्रतिदिन के अंशकालिक बहुउद्देशीय कार्यों के लिए निर्धारित है। हालांकि कार्य अंशकालिक है, लेकिन पशुपालन से जुड़े कार्यों में शारीरिक श्रम शामिल होने के कारण न्यूनतम शारीरिक क्षमता आवश्यक है।

    पारदर्शी प्रक्रिया और वीडियो रिकॉर्डिंग
    शारीरिक परीक्षा उप-मंडलाधिकारी (सिविल) की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा कराई जा रही है तथा इसकी वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जा रही है। अभ्यर्थी निर्धारित वजन को किसी भी सुविधाजनक तरीके से उठा सकते हैं, सिर पर उठाना अनिवार्य नहीं है।

    315 अभ्यर्थी हो चुके शामिल
    अब तक 315 अभ्यर्थी परीक्षा में भाग ले चुके हैं और किसी प्रकार की चोट की सूचना नहीं मिली है। विभाग ने कहा कि वह सभी अभ्यर्थियों के साथ न्याय, सुरक्षा और सम्मान के प्रति प्रतिबद्ध है।

  • दूरदर्शन की वरिष्ठ समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का निधन , सीएम सुक्खू ने जताया शोक

    दूरदर्शन की वरिष्ठ समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का निधन , सीएम सुक्खू ने जताया शोक

    दूरदर्शन की लोकप्रिय और विश्वसनीय समाचार वाचिका सरला माहेश्वरी का 71 वर्ष की आयु में निधन हो गया। उनके निधन से मीडिया जगत और दर्शकों में गहरा शोक व्याप्त है।

    शिमला

    दूरदर्शन का प्रतिष्ठित चेहरा नहीं रहा
    दूरदर्शन का जाना-पहचाना चेहरा और देश की चर्चित न्यूज रीडर सरला माहेश्वरी ने गुरुवार को अंतिम सांस ली। परिवार के अनुसार उनका अंतिम संस्कार 12 फरवरी 2026 की शाम दिल्ली के निगम बोध घाट पर किया जाएगा। उनके निधन की सूचना दूरदर्शन ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर साझा करते हुए भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की।

    ओजस्वी वाणी और सधी प्रस्तुति से बनाई पहचान
    सरला माहेश्वरी 1980 और 1990 के दशक में दूरदर्शन की सबसे लोकप्रिय समाचार वाचिकाओं में शुमार रहीं। अपनी सधी हुई आवाज, सटीक उच्चारण और गरिमापूर्ण प्रस्तुति के कारण उन्होंने दर्शकों के मन में गहरा विश्वास स्थापित किया। वे लंबे समय तक समाचार जगत का भरोसेमंद चेहरा मानी जाती रहीं।

    करियर की उल्लेखनीय यात्रा
    उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से पीएचडी की उपाधि प्राप्त की थी। दूरदर्शन में ऑडिशन के बाद उन्होंने बतौर अनाउंसर अपने करियर की शुरुआत की और बाद में न्यूज रीडिंग में विशिष्ट पहचान बनाई। वर्ष 2005 तक वे दूरदर्शन में सक्रिय रहीं और कई विशेष प्रसारणों के माध्यम से अपनी अलग छाप छोड़ी।

    दूरदर्शन और महिला कांग्रेस ने जताया शोक
    दूरदर्शन ने श्रद्धांजलि संदेश में कहा कि सरला माहेश्वरी ने अपनी सौम्य आवाज और संयमित व्यक्तित्व से भारतीय समाचार वाचन को गरिमा प्रदान की। ऑल इंडिया महिला कांग्रेस ने भी उन्हें याद करते हुए कहा कि उनका निधन टीवी पत्रकारिता के एक स्वर्णिम अध्याय का समापन है।

    मुख्यमंत्री ने व्यक्त की संवेदना
    मुख्यमंत्री ठाकुर सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने अपने शोक संदेश में कहा, “दूरदर्शन की सुप्रसिद्ध न्यूज रीडर सरला माहेश्वरी जी के निधन का समाचार अत्यंत दुःखद है। उन्होंने अपनी ओजस्वी वाणी, शालीन व्यक्तित्व और अटूट विश्वसनीयता से समाचार वाचन को जनविश्वास का माध्यम बनाया। इस दुःख की घड़ी में मेरी गहरी संवेदनाएँ उनके परिवारजन और शुभचिंतकों के साथ हैं। ईश्वर दिवंगत की आत्मा को अपने श्रीचरणों में स्थान दें और शोकाकुल परिजन को यह अपार दुःख सहने की शक्ति प्रदान करें। ॐ शांति।”

    सोशल मीडिया पर उमड़ी श्रद्धांजलियां
    उनके निधन की खबर से सोशल मीडिया पर भी भावनात्मक प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। अनेक लोगों ने उन्हें याद करते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की और उनके योगदान को भारतीय समाचार जगत की अमूल्य विरासत बताया।

  • पानी के टैंक में मिलाया गया जहर, ब्रेष्ट्र गांव के 200 लोगों की जान पर मंडराया खतरा

    पानी के टैंक में मिलाया गया जहर, ब्रेष्ट्र गांव के 200 लोगों की जान पर मंडराया खतरा

    शिमला के ब्रेष्ट्र गांव में पेयजल टैंक में कीटनाशक मिलाए जाने का मामला सामने आया है। करीब 200 लोगों तक पहुंचने वाली पानी की सप्लाई को एहतियातन रोक दिया गया है।

    शिमला

    पेयजल टैंक में कीटनाशक मिलने से सनसनी

    क्या यह पूरे गांव को खत्म करने की साजिश थी या फिर हैरान कर देने वाली लापरवाही? शिमला के टिक्कर क्षेत्र से सटे ब्रेष्ट्र गांव में पेयजल टैंक में सेब में इस्तेमाल होने वाली जहरीली कीटनाशक दवा मिलाए जाने का सनसनीखेज मामला सामने आया है। करीब 30 घरों के लगभग 200 लोगों तक पहुंचने वाली पानी की सप्लाई में जहर की पुष्टि होने से इलाके में हड़कंप मच गया।

    गंध से हुआ खुलासा

    घटना रविवार की है। गांव में नियमित पानी की आपूर्ति के दौरान स्थानीय निवासी आदर्श शर्मा ने नल से भरे गिलास में तेज और असामान्य गंध महसूस की। शक होने पर उन्होंने तुरंत ग्रामीणों को सतर्क किया और जल शक्ति विभाग को सूचना दी।

    सप्लाई रोकी गई, टैंक खाली कराया

    ग्रामीणों ने जब अपने-अपने घरों में पानी जांचा तो उन्हें भी वैसी ही गंध आई। एहतियात के तौर पर सभी को नल बंद करने को कहा गया। सूचना मिलते ही जल शक्ति विभाग की टीम मौके पर पहुंची, सप्लाई रोकी गई और टैंक खाली करवाया गया।

    लैब जांच में कीटनाशक की पुष्टि

    लैब जांच में पानी में सेब की फसल में प्रयुक्त कीटनाशक दवा ‘डर्मिट’ (डमिंट) की मौजूदगी की पुष्टि हुई है। जल शक्ति विभाग के एसडीओ भूपेंद्र कुमार ने पानी में कीटनाशक के अंश मिलने की पुष्टि की है।

    स्वास्थ्य पर गंभीर प्रभाव की आशंका

    बागवानी विशेषज्ञ डॉ. एसपी भारद्वाज के अनुसार यह दवा यदि पानी में मिल जाए या कोई व्यक्ति इसे पी ले तो गंभीर स्वास्थ्य संकट उत्पन्न कर सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते गंध का पता न चलता तो बड़ा हादसा हो सकता था।

    एफआईआर दर्ज, जांच शुरू

    पुलिस ने अज्ञात व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। यह पड़ताल की जा रही है कि जहर सीधे टैंक में मिलाया गया या पाइपलाइन के माध्यम से पानी को दूषित किया गया।

    गांव में दहशत, सफाई कार्य शुरू

    घटना के बाद गांव में दहशत का माहौल है। विभाग ने टैंक और पाइपलाइन की सफाई शुरू कर दी है, जबकि पुलिस हर पहलू से मामले की जांच में जुटी है।

  • शिक्षा विभाग में छुट्टियों पर ब्रेक, बजट सत्र तक अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी

    शिक्षा विभाग में छुट्टियों पर ब्रेक, बजट सत्र तक अधिकारियों की अनिवार्य मौजूदगी

    16 फरवरी से विधानसभा सत्र, सुबह 8 से रात 8 बजे तक ड्यूटी के निर्देश

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    16 फरवरी से शुरू हो रहे हिमाचल विधानसभा के बजट सत्र को लेकर शिक्षा विभाग ने सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। स्कूल शिक्षा निदेशालय ने अधिकारियों और कर्मचारियों की प्रस्तावित छुट्टियों और टूर कार्यक्रमों पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

    जारी निर्देशों में स्पष्ट किया गया है कि सत्र की अवधि तक सभी अधिकारी और कर्मचारी मुख्यालय में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहेंगे। विधानसभा कार्य से जुड़े अधिकारियों को प्रतिदिन सुबह 8 बजे से रात 8 बजे तक कार्यालय में मौजूद रहने के निर्देश दिए गए हैं।

    आवश्यकता पड़ने पर रविवार और अन्य अवकाश के दिनों में भी कार्यालय बुलाया जा सकता है।विभाग ने कहा है कि विधानसभा में शिक्षा से जुड़े सभी प्रश्नों के उत्तर समय पर और पूर्ण रूप से तैयार रखे जाएं।

    अधिकारियों को विभाग से संबंधित अद्यतन आंकड़े उपलब्ध रखने होंगे। विशेष रूप से पिछले तीन वर्षों की नई भर्तियां, पदोन्नतियां, सेवानिवृत्तियां, रिक्त पदों की स्थिति और शिक्षकों के तबादलों का पूरा ब्योरा तैयार रखने को कहा गया है।आदेशों में चेतावनी दी गई है कि विधानसभा कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।

    बजट सत्र समाप्त होने तक शिक्षा विभाग के कार्यालयों के लैंडलाइन और अधिकारियों के मोबाइल फोन कार्य दिवसों के साथ-साथ अवकाश के दौरान भी चालू रखने के निर्देश दिए गए हैं।

  • बजट सत्र ही होगा विधानसभा का आगामी सत्र, 16 फरवरी से शुरुआत

    बजट सत्र ही होगा विधानसभा का आगामी सत्र, 16 फरवरी से शुरुआत

    राज्यपाल के अभिभाषण से शुरू होगी कार्यवाही, पहले चरण में तीन दिन का सत्र तय

    हिमाचल नाऊ न्यूज़ – शिमला

    हिमाचल प्रदेश विधानसभा का आगामी सत्र बजट सत्र ही होगा। 16 फरवरी से शुरू होने वाले इस सत्र को लेकर विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया की अध्यक्षता में सुरक्षा व्यवस्था के मद्देनज़र एक अहम बैठक आयोजित की गई, जिसमें पुलिस प्रशासन और राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

    बैठक में विधानसभा परिसर और आसपास की सुरक्षा व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा की गई।बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में विधानसभा अध्यक्ष कुलदीप सिंह पठानिया ने स्पष्ट किया कि यह सत्र नए कैलेंडर वर्ष और नए वित्तीय वर्ष का पहला सत्र है, इसलिए इसकी शुरुआत राज्यपाल के अभिभाषण से की जाएगी।

    उन्होंने बताया कि 16 फरवरी को दोपहर 2 बजे राज्यपाल का अभिभाषण होगा।विधानसभा अध्यक्ष ने बताया कि राज्यपाल के अभिभाषण के बाद, नियमों के अनुसार यदि पिछले सत्र के दौरान किसी माननीय सदस्य का निधन हुआ है, तो उन्हें श्रद्धांजलि दी जाएगी।

    इसके उपरांत विधायी कार्यवाही आरंभ होगी। बजट सत्र के दौरान राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव और बजट प्रस्तुति सहित कई महत्वपूर्ण सरकारी कार्य संपन्न होंगे।कुलदीप सिंह पठानिया ने बताया कि फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सत्र के पहले चरण में 16, 17 और 18 फरवरी को विधानसभा की तीन बैठकें प्रस्तावित हैं।

    बजट पेश करने की तिथि को लेकर सरकार की ओर से औपचारिक सूचना मिलते ही मीडिया को अवगत कराया जाएगा।उन्होंने कहा कि विधानसभा का पोर्टल सभी माननीय विधायकों के लिए खोल दिया गया है।

    विधायक लिखित और मौखिक प्रश्नों सहित सभी प्रकार के नोटिस भेज सकते हैं। नोटिस प्राप्त करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है और तय समय सीमा पूरी होने के बाद सत्र से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक की जाएगी। विधानसभा की ओर से 15 फरवरी को मीडिया इंटरैक्शन भी आयोजित किया जाएगा।

    सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि हर सत्र से पहले कानून व्यवस्था के मद्देनज़र पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक की जाती है।

    बजट सत्र के दौरान सुरक्षा, नियमों के पालन, मीडिया प्रतिनिधियों और आगंतुकों की पास व्यवस्था सहित सभी आवश्यक प्रबंधों को लेकर संबंधित अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी कर दिए गए हैं।

  • शिमला में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, यूपीआई ट्रांजेक्शनों से खाते से तीन लाख से अधिक राशि पार

    शिमला में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी, यूपीआई ट्रांजेक्शनों से खाते से तीन लाख से अधिक राशि पार

    अज्ञात साइबर ठगों ने यूपीआई के जरिए एक व्यक्ति के खातों से चुपचाप बड़ी रकम निकाल ली। पीड़ित को लेनदेन की जानकारी बाद में खाते की जांच के दौरान हुई, जिसके बाद पुलिस में मामला दर्ज कराया गया।

    शिमला/रोहड़ू

    यूपीआई के जरिए की गई धोखाधड़ी
    राजधानी शिमला के रोहड़ू क्षेत्र में ऑनलाइन बैंकिंग धोखाधड़ी का मामला सामने आया है। शिकायत के अनुसार अज्ञात साइबर अपराधियों ने यूपीआई माध्यम से कई ट्रांजेक्शनों के जरिए एक व्यक्ति के बैंक खातों से तीन लाख रुपये से अधिक की राशि निकाल ली।

    दो अलग-अलग बैंकों के खाते बने निशाना
    पीड़ित के एचडीएफसी बैंक रोहड़ू और स्टेट को-ऑपरेटिव बैंक देवली (टिक्कर) शाखा में खाते हैं। 24 जनवरी से 7 फरवरी के बीच हुए लेनदेन की जानकारी उन्हें नहीं थी और न ही उन्होंने किसी को ऐसी अनुमति दी थी। बाद में खाते का विवरण देखने पर रकम कम होने का पता चला।

    बैंक से संपर्क के बाद पुलिस में शिकायत
    रकम की कमी का पता चलने पर पीड़ित ने संबंधित बैंकों से संपर्क किया और प्रारंभिक जानकारी मिलने के बाद पुलिस थाना रोहड़ू में शिकायत दर्ज करवाई। पुलिस ने भारतीय न्याय संहिता की संबंधित धारा के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

    साइबर तकनीक से हो रही जांच
    पुलिस साइबर तकनीकी माध्यमों से यह पता लगाने में जुटी है कि राशि किन खातों में ट्रांसफर हुई और इसके पीछे कौन लोग शामिल हैं। संदिग्ध खातों और लेनदेन के रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।

    लोगों से सतर्क रहने की अपील
    पुलिस ने आमजन से अपील की है कि वे अपने बैंक खाते की जानकारी, ओटीपी, यूपीआई पिन या अन्य गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें और किसी भी संदिग्ध लिंक या कॉल से सतर्क रहें।