Category: vrat 2025

  • Chaitra Month Vrat Tyohar: रंग पंचमी से लेकर हनुमान जयंती तक, चैत्र महीने में हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, देखें लिस्ट

    Chaitra Month Vrat Tyohar: रंग पंचमी से लेकर हनुमान जयंती तक, चैत्र महीने में हैं ये प्रमुख व्रत-त्योहार, देखें लिस्ट

    Chaitra Month Vrat Tyohar: चैत्र के महीने में रंग पंचमी, नवरात्रि और हनुमान जयंती जैसे कई प्रमुख त्योहार आएंगे। यहां देखें सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों की लिस्ट।

    Chaitra Month Vrat Tyohar: चैत्र हिंदू पंचांग का प्रथम माह है। हिंदू नववर्ष की शुरुआत चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि से होती है। इसलिए चैत्र को हिंदू धर्म में बेहद पवित्र महीना माना जाता है। इस माह में रंग पंचमी, नवरात्रि और हनुमान जयंती जैसे प्रमुख त्योहार भी आते हैं। साथ ही इस महीने में रखे जाने वाले एकादशी व्रत का भी अपना अलग महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित है कि सृष्टि के रचियता ब्रह्मा जी ने इसी माह में सृष्टि की रचना की थी। इस महीने व्रत रखने और ईश्वर का ध्यान करने से शुभ फलों की प्राप्ति भक्तों को होती है। आइए ऐसे में जान लेते हैं चैत्र के महीने में आने वाले सभी प्रमुख व्रत-त्योहारों के बारे में। 

    चैत्र माह 2025

    चैत्र माह की शुरुआत कृष्ण प्रतिपदा तिथि यानि 15 मार्च से होगी। वहीं इस महीने का समापन चैत्र पूर्णिमा के दिन 12 अप्रैल को होगा। इसी महीने में माता दुर्गा के नौ रूपों की पूजा का पावन पर्व नवरात्रि 30 मार्च से शुरू होगा। 

    चैत्र माह 2025 व्रत त्योहार

    • चैत्र माह प्रारंभ– 15 मार्च 2025
    • भ्रातृ द्वितीया- 16 मार्च 2025 
    • भालचद्र संकष्टी चतुर्थी- 17 मार्च 2025 
    • रंग पंचमी- 19 मार्च 2025
    • शीतला सप्तमी- 21 मार्च 2025
    • शीतला अष्टमी, कालाष्टमी- 22 मार्च 2025 
    • पापमोचिनी एकादशी- 25 मार्च 2025  
    • प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि- 27 मार्च 2025
    • सूर्य ग्रहण, अमावस्या- 29 मार्च 2025
    • गुड़ी पड़वा, चैत्र नवरात्रि, हिंदू नववर्ष प्रारंभ- 30 मार्च 2025
    • रामनवमी- 06 अप्रैल 2025 
    • कामदा एकादशी- 08 अप्रैल 2025
    • चैत्र पूर्णिमा, हनुमान जयंती- 12 अप्रैल 2025

    हिंदू नववर्ष

    चैत्र महीने में 30 मार्च से हिंदू नववर्ष की शुरुआत होगी। इस साल हिंदू नववर्ष 2028 शुरू होगा। इसी दिन से माता के नौ रूपों की पूजा भी की जाती है। इस बार हिंदू नए साल की शुरुआत रविवार के दिन से हो रही है, इसलिए साल के राजा सूर्य होंगे। सूर्य के नववर्ष का राजा होने से राजनीतिक क्षेत्र में उथल-पुथल हो सकती है। वहीं किसानों के लिए भी समय थोड़ा चुनौतीपूर्ण रह सकता है। 

  • Shattila Ekadashi 2025 / षट्तिला एकादशी पर बने शुभ योग, इन 6 तरीकों से करें तिल का प्रयोग और पूरी होगी हर मनोकामना

    Shattila Ekadashi 2025 / षट्तिला एकादशी पर बने शुभ योग, इन 6 तरीकों से करें तिल का प्रयोग और पूरी होगी हर मनोकामना

    षट्तिला एकादशी का महत्व

    माघ महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी को षट्तिला एकादशी कहा जाता है, जो इस बार 25 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी। यह दिन खासतौर पर भगवान विष्णु की पूजा से जुड़ा होता है और इस दिन तिल का विशेष महत्व है। हिंदू धर्म में तिल को पवित्र माना गया है, और यही कारण है कि इस दिन तिल के छह प्रकार के प्रयोग किए जाते हैं, जिससे भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।

    इस दिन बने ग्रहों के शुभ संयोग के साथ तिल का उपयोग करके भक्त भगवान विष्णु की पूजा करते हैं और उनसे आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। आइए जानते हैं कि षट्तिला एकादशी पर बने शुभ योग और तिल के 6 महत्वपूर्ण प्रयोग किस प्रकार हैं, और कैसे इनका पालन करके हम अपने जीवन में सुख, समृद्धि और पुण्य प्राप्त कर सकते हैं।


    षट्तिला एकादशी पर शुभ योग:

    इस साल षट्तिला एकादशी 2025 25 जनवरी को मनाई जाएगी, जो 24 जनवरी की शाम 7:25 बजे से शुरू होकर 25 जनवरी रात 8:31 बजे तक रहेगी। इस दिन विशेष ग्रहों का संयोग बनेगा:

    • चंद्रमा और मंगल का सीधा संयोग
    • उत्तराषाढ़ा नक्षत्र
    • ध्रुव योग और शिववास योग

    इन शुभ संयोगों का प्रभाव भक्तों को विशेष पुण्य और आशीर्वाद प्रदान करता है। ध्रुव योग में दान करने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति होती है, जबकि शिववास योग में किए गए उपायों से जीवन में सुख-शांति का वास होता है।


    षट्तिला एकादशी पर तिल का महत्व:

    तिल का महत्व पौराणिक कथाओं से जुड़ा है। यह माना जाता है कि भगवान विष्णु के क्रोध के पसीने से तिल धरती पर उत्पन्न हुए थे। इसी कारण तिल को पवित्र और शुभ माना गया है। षट्तिला एकादशी का नाम भी तिल से जुड़ा है, क्योंकि इस दिन तिल का छह प्रकार से उपयोग करना अनिवार्य होता है। ऐसा करने से भगवान विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है और भक्तों के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं। साथ ही, स्वर्ग की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।


    षट्तिला एकादशी पर तिल के 6 प्रयोग:

    1. तिल मिले जल से स्नान
    इस दिन तिल के तेल या तिल के बीज से पानी मिलाकर स्नान करना शुभ माना जाता है। इससे शरीर और मन दोनों को शांति मिलती है और पुण्य की प्राप्ति होती है।

    2. तिल के तेल से मालिश
    तिल के तेल से मालिश करने से शारीरिक थकावट दूर होती है और शरीर में ताजगी आती है। साथ ही, तिल से भगवान विष्णु की पूजा करने का भी लाभ मिलता है।

    3. तिल से हवन
    षट्तिला एकादशी पर तिल का हवन करना अत्यंत शुभ माना जाता है। इससे वातावरण शुद्ध होता है और भगवान विष्णु का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

    4. तिल मिले जल का सेवन
    तिल के मिश्रण से बने जल का सेवन करने से मनोवांछित फल प्राप्त होते हैं। यह पूजा का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है जो जीवन में खुशहाली लाता है।

    5. तिल का दान
    इस दिन तिल का दान करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। तिल को ब्राह्मणों, गरीबों या जरूरतमंदों को दान देना विशेष लाभकारी होता है।

    6. तिल से बने पदार्थों का सेवन
    षट्तिला एकादशी पर तिल से बने मीठे पदार्थों का सेवन करना भी अत्यंत शुभ माना जाता है। यह आंतरिक रूप से शुद्धता लाता है और मानसिक शांति का कारण बनता है।


    निष्कर्ष:

    षट्तिला एकादशी का दिन भगवान विष्णु की पूजा करने और तिल के छह प्रकार के प्रयोगों के लिए अत्यंत उपयुक्त है। इन उपायों से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है, बल्कि जीवन में सुख, समृद्धि और शांति भी आती है। इसलिए इस दिन विशेष ध्यान दें और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करें।

    Also Read This :

    षटतिला एकादशी 2025 / माघ मास की षटतिला एकादशी कब है? पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

    Masik Shivratri 2025: माघ मासिक शिवरात्रि कब है? जानें पूरे साल की तिथियां

    Mauni Amavasya 2025 / कब है यह दिन, शुभ और लाभकारी मौनी अमावस्या पर जानें क्या करें और क्या न करें

  • षटतिला एकादशी 2025 / माघ मास की षटतिला एकादशी कब है? पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

    षटतिला एकादशी 2025 / माघ मास की षटतिला एकादशी कब है? पूजा का महत्व और शुभ मुहूर्त

    षटतिला एकादशी 2025: माघ माह में होने वाला महत्वपूर्ण व्रत

    Shattila Ekadashi 2025 का व्रत हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। यह व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन विशेष रूप से भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की पूजा की जाती है, जिससे व्यक्ति को अनेक लाभ और पुण्य मिलता है। 2025 में यह व्रत 25 जनवरी को मनाया जाएगा। जानें षटतिला एकादशी के व्रत का महत्व, पूजा का शुभ मुहूर्त, और इस दिन किए जाने वाले विशेष उपायों के बारे में।

    षटतिला एकादशी का महत्व

    षटतिला एकादशी का व्रत माघ माह के कृष्ण पक्ष में रखा जाता है। इस दिन तिल का विशेष महत्व है, जिससे इस व्रत का नाम “षटतिला” पड़ा है। तिल का दान, स्नान, भोजन, पान, हवन और लेपन करना इस दिन के प्रमुख कार्य होते हैं। हिंदू मान्यताओं के अनुसार इस दिन तिल का दान करने से पापों का नाश होता है और पुण्य की प्राप्ति होती है। साथ ही, इस दिन पितरों का तर्पण करने से उनकी आत्मा को शांति मिलती है।

    षटतिला एकादशी पूजा मुहूर्त और शुभ समय

    Shattila Ekadashi 2025 का व्रत 24 जनवरी की शाम 7:25 बजे से शुरू होगा और 25 जनवरी की रात 8:31 बजे समाप्त होगा। इस दिन का पूजा मुहूर्त 25 जनवरी को सुबह 5:30 बजे से लेकर 9:00 बजे तक रहेगा। व्रत का पारण 26 जनवरी को सुबह 7:10 बजे से 9:20 बजे तक किया जाएगा, जो कि शुभ और फलदायक माना जाता है।

    षटतिला एकादशी व्रत के लाभ

    षटतिला एकादशी का व्रत व्यक्ति को आध्यात्मिक उन्नति, पवित्रता, धन और संतोष की प्राप्ति कराता है। मान्यताओं के अनुसार इस दिन तिल का दान करने से व्यक्ति को स्वर्ग में स्थान मिलता है। इसके अलावा, तिल और जल ग्रहण करने से शरीर के दोष दूर होते हैं और ग्रह नक्षत्रों के शुभ परिणाम मिलने लगते हैं।


  • Mauni Amavasya 2025 / कब है यह दिन, शुभ और लाभकारी मौनी अमावस्या पर जानें क्या करें और क्या न करें

    Mauni Amavasya 2025 / कब है यह दिन, शुभ और लाभकारी मौनी अमावस्या पर जानें क्या करें और क्या न करें

    Mauni Amavasya 2025: सबसे मंगलकारी दिन, जानें सही नियम और विधियां
    मौनी अमावस्या 2025 का पर्व एक अत्यंत शुभ और लाभकारी दिन माना जाता है। यह दिन खासकर उन श्रद्धालुओं के लिए महत्वपूर्ण होता है जो पुण्य लाभ के लिए पवित्र नदियों में स्नान और दान करते हैं। खास बात यह है कि इस दिन को मौन व्रत रखने और विशेष पूजा के जरिए आशीर्वाद प्राप्त किया जा सकता है। इस लेख में हम आपको मौनी अमावस्या 2025 के बारे में सारी जानकारी देंगे, जिसमें पूजा विधि, शुभ मुहूर्त, और क्या करें और क्या न करें—सबकुछ शामिल है।


    मौनी अमावस्या 2025: तिथि और महत्व

    मौनी अमावस्या का महत्व
    माघ माह की अमावस्या को मौनी अमावस्या कहा जाता है, जो विशेष रूप से पुण्य और मोक्ष प्राप्ति के लिए महत्वपूर्ण मानी जाती है। इस दिन, विशेष रूप से गंगा स्नान का महत्व अत्यधिक बढ़ जाता है क्योंकि इस दिन गंगा का जल अमृत रूप में माना जाता है। महाकुंभ के दौरान मौनी अमावस्या के दिन लाखों श्रद्धालु गंगा में स्नान करने के लिए इकट्ठा होते हैं।
    इसके अलावा, मौनी अमावस्या के दिन लोग मौन व्रत रखते हैं, ताकि उनके जीवन में शांति और सकारात्मक ऊर्जा का संचार हो।

    मौनी अमावस्या 2025 की तिथि
    इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार, अमावस्या तिथि का आरंभ 28 जनवरी 2025 को शाम 7:35 बजे से होगा और यह समाप्त होगी 29 जनवरी 2025 को शाम 6:05 बजे। इस दिन विशेष स्नान-दान और पूजा का महत्व है।


    मौनी अमावस्या के दिन क्या करें?

    मौनी अमावस्या के दिन किए जाने वाले कुछ खास कार्यों से पुण्य और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।

    1. गंगा स्नान करें
      • मौनी अमावस्या के दिन गंगा या किसी पवित्र नदी में स्नान करना अत्यंत पुण्यकारी माना जाता है। यह स्नान पापों को नष्ट करता है और जीवन में शांति और समृद्धि लाता है।
    2. भगवान विष्णु, माता लक्ष्मी और मां गंगा की पूजा करें
      • इस दिन भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और गंगा की पूजा करने से जीवन में धन और समृद्धि का वास होता है।
    3. मौन व्रत रखें
      • मौनी अमावस्या के दिन मौन व्रत रखना उत्तम माना जाता है। यह व्रत मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता है।
    4. तुलसी के पास घी का दीया जलाएं
      • शाम के समय तुलसी के पास घी का दीया जलाने से कष्टों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि बनी रहती है।
    5. दान करें
      • इस दिन अन्न, धन, वस्त्र और अन्य दान करना शुभ होता है। यह दान आपके जीवन में बढ़ोतरी लाता है।
    6. सूर्य देव को अर्घ्य दें
      • सूर्य देव को अर्घ्य देने से जीवन में स्थिरता और समृद्धि बनी रहती है। यह दिन खासतौर पर आपके जीवन में सकारात्मक बदलाव लेकर आता है।
    7. पितरों को श्रद्धांजलि अर्पित करें
      • “ॐ पितृ देवतायै नमः” मंत्र का 11 बार जाप करने से पितरों की कृपा प्राप्त होती है। साथ ही, पशु-पक्षियों को दाना डालने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है।

    मौनी अमावस्या के दिन क्या नहीं करना चाहिए?

    मौनी अमावस्या के दिन कुछ खास कार्यों से बचना चाहिए, ताकि पुण्य की प्राप्ति हो और कोई नकारात्मक प्रभाव न पड़े।

    1. तामसिक भोजन से बचें
      • इस दिन तामसिक आहार से बचना चाहिए, जैसे मांस, मदिरा और प्याज-लहसुन का सेवन न करें।
    2. वाद-विवाद से दूर रहें
      • मौनी अमावस्या के दिन किसी से वाद-विवाद नहीं करना चाहिए। शांति और सौहार्द बनाए रखें।
    3. सोने में देरी न करें
      • इस दिन देर तक सोना निषेध है। सुबह जल्दी उठकर पुण्य कार्यों में लगे रहना चाहिए।
    4. झूठ बोलने से बचें
      • मौनी अमावस्या के दिन झूठ बोलने से बचना चाहिए, क्योंकि यह पुण्य को नष्ट करता है।

    मौनी अमावस्या का दिन एक अत्यंत पवित्र और लाभकारी दिन होता है। इस दिन किए गए स्नान, पूजा और दान से न केवल पुण्य की प्राप्ति होती है बल्कि जीवन में शांति और समृद्धि का वास भी होता है। मौन व्रत रखने और सही नियमों का पालन करने से सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह होता है।
    इस साल मौनी अमावस्या 29 जनवरी 2025 को मनाई जाएगी, और इस दिन को पवित्र कार्यों के लिए सर्वोत्तम माना जाएगा।


  • बसंत पंचमी 2025 / जानें कब है ये शुभ दिन, पूजा मुहूर्त और देवी सरस्वती के आशीर्वाद के लिए सही समय

    बसंत पंचमी 2025 / जानें कब है ये शुभ दिन, पूजा मुहूर्त और देवी सरस्वती के आशीर्वाद के लिए सही समय

    बसंत पंचमी, विद्या और कला की देवी माता सरस्वती को समर्पित पावन पर्व है। इस दिन देवी सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा की जाती है। यह दिन शिक्षा, ज्ञान, और समृद्धि के क्षेत्र में सफलता प्राप्त करने के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। आइए जानें बसंत पंचमी की सही तिथि, पूजा का शुभ मुहूर्त, और इसका महत्व।


    बसंत पंचमी 2025 की तिथि: कब मनाई जाएगी?

    बसंत पंचमी के पर्व को लेकर इस वर्ष थोड़ी उलझन है। तिथि की स्थिति इस प्रकार है:

    • तिथि का प्रारंभ: 2 फरवरी 2025 को सुबह 9:14 बजे।
    • तिथि का समाप्ति: 3 फरवरी 2025 को सुबह 3:52 बजे।

    इस साल बसंत पंचमी 2 फरवरी 2025 को मनाई जाएगी।


    सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त

    बसंत पंचमी के दिन सरस्वती पूजा के लिए विशेष मुहूर्त का निर्धारण किया गया है।

    • पूजा का शुभ समय: सुबह 7:09 बजे से दोपहर 12:35 बजे तक।

    यह दिन सभी शुभ कार्यों के लिए उपयुक्त माना जाता है क्योंकि यह अबूझ मुहूर्त का समय होता है।


    बसंत पंचमी का महत्व: क्यों है यह दिन खास?

    बसंत पंचमी का महत्व हिंदू धर्म में अत्यधिक है। यह दिन ज्ञान, विद्या और कला को समर्पित है।

    • मां सरस्वती की कृपा:
      माघ शुक्ल पंचमी के दिन देवी सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। उनकी आराधना करने से बुद्धि, ज्ञान और विद्या की प्राप्ति होती है।
    • पढ़ाई और शिक्षा में सफलता:
      बच्चों और छात्रों को इस दिन मां सरस्वती की पूजा करनी चाहिए। इससे आलस्य दूर होता है और शिक्षा में रुचि बढ़ती है।
    • रंगों का महत्व:
      बसंत पंचमी पर पीले और सफेद रंग के वस्त्र पहनना शुभ माना जाता है। पीला रंग समृद्धि और सफेद रंग शांति का प्रतीक है।

    पूरे देश में उत्सव का माहौल

    • स्कूल, कॉलेज और शिक्षण संस्थानों में सरस्वती पूजा का आयोजन बड़े धूमधाम से किया जाता है।
    • घरों और मंदिरों में मां सरस्वती की मूर्तियों की स्थापना और पूजा की जाती है।
    • यह दिन खुशी और उत्साह से भरा होता है।

    निष्कर्ष: बसंत पंचमी से पाएं मां सरस्वती की कृपा

    2 फरवरी 2025 को बसंत पंचमी का पर्व मनाएं और मां सरस्वती की आराधना से ज्ञान, विद्या और सफलता प्राप्त करें। इस दिन का हर पल शुभ है, इसलिए पूजा और परंपराओं को विधिपूर्वक निभाएं।

    क्या आपने इस शुभ दिन के लिए तैयारी कर ली है? बसंत पंचमी 2025 का हर शुभ मुहूर्त आपके लिए खुशियां और सफलता लेकर आए!