हाल ही में, हिमाचल प्रदेश सरकार ने राज्य में पेड़ों के कटान और उन्हें बेचने पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगाने का महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। यह निर्णय राज्य में बढ़ती पेड़ कटाई की प्रवृत्ति को देखते हुए लिया गया है। इस कदम के बाद राज्य में लोगों के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है, क्योंकि यह आदेश उन व्यक्तियों के लिए नया है जो पहले अपनी भूमि पर पेड़ काटने के बाद उन्हें बेचते थे।
मुख्य वन अरण्यपाल का स्पष्टीकरण
मंडी के मुख्य वन अरण्यपाल, अजीत ठाकुर ने इस आदेश पर स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने बताया कि यह प्रतिबंध केवल पेड़ों को बेचने के लिए काटने पर लागू है। यदि कोई व्यक्ति निजी उपयोग के लिए अपनी निजी ज़मीन पर पेड़ काटना चाहता है, तो वह इसके लिए संबंधित रेंज ऑफिसर से अनुमति प्राप्त कर सकता है और फिर उन्हें काट सकता है।
सिर्फ कुछ विशेष प्रजातियाँ ही काटने के लिए अनुमत
अजीत ठाकुर ने बताया कि सरकार ने पहले कुछ समय के लिए पेड़ कटाई की अनुमति दी थी, जिसके बाद पेड़ों के कटान और उन्हें बेचने की प्रवृत्ति तेजी से बढ़ी। इसे रोकने के लिए अब सरकार ने इस पर फिर से प्रतिबंध लगा दिया है। हालांकि, कुछ विशेष प्रजातियों जैसे सफेदा, पॉपुलर, और बांस को काटने और बेचने की अनुमति दी गई है।
प्रकृति की रक्षा के लिए कदम उठाए गए
इस प्रतिबंध का मुख्य उद्देश्य निचले क्षेत्रों में पेड़ों की अंधाधुंध कटाई को रोकना है, खासकर उन इलाकों में जहाँ पेड़ों का मूल्य अधिक होता है और उन्हें व्यावसायिक रूप से बेचा जाता है। इससे प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखने और पर्यावरणीय सुरक्षा सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी।
निजी उपयोग के लिए पेड़ काटने की अनुमति
अगर कोई व्यक्ति अपनी भूमि से पेड़ काटकर अपने घरेलू इस्तेमाल के लिए जैसे कि लकड़ी जलाने, मकान बनाने या अन्य घरेलू उपयोग के लिए इसे उपयोग करना चाहता है, तो उस पर कोई प्रतिबंध नहीं है। इसके लिए व्यक्ति को सिर्फ रेंज ऑफिसर को सूचित करना होगा, और फिर वह अपनी आवश्यकता के अनुसार पेड़ काट सकता है।
हिमाचल प्रदेश सरकार का यह कदम पर्यावरणीय संतुलन को बनाए रखने के लिए महत्वपूर्ण है। पेड़ों के कटान और बिक्री पर लगाई गई पाबंदी से यह सुनिश्चित होगा कि प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा की जा सके, जबकि निजी उपयोग के लिए इसे एक समान्य प्रक्रिया के तहत किया जा सकता है।

