अंतरराष्ट्रीय श्री रेणुका जी मेले के चौथे दिन पारंपरिक संस्कृति और लोककला की झलक बुडाह लोकनृत्य प्रतियोगिता में देखने को मिली। यह प्रतियोगिता रेणुका जी विकास बोर्ड एवं भाषा एवं संस्कृति विभाग के सौजन्य से जिला भाषा अधिकारी सुश्री कांता नेगी के नेतृत्व में आयोजित की गई।
श्री रेणुका जी
हानत घाटों दल ने जीता प्रथम स्थान
इस प्रतियोगिता में पारंपरिक बुडाह लोकनृत्य दल हानत घाटों ने प्रथम स्थान प्राप्त किया, जबकि बुडाह लोकनृत्य दल सैंज ने द्वितीय और भद्रास दल गनोग ने तृतीय स्थान हासिल किया। विजेताओं को रेणुका जी विकास बोर्ड की ओर से क्रमशः ₹15,000, ₹13,000 और ₹11,000 की पुरस्कार राशि और आकर्षक ट्रॉफियां प्रदान की जाएंगी।
लोकसंस्कृति की झलक से सजा रेणु मंच
प्रतियोगिता के दौरान ऐतिहासिक रेणु मंच पर सिरमौर जिले के विभिन्न क्षेत्रों से आए कलाकारों ने बुडाह लोकनृत्य की शानदार प्रस्तुतियां दीं। इस मौके पर तहसीलदार श्री रेणुका जी जयचंद और तहसीलदार नाहन उपेंद्र सिंह मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे और विजेताओं को सम्मानित किया।
लोक परंपरा और वाद्ययंत्रों की अनूठी संगति
प्रतियोगिता में गिरिआर हाटी कला मंच गुंडाह, शिरगुल कला मंच घाटों, गोगा वीर सांस्कृतिक कला मंच पखवान गनोग, गुगा महाराज बुढ़ियात क्लब क्यारका, बुडाह नृत्य दल ऊंचा टिक्कर आदि दलों ने भाग लिया। इस प्राचीन नृत्य शैली में लोकगाथाएं जैसे होकू, छीछा, जगदेउ, जाग, भिन्युरी आदि प्रस्तुत की जाती हैं, जिनमें हुड़क, थाली जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों का प्रयोग होता है और कलाकार चोलटु परिधान पहनते हैं।
निर्णायक मंडल और मंच संचालन
निर्णायक मंडल में लोक संस्कृति विशेषज्ञ डॉ. देवराज शर्मा, डॉ. किरण बाला और संगीत प्रवक्ता श्री ओम प्रकाश शामिल रहे। मंच संचालन की भूमिका श्री दलीप वशिष्ठ ने निभाई।

