सिरमौर: सिरमौर जिले में जंगली हाथियों की बढ़ती समस्या को देखते हुए वन विभाग ने एक अनोखी पहल की है। अब किसानों को मधुमक्खी पालन के लिए प्रेरित किया जाएगा, जिससे हाथियों को रिहायशी इलाकों में आने से रोका जा सके।
प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत नई योजना
पांवटा साहिब के वन मंडल अधिकारी ऐश्वर्या राज ने बताया कि प्रोजेक्ट एलीफेंट के तहत यह नई रणनीति अपनाई जा रही है। दक्षिण भारत के कर्नाटक, केरल और तमिलनाडु में इस तकनीक का सफलतापूर्वक उपयोग किया जा चुका है, जहां मधुमक्खियों के छत्तों की मदद से हाथियों को फसलों और बस्तियों से दूर रखा गया है। अब इसी तर्ज पर सिरमौर के पांवटा साहिब और नाहन में भी इसे लागू किया जाएगा।
किसानों को मिलेगा अतिरिक्त लाभ
वन विभाग के अनुसार, मधुमक्खी पालन केवल हाथियों को रोकने में ही मददगार नहीं होगा, बल्कि इससे किसानों की फसलों के उत्पादन में भी बढ़ोतरी होगी। मधुमक्खियों की मौजूदगी से परागण बेहतर होगा, जिससे फसलें अधिक उपजाऊ बनेंगी और किसानों की आमदनी भी बढ़ेगी।
विशेषज्ञों से मिलेगा प्रशिक्षण
मधुमक्खी पालन को प्रभावी बनाने के लिए वन विभाग उद्यान विभाग और अन्य विशेषज्ञों की मदद लेगा। किसानों को बीकीपिंग (मधुमक्खी पालन) का प्रशिक्षण दिया जाएगा, ताकि वे इस तकनीक का अधिकतम लाभ उठा सकें।
जल्द शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट
वन विभाग जल्द ही पांवटा साहिब और नाहन के कुछ गांवों में इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करेगा। यदि यह सफल होता है, तो इसे अन्य प्रभावित क्षेत्रों में भी लागू किया जाएगा।
यह पहल इको-फ्रेंडली समाधान के रूप में जंगली हाथियों की समस्या से निपटने का एक बेहतरीन तरीका साबित हो सकती है, जिससे न केवल किसान सुरक्षित रहेंगे, बल्कि जैव विविधता भी बनी रहेगी।

